तीन माह में रिफाइनरी स्थल तक पानी, बिजली और सड़क

नई दिल्ली। बाड़मेर के पचपदरा में लगने वाली रिफाइनरी की जमीन को लेकर जुलाई में लीजडीड और सितंबर में शिलान्यास कराने को लेकर सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। जमीन संबंधी सभी तरह के काम आगामी तीन माह में पूरे करने को लेकर बाड़मेर कलक्टर और जैसलमेर कलक्टर व एसडीएम पचपदरा को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

रिफाइनरी स्थल को हाइवे से एप्रोच रोड बनाकर जोडऩे, रिफाइनरी निर्माण के लिए पानी और बिजली आपूर्ति तीन माह में पूरे किए जाएंगे। ताकि शिलान्यास के साथ रिफाइनरी का निर्माण कार्य तेज हो सके, इसके लिए बिजली, पानी और सड़क का काम तीन माह में पूरा कर लिया जाए।

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दूसरी बार शिलान्यास
रिफाइनरी का सरकार सिंतबर में शिलान्यास कराती है तो चार साल बाद दूसरी बार शिलान्यास होगा। इससे पहले पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 22 सितंबर 2013 को यूपीए की राष्ट्रीय सोनिया गांधी से शिलान्यास कराया गया था। अब 18 अप्रेल को पुन: एमओयू एचपीसीएल के साथ किया है।

दो जमीनों की लीजडीड
आरक्षित जमीन 4800 एकड़ और जैसलमेर के नाचना से पानी लाने को लेकर वहां पानी कलेक्शन केन्द्र बनाने को लेकर दी गई 105 एकड़ जमीन पर राजस्व विभाग, एचपीसीएल रिफाइनरी लि. के बीच जुलाई द्वितीय सप्ताह में लीजडीड पर हस्ताक्षर होंगे। सरकार और एचपीसीएल के बीच रिफाइनरी लगाने को लेकर एमओयू 18 अप्रेल को हो चुका है।

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रिफाइनरी निर्माण के साथ ये काम…
28 एमडीडी पानी की पाइपलाइन: जैसलमेर जिले के नाचना स्थित इन्दिरा गांधी कैनाल से पानी लाने के लिए
पचपदरा से गुजरात पोर्ट तक पाइपलाइन : 650 किमी लम्बी पाइपलाइन गुजरात पोर्ट से रिफाइनरी तक बिछेगी। इसकी चौड़ाई करीब 30 इंच होगी। इस पाइपलाइन के जरिए पेट्रोल-डीजल व अन्य उत्पाद गुजरात पोर्ट भेजे जाएंगे।
270 मेगावाट बिजली पेटकॉक से बनेगी : रिफाइनरी में रोजाना करीब 270 मेगावाट बिजली खर्च होगी। यह बिजली रिफाइनरी से निकलने वाले पेटकॉक से तैयार की जाएगी।
तेल कुओं से पचपदरा तक लाइन: 60 किमी लंबी पाइपलाइन बाड़मेर में केयर्न एनर्जी की ओर से निकाले जा रहे क्रूड ऑयल को रिफाइनरी तक लाने के लिए 30 इंच चौड़ी लाइन बिछाई जाएगी।

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क्लीयरेंस की कमान
राज्य सरकार ने एचपीसीएल के अधिकारियों को रिफाइनरी प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने को लेकर केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय से जल्द प्रोजेक्ट क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लेने के लिए कहा है। जिससे कि केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के प्रयास तेज हो सकें।