अब बढ़ रहा है वर्टिकल गार्डनिंग का फैशन, आप भी अपने घर में लगाएं

अक्सर फाइव स्टार होटल्स में दिखने वाली वर्टिकल गार्डनिंग पहली बार जयपुर के पिलर्स पर नजर आने लगी है। शहर की खूबसूरती में ग्रीनरी का सुखद अहसास कराने के लिए इस कॉन्सेप्ट को अपनाया जा रहा है। बेंगलूरु में वर्टिकल गार्डनिंग कॉन्सेप्ट हिट होने के बाद जयपुर डवलपमेंट अथॉरिटी (जेडीए) शहर में इस कॉन्सेप्ट को अपनाने जा रहा है।

इसके लिए जेडीए ने एक प्राइवेट फर्म को इसका डेमो देने के लिए कहा है। जिसके तहत वर्टिकल गार्डनिंग को फर्म ने गोपालपुरा पुलिया के नीचे एक पिलर पर इंस्टॉल किया गया है। यदि प्रयोग सफल रहा तो इसे पूरे शहर में अपनाया जाएगा। लोगों में कौतूहल का विषय बन रहे इस कॉन्सेप्ट की खासियत पत्रिका प्लस के जरिए जानिए…

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250 से ज्यादा गमले
इस वर्टिकल गार्डनिंग के पास युवा सेल्फी लेते दिख रहे हैं। इस गार्डन में सीधे खड़े आकार यानी वर्टिकल रूप में छह किस्म के सदाबहार पौधे लगाए गए हैं। इनकी संख्या लगभग 250 है। इनमें तीन कलर, लाइट ग्रीन, रेड और डार्क ग्रीन का कॉम्बिनेशन रखा गया है। नीचे की तरफ घास लगाई गई है।

खास यह है कि इन पौधों को सर्वाइव करने के लिए पानी की जरूरत कम होती है। पानी देने के लिए सबसे नीचे छोटा टैंक बनाया गया है। इसके पानी को ड्रिपिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। इसमें टाइमर लगाया गया है, जिससे सुबह 10, दोपहर 2 और शाम 6 बजे पानी छोड़ा जाता है। इससे पानी कम खर्च होता है और यह पौधे की जड़ तक जाता है।

…आसानी से सर्वाइव

इंस्टॉल करने वाले एक तकनीकी एक्सपर्ट ने बताया कि फिलहाल छांव वाले पौधे लगाए गए हैं। यदि प्रयोग सफल रहा तो जहां धूप ज्यादा होगी, वहां उसी वातावरण में सर्वाइव करने वाले पौधे लगाए जाएंगे। इसी तरह सर्दियों में ये पौधे बदल दिए जाएंगे। खास बात यह है कि इन पौधों में मिट्टी नहीं है, वरन ऑर्गेनिक खाद और कोकोपीट यानी नारियल का बुरादा भरा गया है। कोकोपीट काफी समय तक पानी को रोकने की क्षमता रखता है। एेसे में यदि किसी कारणवश पौधे को दो दिन तक पानी नहीं भी मिले तो ये आसानी से सर्वाइव कर सकते हैं।

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बेंगलूरु में हिट रहा वर्टिकल गार्डन
देश में सबसे पहले वर्टिकल गार्डन की शुरुआत बेंगलूरु के पिलर्स पर हुई थी। इसे इसी साल शुरू किया गया है। शहर के विभिन्न पिलर्स पर लगभग 3500 प्लांट इंस्टॉल किए गए हैं। एक एनजीओ की ओर से इसकी शुरुआत की गई है, जिसमें 10 किस्म के पौधे लगाए गए हैं।

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एनजीओ का उद्देश्य बेंगलूरु में बढ़ते पॉल्यूशन को कम कर ग्रीनरी को बढ़ावा देना है। अर्बन हीट गाइसलेंड इफेक्ट, स्मॉग को कम करने, पॉल्यूटेड एयर को प्यूरीफाई करने और बड्र्स के लिए हेल्दी हैबीटाट क्रिएट करने के लिए यह पहल की गई है। इन पौधों को रोजाना महज 100 मिलीलीटर पानी की ही जरूरत होती है।