आरटीआई एक्ट के हत्यारे वन अधिकारी- एपिसोड़ एक

सांगाखेड़ा परिक्षेत्र भ्रष्टाचार की खान? 

विभागीय सूत्रो से पश्चिम छिन्दवाड़ा सामान्य वनमण्डल की सांगाखेड़ा परिक्षेत्र में होने वाले भ्रष्टाचार की जानकारी लगातार प्राप्त हो रही थी। जिसमें हमें यह जानकारी भी प्राप्त हुई थी की संरक्षित कक्ष 301 एवं संरक्षित कक्ष 353 में कराये गये वृक्षारोपण हेतु उपयोग किये जाने के नाम पर गोबर, खाद एवं काली मिट्टी क्रय एवं मजदूरी के फर्जी वाउचर बनाकर भुगतान करना बताया गया है। 

आरटीआई आवेदन में मांगी गई जानकारी और श्री जगदीश रघुवंशी का भ्रष्ट आचरण 

प्राप्त जानकारी के आधार पर दिनांक 02.12.2019 को आरटीआई आवेदन श्री जगदीश रघुवंशी, लोक सूचना अधिकारी, सांगाखेड़ा परिक्षेत्र को रजिस्टर डाक (RI573950230IN) से भेजा गया था। जिसमें कुल 4 बिन्दुओं की जानकारी चाही गई थी। 

  • कक्ष क्रमांक पी.301 में कराये गये वृक्षारोपण कार्य हेतु उपयोग किये गये गोबर खाद एवं काली मिट्टी क्रय से संबंधित प्रमाणक की सत्यापित प्रति 
  • कक्ष क्रमांक पी.301 में कराये गये वृक्षारोपण कार्य हेतु प्रदाय मजदूरी के प्रमाणक की सत्यापित प्रति 
  • कक्ष क्रमांक पी.301 में वृक्षारोपण कार्य हेतु क्रय किये गये गोबर खाद एवं काली मिट्टी के बिलो की सत्यापित प्रति 
  • कक्ष क्रमांक पी.301 में वृक्षारोपण कार्य हेतु क्रय किये गये गोबर खाद एवं काली मिट्टी से संबंधित नोटशीट एवं स्वीकृति की प्रति 

चाही गई जानकारी के जबाब में परिक्षेत्र अधिकारी श्री जगदीश रघुवंशी ने पत्र क्रमांक/2019/1247 दिनांक 10.12.2019 से डाक द्वारा सूचना भेजी की “आप स्वंय व्यक्तिगत रूप से वन परिक्षेत्र कार्यालय में समय 11ः00 बजे से 05ः00 बजे तक उपस्थित होकर प्राप्त करें।” जबकि लोक सूचना अधिकारी का इस तरह की सूचना भेजना आरटीआई अधिनियमों के विरूद्ध है। जबकि लोक सूचना अधिकारी को चाहिए था की आरटीआई आवेदन के तारतम्य में अपने पत्र के माध्यम से पेजो की संख्या एवं जानकारी हेतु फीश का विवरण प्रदाय करें ताकि आवेदक चाही गई फीश जमा कर जानकारी प्राप्त कर सके। परन्तु श्री जगदीश रघुवंशी द्वारा ऐसा नहीं किया गया। इसके वावजूद आरटीआई कार्यकर्ता ने परिक्षेत्र अधिकारी को कई बार फोन करके संपर्क करने का पर्यास किया ताकि उनसे मिलकर जानकारी प्राप्त की जा सके। परन्तु परिक्षेत्र अधिकारी श्री जगदीश रघुवंशी ने फोन का कोई भी जबाब नहीं दिया था। 

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श्री आर.एस. चौहान, उप वनमण्डलाधिकारी का भी भ्रष्ट आचरण आया सामने? 

