अब ग्रहों पर भी लॉकडाउन, इस वर्ष घरों में शहनाई बजने पर रहेगी रोक

जोधपुर। कोरोना संक्रमण के चलते मार्च अंतिम दिनों में प्रदेश सहित देश भर में धारा 144 और बाद में लॉकडाउन लगने से कई पूर्व से तय वैवाहिक तथा मांगलिक आयोजन मेजबानों को ऐनवक्त पर स्थगित करने पड़े। अब मेजबान लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन, लॉकडाउन खुलते ही गुरु, शुक्र एवं शनि ग्रह ने अपनी चाल वक्री कर रहे हैं। इस वर्ष कई ऐसे योग-संयोग भी बैठ रहे हैं, जिन्हें ज्योतिष शास्त्र मांगलिक आयोजनों के लिए श्रेष्ठ या सुखद नहीं मानता है। ऐसे में ज्योतिष एवं ग्रहों मे विश्वास रखने वाले परिवारों के लिए यह तय है कि इस वर्ष उनके घरों में अब शहनाइयों की गूंज भी लॉक होनी तय है।

ज्योतिषियों के अनुसार विवाह एवं मांगलिक कार्यों के उत्तम सम्पादन के लिए गुरु, शुक्र एवं शनि ग्रहों का शुभ योग होना जरूरी है। यह विविध ग्रंथों में अटल सत्य के रुप में उल्लेख किया गया है कि गुुरु तथा शुक्रास्त की अवधि में विवाहादि आयोजन नहीं होते हैं। इस वर्ष ऐसे भी विवाह लग्न की तिथियां काफी कम है। इसमें भी ग्रहों की बिगड़ी चाल ने स्थितियां और अधिक विकट कर दी हैं। तीस मई से आठ जून तक शुक्र तारा अस्त रहेगा तथा एक जुलाई से चार माह यानि 25 नवम्बर तक देव शयन रहेगा। इस बीच 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक अधिकमास का योग रहेगा। इसमें मांगलिक कार्य वर्जित है। 15 दिसम्बर से 14 जनवरी तक धनु संक्रान्ति यानि मल मास रहेगा। इसके बाद 17 जनवरी से 13 फरवरी तक बृहस्पति तारा अस्त रहेगा।

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एक मई से 15 दिसम्बर तक की अवधि में अधिकांश स्थितियां ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सकारात्मक नहीं कह सकते हैं। पंचांग अनुसार 11 मई से 29 सितम्बर तक शनि वक्री यानि नकारात्मक भाव तथा गुरु 14 मई से मकर राशि में वक्री होकर 30 जून को धनु राशि में प्रवेश करेगा। यहां पूर्व से ही केतु मूल में युक्त है। गुुरु-शनि की युक्ति तथा वक्री होने के बाद गुरु-केतु की युक्ति ज्योतिषानुसार अच्छा योग नहीं माना जाता है। 14 जून से 16 जुलाई के मध्य शनि-सूर्य षडाष्टक योग भी नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न कर रहे हैं। यह भी स्पष्ट हो रहा है कि गुरु-शनि का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में विचरण करना दोषयुक्त कहा जाता है।

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कंकणाकृति में सूर्य ग्रहण

ज्योतिषियों के अनुसार गुरु के वक्री होने के ठीक पहले 21 जून को सूर्य ग्रहण कंकणाकृति में दृश्यमान होगा। यह भी शुभ संकेत नहीं है। क्योकि पूर्व में भी 26 दिसम्बर 2019 को ऐसी ही स्थिति बनने पर इस वर्ष सामान्य जीवन पर विपरित परिस्थितियां हम सभी सहज देख रहे हैं। ज्योतिषियो़ के मतानुसार गुरु-शनि की वक्रता यानि ये ही ग्रह शुभ संयोग वाले नहीं होते हैं, तो वैवाहिक जीवन में अनुकूल प्रभाव कठिन है। शास्त्र में कहा गया है किदेव शनि की वक्रता, गुरु देव वक्रचार। गोचर गणना शास्त्र की, सुखद नहीं संचार।। अत: विभिन्न संयोगों के कारण 15 दिसम्बर तक अधिकतर महत्वपूर्ण ग्रहों की चाल व स्थिति नकारात्मक प्रभाव व संक्रमण उत्पन्न करने वाली होने के कारण वैवाहिक मांगलिक आयोजन टालना ही उत्तम है।