दमन के इस विभाग से मिलता रहा जुबान बंद रखने का हफ्ता….

क्या समाहर्ता संदीप कुमार ने यह कहा था कि सभी अवैध इमारतों के मालिक को बिजली-पानी काटने की धम्की देकर बुलाओ, उनसे अच्छे खासे धन की उगाही करनी है? | Kranti Bhaskar image 1
Daman

लालुभाई पटेल, केतनभाई पटेल, विशाल टंडेल, वासुभाई पटेल, मनोज नायक, उमेश पटेल को मिलता रहा विधुत विभाग के भ्रष्टाचार का हिस्सा… प्रतिमाह सबको दिया हफ्ता तो सबने रखी अपनी जबान बंद, हफ्ता मिलने से पहले सबने की थी सीबीआई जांच की मांग।

संध प्रदेश दमन विधुत विभाग के भ्रष्टाचार के सेकड़ों खुलासे होते रहे है, तथा इस विभाग के भ्रष्टाचार के खुलासे भी उन्होने ही किए जो इस वक्त अपनी जबान पर नोटों का ताला लगाकर बैठे है। जब तक विधुत विभाग से हिस्सा नहीं मिलता था तब तक सभी सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे, लेकिन जैसे ही हिस्सा मिलना शुरू हुआ, सीबीआई जांच की मांग भी बंद हो गई, क्या इसका यह मतलब नहीं निकाला जा सकता है की इस संध प्रदेश में सीबीआई को भी पैसे कमाने का जरिया बनाया गया? क्या दमन की जनता को जनप्रतिनिधियों ने उल्लू नहीं बनाया? क्या दमन के इस विभाग में हुए भ्रष्टाचार की जांच कभी नहीं होगी?

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अधिकारियों में भी बंटता रहा विधुत विभाग के भ्रष्टाचार का हिस्सा, जिसमे तत्कालीन विधुत सचिव ज्ञानेश भारती, विधुत सचिव संदीप कुमार, तथा विधुत विभाग के कई सहायक अभियंताओं के साथ साथ कनिय अभियंताओं के नाम शामिल है।

गृह मंत्रालय के अधिकारियों तक को किया गया मेनेज, फिर चाहे वह जांच करने वाले अधिकारी हो, या जांच की स्वीकृति देने वाले अधिकारी। संध प्रदेश से कई शिकायते और सबूत पेश किए गए गृह मंत्रालय को लेकिन उन तमाम सबूतों पर भ्रष्टाचार कर कमाई गई दोलत भारी पड़ गई। गृह मंत्रालय ने इस भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामले संध प्रदेश प्रशासक को जांच करने के लिए भेजे, लेकिन प्रशासक ने भी उसी भ्रष्टाचारी का साथ दिया, जिसके साथ दमन के बड़े बड़े अपनी मेहरबानी दिखाते देखे गए।

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बताया तो यह भी जाता रहा की इस विभाग की जांच रोकने और मामले को दबाने के लिए मुंबई सीबीआई कार्यालय के अधिकारियों तक को हफ्ता दिया गया, लेकिन इस बात पर यकीन करना मुश्किल है की सीबीआई जैसी विश्वनीय जांच एजेन्सी इस मामले में संलिप्त हो, लेकिन इस मामले में प्रशासक की सनलिपप्ता अवश्य शिद्ध होती है क्यों की वही इस संध प्रदेश के मुख्या है तथा वहीं मुख्य सतर्कता अधिकारी भी है, तथा प्रशासक के अधिकार क्षेत्र में ही आता है की किस मामले में केसी जांच करवानी है…. अब तक तो प्रशासक इस विभाग एवं विभागीय अधिकारी को बचाने के लिए अपनी सनलिपप्ता दिखाते रहे, लेकिन आने वाले समय में अवश्य यह मामला दमन के कई अधिकारियों को सलाखों के पीछे अवश्य डाल सकता है!