अवैध औद्योगिक क्षेत्र बस गया, नाम भी रख दिया, जिम्मेदारों का ध्यान ही नहीं

जयपुर। क्या कोई यकीन करेगा कि भूखंड काटकर औद्योगिक क्षेत्र बसा दिया जाए, नाम रख दिया जाए, लेकिन जिम्मेदारों को कानों कान इसकी खबर न हो। विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र से सटी कई बीघा जमीन पर यह खेल हो चुका है।

पहले तो अवैध तरीके से भूखंड सृजित कर बेच दिए गए और अब यहीं औद्योगिक फैक्ट्रियां और कारखाने, गोदाम पनपते जा रहे हैं। अवैध क्षेत्र को विकसित करने के लिए वीकेआई एरिया 19 बना दिया गया। जबकि औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना करने वाले रीको के रिकॉर्ड में ऐसा क्षेत्र है ही नहीं।

यह जमीन वीकेआई के पास, दिल्ली की तरफ बायपास की तरफ दाईं ओर है। वीकेआई एरिया 18 में भी कई जगह इसी खेल के जरिए चांदी कूटी जा रही है। यह जानकारी जेडीए अफसरों से लेकर जिला प्रशासन तक को है, लेकिन मिलीभगत के इस खेल में मास्टर प्लान की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

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जांच का बहाना, कहीं भी करो निर्माण…
जिस जमीन पर अवैध गतिविधि की जा रही है, उस पर विवाद भी बताया जा रहा है। जेडीए अधिकारियों के मुताबिक ग्राम लक्ष्मीनारायणपुरा में खसरा संख्या 676/1, 676/2, 676/3,676/4, 676/5, 676/6, 677, 678, 679, 680/760, 681, 682, 687/1, 687/2 से जुड़ी जमीन का मामला है। अफसर इसकी जांच कर रहे हैं। हालांकि, जांच की बात कहकर लम्बे समय से टरकाया जा रहा है। इस भूमि की किस्म चारागाह होने की भी आशंका जताई जा रही है।

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कई बड़े घरानों ने खरीदी जमीन…
यहां कृष्णा इण्डस्ट्रीयल के नाम से योजना सृजित कर भूखंड बेचे जा रहे हैं। रजिस्ट्री भी करवाई जा रही है। यहां कई बड़े औद्योगिक घरानों ने भी निर्माण कर लिया है। इसी से सटी जमीन पर वैष्णो देवी नगर व वृदावन विहार नाम से आवासीय योजना भी सृजित कर दी गई। यहां भैरव गृह निर्माण सहकारी समिति व हथरोई गृह निर्माण सहकारी समिति के पट्टे देने की बात कही जा रही है।

जेडीए को पता है
अवैध रूप से बसाई जा रही योजनाओं के मामले में जेडीए उपायुक्त, प्रवर्तन अधिकारी से लेकर जेडीए सचिव तक मामला पहुंच चुका है। जब भूखंड काटे गए तब भी शिकायतें की गईं थीं। अब जब बसावट हो रही है तो भी जानकारी है।

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कौन सही, कौन गलत, तय करे जिम्मेदार
इस मामले में जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले रामपाल, लालचंद, राकेश मीणा व अन्य से बातचीत भी की गई, जिससे कि हकीकत सामने आ सके। लेकिन उलटे मामला उलझता गया। लालचंद व रामपाल ने जमीन बेचान करने का तर्क दे दिया। उनका कहना है कि जिसे जमीन बेची, वही बताएगा कि यहां कैसे उद्योग शुरू हो गए। इस पर राकेश मीणा ने ऐसा कुछ होने से ही इनकार कर निर्माण करने वालों से ही बातचीत करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।