जनता कि जेब खाली, पेट खाली, ओर सरकार कर रही है खर्चे पर खर्चा, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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देश। भारत में विश्व का सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है जिसकी लंबाई 47 लाख किलोमीटर है।  इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), एक्सप्रेसवे, राज्य राजमार्ग (एसएच), जिला सड़कें, पीडब्ल्यूडी सड़कें और प्रॉजेक्ट सड़कें शामिल हैं। भारत में 60% से अधिक वस्तुओं को लाने-जाने के लिए सड़कों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि 85% यात्री परिवहन के लिए भी सड़कों का इस्तेमाल किया जाता है।

जनता कि जेब खाली, पेट खाली, ओर सरकार कर रही है खर्चे पर खर्चा, पढ़िए पूरी रिपोर्ट। - राष्ट्रीय

सामान्य रोड और स्टेट हाइवे 5 से 6 करोड़ प्रति किलोमीटर की दर से बनते हैं। वहीं हाइवे निर्माण में प्रति किमी 9 करोड़ रुपए खर्च आता है, जबकि एक्सप्रेस वे के मूल निर्माण पर 12 से 15 करोड़ रुपए प्रति किमी खर्च होता है। सड़क निर्माण का खर्च पत्थर की क्वालिटी, जमीन, निर्माण सामग्री, खनन आदि कई बिंदुओं पर निर्भर करता है। जमीन अधिग्रहण और वेतन आदि जोडऩे पर प्रति किमी एक्सप्रेस वे खर्च 40 करोड़ तक पहुंच जाता है।

केंद्रीय बजट 2018-19

व्यय:  सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का कुल व्यय 71,000 करोड़ रुपए अनुमानित है।  यह 2017-18 के संशोधित अनुमानों से 16% अधिक है।  2018-19 में सबसे अधिक 58% आबंटन सड़क कार्य के लिए है (40.881 करोड़ रुपए)।  इसके बाद 42% आबंटन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (29,663 करोड़ रुपए) के लिए किया गया है।

जनता कि जेब खाली, पेट खाली, ओर सरकार कर रही है खर्चे पर खर्चा, पढ़िए पूरी रिपोर्ट। - राष्ट्रीय

अभी पिछले महीने ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार अगले दो वर्षों में राजमार्गों के निर्माण पर 15 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। वैसे यह वक्त आर्थिक मंदी है देश कि जनता एक बड़े संकट का सामना कर रही है लोगो कि नोकरी चली गई है, गरीब के पास खाने के लिए अनाज नहीं है ऐसे में करोड़ों रुपये निर्माण कार्य ओर ब्यूटिफिकेशन पर करने कि कितनी आवश्यकता है यह आप सवय सोचिए क्यो कि सरकार को तो यह सब तब सोचेगी जब उसे टैक्स वसूलने से फुर्सत मिले।

अब आप जरा सोचिए कि देश में कितने किलोमीटर सड़क है उस पर कितना खर्च आता है अधिकारी ओर ठेकदार कितना कमीशन मरते है समय समय पर ईमानदार पत्रकार घोटाले ढूंढकर जनता के सामने सच्चाई लेते रहे है, लेकिन जनता को सब कुछ जल्द भूलने कि आदत है। खेर इस ख़बर ओर सकड़ जैसे अन्य निर्माणों पर होने वाले मोटे खर्च का सच जानने के बाद अब यदि आपको यह लगता है कि जनता के टैक्स के पैसों से होने वाले निर्माण कार्यों पर कुछ समय तक यानि जब तक कोरोना से निजात नहीं मिलती ओर हालत सामान्य नहीं होते तब तक के लिए रोक लगनी चाहिए तो आपको सवय आगे आकार मोदी सरकार से यह मांग करनी होगी।