टिकट बंटवारे से जुड़ी है वर्चस्व की लड़ाई, भाजपा में प्रदेशाध्यक्ष पद पर घमासान

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जोधपुर। चहेते को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के लिए भाजपा में छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। केन्द्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री का खेमा दोनों ही पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दोनों को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट का बंटवारा नजर आ रहा है। दोनों में से कोई भी नहीं चाहता कि राज्य संगठन पर किसी एक खेमे की पकड़ ज्यादा मजबूत हो।
संगठन में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री का खेमा जानता है कि केन्द्रीय नेतृत्व के किसी चहेते के हाथ में संगठन की कमान आई तो टिकट वितरण में अपने लोगों के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। यही हाल केन्द्रीय नेतृत्व का है। उसे विधानसभा से ज्यादा अगले साल प्रस्तावित आम चुनाव की चिंता है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सभी 25 सीटें जीतकर केन्द्र में सरकार बनाने का रास्ता आसान किया था। ऐसे में वह इन सीटों पर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। यही कारण है कि 10 दिन से नए प्रदेशाध्यक्ष के नाम पर सहमति नहीं बन सकी है।
 केन्द्रीय नेतृत्व नाराज
एक वरिष्ठ नेता की मानें तो दिल्ली की पसंद पर मुख्यमंत्री खेमे की खुली असहमति से केन्द्रीय नेतृत्व नाराज भी है। केन्द्रीय नेतृत्व के सामने किसी राज्य इकाई और मुख्यमंत्री खेमे ने पहली बार ऐसी स्थिति खड़ी की है। ऐसे में मुख्यमंत्री से गुरुवार को दिल्ली में मुलाकात के बाद केन्द्रीय नेतृत्व ने कुछ दिन के लिए इस मुद्दे को ठण्डे बस्ते में डाल दिया है। ताकि कार्यकर्ताओं में संदेश जाए कि वर्चस्व की कोई लड़ाई नहीं है।
रामलाल निकालेंगे रास्ता
मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलीं लेकिन शाह ने मामला निपटाने की जिम्मेदारी संगठन महामंत्री रामलाल को दे दी। राजे की रामलाल के साथ लम्बी चर्चा हुई। इसमें प्रदेशाध्यक्ष पद पर अब तक सामने आए सभी नामों पर चर्चा हुई। शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि नया अध्यक्ष किसी खेमे का नहीं बल्कि जमीनी कार्यकर्ता होगा। उसे जातिगत समीकरणों में नहीं बांधा जाएगा।
दोनों झुकने को तैयार नहीं
केन्द्रीय नेतृत्व कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को अध्यक्ष बनाना चाहता है। संगठन के सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री से बात करने की जिम्मेदारी भूपेन्द्र यादव को दी गई थी। मुख्यमंत्री से जब गजेन्द्र सिंह शेखावत के नाम पर चर्चा हुई तो उन्होंने जातिगत आधार पर असहमति जता दी। यहीं से मामला उलझ गया। अब केन्द्रीय नेतृत्व प्रदेश के आगे झुकने को तैयार नहीं है और प्रदेश इकाई भी गजेन्द्र के नाम पर सहमति नहीं दे रही है।