एक ही दिन में बदल गई आसाराम की दिनचर्या, बाहर का खाना बंद, सजा के बाद पहली सुबह पी जेल की चाय, खाया गुड़-चना, रातभर रहा तनाव में

69
एक ही दिन में बदल गई आसाराम की दिनचर्या, बाहर का खाना बंद, सजा के बाद पहली सुबह पी जेल की चाय, खाया गुड़-चना, रातभर रहा तनाव में | Kranti Bhaskar
जोधपुर। अपने ही आश्रम की नाबालिग छात्रा से यौन शोषण के दोषी आसाराम की दिनचर्या सजा मिलने के एक दिन के भीतर ही बदल गई है। उन्हें कैदी नंबर 130 का तमगा दे दिया गया है। बाहर से आने वाला आश्रम का खाना बंद कर दिया गया है। सजा मिलने के बाद गुरुवार को पहली सुबह भी उन्हें जेल की चाय पीने को दी गई। इसके साथ ही गुड़-चना भी दिया। सजा मिलने से आसाराम रातभर तनाव में रहा जिस कारण वह सो नहीं सका। गुरुवार तडक़े थोड़ी देर के लिए उन्होंने नींद ली।
साढ़े चार साल तक जोधपुर जेल में बंदी के रूप में रहने वाले आसाराम के लिए कैदी के रूप में पहली रात बहुत बेचैनी भरी रही। उम्र कैद की सजा सुनाए जाने के बाद कैदी नंबर 130 के रूप में आसाराम पूरी रात तनाव में रहा। जेल से रिहा होने की उम्मीदों पर पानी फिरने के बाद आसाराम अंदर से पूरी तरह टूटा नजर आया। किसी से उसने कोई बात नहीं की लेकिन जिंदा रहने के लिए कुुछ तो खाना पड़ेगा का समझाने पर आसाराम ने गुरुवार सुबह जेल में बनी चाय के साथ चना व गुड़ खाया। बता दे कि सजा से पहले कोर्ट की अनुमति से उसके लिए जोधपुर स्थित आश्रम से दोनों समय का खाना और नाश्ता आता था। इस कारण खाने को लेकर आसाराम को कभी किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आई लेकिन बुधवार को नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीडऩ के आरोप में उसे दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई गई। यह उम्र कैद भी उसके शेष जीवन तक चलेगी। यानि जब तक आसाराम जिंदा है उसे जेल में ही रहना होगा। एेसे में अब उसे जेल का खाना ही मिलेगा। बाहर से आने वाला खाना बंद कर दिया गया है।
शीघ्र देंगे कैदियों वाले कपड़े
आसाराम को सजा सुनाए जाने के बाद अभी तक जेल प्रशासन की तरफ से कैदियों वाले कपड़े नहीं दिए गए है। जेल प्रशासन का कहना है कि आसाराम को शीघ्र कैदी के कपड़े दे दिए जाएंगे। साथ ही जेल प्रशासन ही तय करेगा कि उससे कैसा काम लिया जाए। नियमानुसार सत्तर वर्ष से अधिक उम्र वाले कैदियों से हल्का काम कराया जाता है। एेसे में आसाराम को भी पेड़-पौधों में पानी पिलाने का काम कराया जाएगा।
शरत बना कैदी नम्बर129
आसाराम को जेल के वार्ड नम्बर दो के बैरक नम्बर एक में ही रखा गया है। उसके साथ पहले रसोइया प्रकाश रहता था लेकिन उसे बरी कर दिए जाने पर अब दूसरे दोषी शरत को आसाराम की सेवा करने का मौका मिला है। शरतचंद्र को कैदी नम्बर 129 का तमगा दिया गया है। वह वार्ड दो के बैरक नम्बर दो में रहेगा। दोनों कैदी एक ही परिसर में रहेंगे। वहीं दूसरी दोषी शिल्पी को सेंट्रल जेल परिसर में ही महिला जेल भेजा गया है। इन दोनों दोषियों को कोर्ट ने बीस-बीस साल की सजा सुनाई है।
दूसरे दिन भी रही कड़ी सुरक्षा