जब अधिनियम में निश्चित 30 दिन की समयावधि के उपरांत भी जानकारी प्राप्त नहीं हुई तो आरटीआई कार्यकर्ता ने जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से दिनांक 25.01.2020 को पंजीकृत डाक (RI569552378IN) के माध्यम से श्री चौहान, प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की थी। 

श्री चौहान ने पत्र क्रमांक/564, तामिया, दिनांक 13.02.2020 से लेख किया था की “दिनांक 17.02.2020 को प्रकरण से संबंधित सुनवाई की जाना है। अतः आप दिनांक 17.02.2020 दोपहर 12ः00 बजे उपवनमण्डल कार्यालय तामिया में उपस्थित होवे।” जो रजिस्टर डाक से दिनांक 19.02.2020 को प्राप्त हुआ था। अर्थात निर्धारित सुनवाई तिथि के एक दिन पश्चात्। स्वाभाविक है की जब प्रथम अपील सुनवाई हेतु प्राप्त सूचना पत्र निर्धारित सुनवाई तिथि के पश्चात् प्राप्त होगा तो अपीलार्थी कैसे सुनवाई में अपना पक्ष रखने हेतु उपस्थित होगा। बात यही नहीं समाप्त होती है। श्री चौहान ने पुनः पत्र क्रमांक/736 तामिया, दिनांक 25.02.2020 रजिस्टर डाक से प्रथम अपीलय सुनवाई हेतु सूचना भेजी थी जिसमें अपील सुनवाई हेतु दिनांक 26.02.2020 निर्धारित की गई थी, जो पुनः निर्धारित सुनवाई तिथी के 1 दिन पश्चात् प्राप्त हुई थी। 

बड़े आचश्चर्य जनक बात है की श्री चौहान, उप वनमण्डलाधिकारी तामिया ने अपनी ज्ञानता का परिचय देते हुए पुनः तीसरी बार फिर से पत्र क्रमांक/800 तामिया दिनांक 28.02.2020 को रजिस्टर डाक से अपील सुनवाई हेतु सूचना भेजी गई, जिसमें दिनांक 04.03.2020 की तिथि अपील सुनवाई हेतु निर्धारित की गई थी। जो अपीलार्थी को दिनांक 04.03.2020 को ही प्राप्त हुई थी जो अपील सुनवाई की तिथि भी थी। जबकि नियमानुसार अपीलार्थी को सुनवाई हेतु सूचना निर्धारित सुनवाई तिथि के कम से कम 15 दिन पूर्व प्राप्त होनी चाहिए। परन्तु श्री चौहान ने यह अपने भ्रष्ट आचरण का परिचय दिया। 

श्री चौहान द्वारा गैर जिम्मेदाराना तरीके से बार-बार अपील सुनवाई की सूचना भेजी जो अपील सुनवाई तिथि के उपरांत या अपील सुनवाई के दिन ही प्राप्त हुई थी। जो आरटीआई नियमों की खुली अव्हेलना है। साथ ही श्री चौहान को चाइए था की अगर अपील सुनवाई किसी कारण से नहीं हो पाई थी तो प्रकरण के गुण और दोष के आधार पर अपील का आदेश सुनाया जाकर अपीलकर्ता को भेजा जाना चाहिए था परंतु श्री चौहान ने एसा नहीं किया जो आरटीआई अधिनियमो के विरूद्ध था। 

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आरटीआई कार्यकर्ता के द्वारा श्री रघुवंशी एवं श्री चौहान को पुनः एक और मौका

आरटीआई कार्यकर्ता ने श्री रघुवंशी परिक्षेत्र अधिकारी सांगाखेड़ा एवं श्री चौहान, उप वनमण्डलाधिकारी को जानकारी प्रदाय करने हेतु पुनः एक और मौका दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता ने इस बार दिनांक 20.01.2020 को रजिस्टर डाक (RI569549612IN) से कक्ष क्रमांक पी.353 के संबंध में वही 4 बिन्दुओं की जानकारी मांगी थी, जो कक्ष क्रमांक पी.301 के संबंध में चाही गई थी। परन्तु इस बार श्री रघुवंशी ने कोई भी जबाब नहीं दिया। 

जब श्री रघुवंशी से कोई भी जबाब प्राप्त नहीं हुआ तो आरटीआई कार्यकर्ता ने दिनांक 16.03.2020 को रजिस्टर डाक (RI549897278IN) से श्री चौहान के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की गई थी परन्तु यह बड़े आश्चर्य की बात थी की जहां श्री रघुवंशी, लोक सूचना अधिकारी ने अधिनियम में निर्धारित 30 दिन की अवधि में भी कोई जबाब तक नहीं दिया वही श्री चौहान प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी प्रथम अपील करने पर कोई भी जबाब तक नहीं दिया था।

