कोरोना के चलते गई सचिन की नौकरी, परिवार के साथ गांव जाने को मजबूर

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कोरोना के चलते गई सचिन की नौकरी, परिवार के साथ गांव जाने को मजबूर - राष्ट्रीय

दीपक दुबे, मुंबई: मास्टर ब्लास्ट सचिन तेंदुलकर का हर कोई फैन है। देश हो या विदेश करोड़ों लोग उनके चाहने वाले है। कम उम्र से ही विरोधी टीमों के छक्के छुड़ाने वाले सचिन का अच्छा प्रदर्शन ही रहा कि इन्हें क्रिकेट का भगवान तक कहा जाने लगा। ऐसे में सचिन से जुड़ी हुई हर चीजे हो या फिर उनसे जुड़ा हुआ कोई भी इंसान उतना खास व महत्वपूर्ण हो जाता है, जितने कि सचिन तेंदुलकर खुद है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं हूबहू सचिन की तरह दिखनें वाले बलबीर चंद की, जो पिछले 22 सालों से सचिन की नकल उतार कर उनकी तरह दिख कर सचिन के फैन्स के मनोरंजन तो कर ही रहे थे और सचिन की बदौलत अच्छे खासे पैसे भी कमाएं। लेकिन इन दिनों बलवीर चंद काफी परेशान है और उनकी परेशानी की वजह बन चुका है ये कोरोना।

कोरोना के चलते पहले इनकी नौकरी गयी। उसके बाद मुम्बई के विक्रोली इलाके में किराए पर परिवार के साथ रहने वाले बलवीर को अपना बोरिया बिस्तर बांधकर ट्रेन से अपने गांव जाना पड़ा। बलवीर इन दिनों पंजाब के शहलोंन गांव में अपने परिवार के साथ रहने को मजबूर है। बलवीर जब परिवार के साथ मुम्बई से पंजाब गए तो इन्हें व इनके 2 बच्चे व पत्नी को कोरोना हो गया। यह वो दौर था कि आय का न होना और बीवी व 2 बच्चों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आना। इस हादसे ने इन्हें अंदर से झकझोर दिया, लेकीन इन्होंने हार नहीं मानी। खुद तो लड़े ही परिवार का भी मनोबल बढ़ाते रहे। इसी बीच अस्पताल में जब इन्हें भर्ती कराया गया तो ये अन्य मरीजों को योगा के साथ-साथ खुद को कैसे फिट रखना है, उसकी भी ट्रेनिंग देते रहे। हालांकि अब ये और इनका परिवार ठीक हो कर घर आ चुके हैं।

बलबीर बताते है कि 1989 में सचिन के रूप में इन्हें पहचान तब मिली जब सचिन ने अपना डेब्यू किया था। यहां तक कि अक्सर लोग समझ भी नही पाते कि असली व नकली सचिन कौन है, जिसका फायदा भी इन्हें खूब मिला। बलबीर के मुताबिक साल 1999 तक अस्पताल में काम करते रहे। उसके बाद दिल्ली में जब इंडिया पाकिस्तान का टेस्ट मैच था, उस दौरान अनिल कुंबले ने 10 विकेट झटके थे तो सुनील गवास्कर भी इन्हें देख कर स्टेडियम में चकमा खा गए थे। इन्हें पहली बार कमेंट्री बॉक्स में बुलाकर दुनिया के सामने सचिन के डूब्लिकेट के रूप में पहचान करायी। बलबीर बताते है कि उसके बाद उन्हें ताज होटल ले जाया गया, जहां सचिन अपने फैन्स को ऑटो ग्राफ दे रहे थे। इन्होंने ने भी सचिन के सामने 6 फोटो बढ़ाई ऑटोग्राफ के लिए और कहा इस मेरी फ़ोटो पर  ऑटोग्राफ दे दीजिए। सचिन बलबीर को देख भौचक रह गए और मुस्कुराते हुए  ऑटोग्राफ दिया। जब सचिन बस में बैठकर जाने लगे तो बलबीर की फोटोज मांगी अपने पास रखने के लिए। बलबीर ने 5 फोटोज सचिन को दे दी और 1 खुद रख ली। बलबीर के मुताबिक सचिन ने शायद पहली बार किसी से कुछ मांगा होगा, वो सारी फ़ोटो बलबीर ने 60 रुपये देकर खिंचवाई थी।

हालांकि इसके बाद बलबीर का नसीब चमका और उनको देश-विदेश में मैच देखने का सौभाग्य मिला, साथ ही कुछ फिल्मों में काम और सचिन के साथ एड मिले। यहां तक कि शादियों में इन्हें बुलाया जाने लगा। मुम्बई के प्रसिद्ध गोली वडा पाव के भी ब्रेंड अम्बेसडर बने, जहां इस कम्पनी की कई चेन चलती थी।

बलबीर आखिर में कहते है कि शक्‍ल मैच होने मात्र से जीवन नहीं चल पाता, इसलिए एक्टिंग करने लगे, गाने गाने लगे व स्टेज परफॉर्मेंस और लोग इनके साथ फ़ोटो खिंचवाते।  इन्हें उम्मीद है कि जिंदगी फिर से पटरी पर आएगी और खोई हुई नौकरी इस कोरोना संकट काल के बाद इन्हें दोबारा मिल जाएगी।