कोरोना की दवा को लेकर दुनिया को चौंकाने की तैयारी में भारत

3
नई दिल्‍ली: कोरोना के कहर ने दुनिया को घुटनों पर ला दिया है। विश्‍व में कई देशों के वैज्ञानिक इस महामारी से निपटने का उपाय खोजने में लगे हुए हैं, लेकिन किसी को अभी तक कोई सफलता हाथ नहीं लग पाई है। दुनिया भर में कोरोना के खिलाफ लड़ाई जारी है और इस लड़ाई में हिन्दुस्तान भी पीछे नहीं है। जब दुनिया के कई देशों में कोरोना को हराने की तैयारी चल रही है, इसी बीच में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भारत बायोटेक से हाथ मिलाया है और स्वदेशी वैक्सीन बनाने की तैयारी शुरु कर दी है।

कोरोना वायरस को हराने के लिए दुनियाभर में जोरों की तैयारी चल रही है। इसी दौरान भारत में भी ये कोशिश जारी है कि किसी तरह से कोरोना को हराने के लिए तैयारी की जाए। इसके लिए भारत में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भारत बायोटेक इंटरनैशनल यानी बीबीआईएल से हाथ मिलाया है। दोनों संस्थाएं मिलकर Covid-19 की स्वदेशी दवा या वैक्सीन तैयार करने का काम करेंगी।

ऐसे बनाई जाएगी वैक्‍सीन
कोरोना की वैक्सीन विकसित करने के लिए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे में अलग किए गए वायरस स्ट्रेन का इस्तेमाल किया जाएगा। आईसीएमआर की ओर जारी बयान में बताया गया है कि एनआईवी में अलग किए गए वायरस स्ट्रेन को सफलतापूर्वक बीबीआईएल के लिए भेज दिया गया है। अब वैक्सीन तैयार करने पर काम किया जाएगा। इसे लेकर आईसीएमआर की ओर से जारी बयान में कहा गया है, जिसमें जिक्र है कि दोनों सहयोगियों के बीच वैक्सीन डिवेलपमेंट को लेकर काम शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में आईसीएमआर-एनआईवी की ओर से बीबीआईएल को लगातार सपोर्ट दिया जाता रहेगा। वैक्सीन डिवेलपमेंट, ऐनिमल स्टडी और क्लिनिकल ट्रायल को तेज करने के लिए आईसीएमआर और बीबीआईएल तेजी से अप्रूवल लेते रहेंगे।

वैसे काफी पहले से कोरोना के खिलाफ भारत बायोटेक सक्रिय है। बताया जा रहा है कि शनिवार को हुआ यह समझौता कोरोना कै वैक्सीन खोजने की दिशा में भारत बायोटेक का तीसरा कदम है। इससे पहले 20 अप्रैल को डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नॉलजी की ओर से भारत बायोटेक को इनऐक्टिवेटेड रैबीज वेक्टर प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए वैक्सीन बनाने के लिए फंडिंग का ऐलान किया गया था।

इससे पहले भारत बायोटेक ने 3 अप्रैल को कहा था कि वह एक बूंद वाले ‘CoroFlu’ पर काम कर रही है जोकि मनुष्यों में सुरक्षित पाई गई एक वैक्सीन पर आधारित है। इस वैक्सीन को विकसित करने के लिए भारत बायोटेक उस ग्रुप का हिस्सा थी, जिसमें यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन, मैडिन्सन और फ्लूजेन समेत कई कंपनियां भी शामिल थीं। इस वैक्सीन की खोज के बारे में कहा जा रहा है कि कम से कम 30 करोड़ वैक्सीन डोज बनाकर वैश्विक स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन की भी तैयारी है। एक समझौते के तहत फ्लूजेन कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को देगी, जिससे प्रोडक्शन बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल इस दावे को लेकर भी कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि सफलता कितनी मिलेगी इसके लिए हमें इंतजार करना होगा।