जाने श्री रघुवंशी एवं श्री चौहान ने आरटीआई एक्ट के कौन-कौन से नियमों का उल्लघंन किया

  • अधिनियम की धारा 7 की उपधारा 1 के परंतुक उल्लंघन  
  • अधिनियम की धारा 5 की उपधारा 2 के परंतुक उल्लंघन 
  • अधिनियम की धारा 6 की उपधारा 3 के परंतुक उल्लंघन 

जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि, परंतुक के अधीन रहते हुए धारा 6 के अधीन अनुरोध प्राप्त होने पर, यथास्थिति लोक सूचना अधिकारी, यथा संभव शीघ्रता से और किसी भी दशा में अनुरोध की प्राप्ति के 30 दिन के अंदर ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहित की जाए, जानकारी उपलब्ध करायेगा या धारा 8 या धारा 9 में विनिर्दिष्ट कारणों में से किसी कारण से अनुरोध को अस्वीकार करेगा। परन्तु लोक सूचना अधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया गया था। 

  • अधिनियम की धारा 5 की उपधारा 3 का उल्लंघन
  • अधिनियम की धारा 7 की उपधारा 3 का उल्लंघन
  • अधिनियम की धारा 7 की उपधारा 8 का उल्लंघन
  • अधिनियम की धारा 19 की उपधारा 6 का उल्लंघन
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कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कक्ष-समन्वय) म.प्र., सतपुड़ा भवन, भोपाल के पत्र क्रमांक/सम/सू.अ./5490, भोपाल, दिनांक 22.08.2019 के बिन्दु क्रमांक 2 एवं 3 में स्पष्ट निर्देश दिये गये है कि “जानकारी दिये जाने में आनाकानी नहीं की जानी चाहिए एवं जो जानकारी नियमानुसार दी जा सकती है, प्रदाय किये जाने में किसी भी प्रकार का विलम्ब न किया जावे। प्रत्येक प्रकरण में सद्भावना पूर्वक पहल कर जानकारी शीघ्र से शीघ्र प्रदाय दिये जाने के प्रयास करें।” परन्तु लोक सूचना अधिकारी ने पत्र में प्रयुक्त “सद्भावना पूर्वक” एवं “शीघ्र से शीघ्र” जैसे शब्दो की धज्जियां उडाई दी है और प्रथम अपीलीय अधिकारी तो श्री रघुवंशी के गुरु निकले। लोक सूचना अधिकारी का व्यवहार इस ओर भी इशारा करता है कि, उन्हें कानून का कोई डर नहीं है, शायद वे निश्चित है की जब तक कुछ अल्पज्ञानी/भ्रष्ट लोकसेवक विभाग में मौजूद है तब तक उनके खिलाफ कोई भी कार्यवाही संभव नहीं है।

आरटीआई प्रकरण का निराकरण ना करना भ्रष्टाचार की पुष्टि? 

आरटीआई आवेदनकर्ता ने भ्रष्टाचार की पुष्टि के लिए श्री रघुवंशी को दिनांक 16.03.2020 को कक्ष क्रमांक पी.301 के संबंध में एक बार फिर पुनः वही 4 बिन्दुओं की जानकारी चाही, जो पूर्व में भी चाही गई थी परन्तु श्री रघुवंशी ने अपना वही जबाब दोहराया जो पूर्व में दिया था। तब श्री चौहान के समक्ष दिनांक 25.08.2020 को प्रथम अपील प्रस्तुत की गई परन्तु श्री चौहान द्वारा भी अपना वही पुराना तरीका दोहराया जो उन्होंने पूर्व की आरटीआई प्रकरणो में किया था। 

जिससे यह सिद्ध होता है कि, सांगाखेड़ा परिक्षेत्र में भ्रष्टाचार तो हुआ है और दोनो ही भ्रष्टाचार को दबाने के उद्देश्य से जानकारी प्रदाय नहीं कर रहे है।