जोधपुर की सेंट्रल जेल के बाहर गुरुवार को दूसरे दिन भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। हालांकि सजा सुनाने के दौरान बुधवार को किसी प्रकार का हंगामा अथवा उत्पात नहीं हुआ था फिर भी पुलिस किसी प्रकार की रिस्क नहीं लेना चाहती है। एेहितयात के तौर पर गुरुवार को दूसरे दिन भी जेल के बाहर पुलिस जाब्ता तैनात रहा। जोधपुर महानगर में अभी भी आईपीसी की धारा 144 लागू है जो तीस अप्रैल शाम तक जारी रहेगी। शहर में सभी स्थानों पर आसाराम के सर्मथकों पर नजर रखी जा रही है।
आश्रम पर भी पहरा बरकरार
आसाराम के पाल व मणाई स्थित आश्रमों पर भी गुरुवार को पुलिस का पहरा बरकरार रहा। इन दोनों आश्रमों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है। आश्रम में अभी पांच-दस लोग ही मौजूद है।  हालांकि जोधपुर मेंं आज भी आसाराम के समर्थक पहुंचे। जेल के बाहर महाराष्ट्र से एक महिला समर्थक पहुंच गई जिसे पुलिस वापस रेलवे स्टेशन ले गई और उसे यहां से रवाना किया। पुलिस रेलवे स्टेशनों व बस स्टैंडों पर भी नजर रखे हुए है।
न्यायाधीश की बढ़ाई सुरक्षा
आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाने वाले अनुसूचित जाति जनजाति न्यायालय के विशेष न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। उनकी सुरक्षा में दो गनमैन तैनात किए गए है। पुलिस को आशंका है कि सजा सुनाने पर आसाराम के समर्थक उनका नुकसान कर सकते है। हालांकि न्यायाधीश ने पुलिस से अपनी सुरक्षा की मांग नहीं की थी।
शिवा, प्रकाश ने भरे बरियत मुचलके
मामले में बरी होने वाले शिवा व प्रकाश ने गुरुवार को एससी-एसटी कोर्ट में उपस्थित होकर बरियत मुचलके भरे। कोर्ट ने इन दोनों को 10-10 हजार की बरियत राशि के मुचलके भरने को कहा था जिस पर दोनों ने कोर्ट में 50-50 हजार राशि बतौर मुचलके भरे है। इसके अलावा शिवा व प्रकाश ने इस मामले में अपील होने पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने को लेकर कोर्ट में शपथ पत्र भी प्रस्तुत किए है जिसमें उन्होंने सशपथ यह लिखा है कि अगर इस मामले में अपील होती है तो नोटिस जारी होने तथा कोर्ट के बुलावे पर वह उपस्थित होंगे।
… तो आसाराम इसलिए पहनते है लाल टोपी
आसाराम और उनके बेटे नारायण साई को अक्सर लाल टोपी पहने देखा जाता रहा है। दरअसल, इसके पीछे भी एक राज छिपा है। वैसे दोनों पिता-पुत्र पर तंत्र-मंत्र करने के आरोप लंबे समय से लगते रहे है लेकिन उनके एक पूर्व सेवादार और निजी सचिव राहुल सचान ने कुछ साल पहले एक सनसनीखेज खुलासा कर सबको चौंका दिया था।
राहुल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि आसाराम बापू और उनके बेटे नारायण साईं पहनने के लिए हमेशा लाल रंग की टोपी का इस्तेमाल करते है जो काले जादू की प्रतीक है। उसने यह भी कहा कि दोनों आंखों में काजल लगाते है। राहुल का दावा था कि दोनों टोपी और काजल का इस्तेमाल वशीकरण के लिए करते है। राहुल ने ये भी दावा किया था कि आसाराम और नारायण ने तंत्र-मंत्र पर दो करोड़ रुपये खर्च किए है। उन्हें उम्मीद है कि इसके सहारे वह बच जाएंगे और जेल से बाहर आ जाएंगे। राहुल ने कहा कि लांल रंग की टोपी जो आसाराम और नारायण पहनते है वह वशीकरण के लिए इस्तेमाल की जात है जिस पर सवा लाख मंत्रों का जाप किया गया है। आसाराम के इस करीबी ने दावा किया कि आसाराम और नारायण खुद को बचाने के लिए लंबे समय से काले जादू का इस्तेमाल करते रहे है।