दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति में भ्रष्टाचार बदस्तूर जारी।

दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति में भ्रष्टाचार बदस्तूर जारी। | Kranti Bhaskar
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संध प्रदेश दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल कोई नई बात नहीं है, दमन-दीव व दानह में कई ऐसी इकाइयां बताई जाती है जिनके प्रदूषण की चर्चा दोनों प्रदेशों में आम है, लेकिन उसके बाद भी प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारी ना जाने किस प्रकार पर्यावरण की रक्षा कर रहे है यह एक विचारणीय प्रश्न है।

पिछले लम्बे समय से दमन में स्थित कई डिस्टलरीयों द्वारा पर्यावरण को हानी पहुंचाने तथा प्रदूषण फैलाने जैसे कई मामले सामने आते रहे है इसके अलावे उन मामलों में से ज़्यादातर मामले ऐसे भी रहे है जिनके प्रदूषण को तब तक दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति नजर अंदाज करती रही, जब तक कि केंदीय प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा उन मामलों में दखल या सख्त निर्देश नहीं दिए गए।

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फिलवक्त दमन में स्थित, रॉयल डिस्टलरी, खेमानी डिस्टलरी, जुपिटर डिस्टलरी, वेलनोन पॉलिएस्टर लिमिटेड, आर-एच-जे मेटल्स, धाकड़ मेटेलस, पीसीएल ऑइल एण्ड सोलवेंट, तथा दानह में स्थित बिलोसा इंडस्ट्रीज, आलोक इंडस्ट्रीज, सनातन, बी-के-लॉन सिंथेटिक्स, एडवांस केमिकल्स, राज रियोन जैसी कई इकाइयों का प्रदूषण चरम पर बताया जाता है, वही यह भी बताया जाता है की पूर्व में पर्यावरण को हानी पहुंचाने एवं प्रदूषण को भारी नुकसान पहुंचाने वाली इकाइयों की करतूतों पर अपनी आंखे बंद कर, तत्कालीन पीसीसी सदस्य सचिव अपने हिस्से की चाँदी काटते रहे! इसके आलावे दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति की सबसे भ्रष्ट कर्मचारी के तौर पर कई बार भूमिका राणा का नाम सामने आता रहा है लेकिन इसके बाद भी अब तक उक्त कर्मचारी पर प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं होना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब इस पूरे मामले को देखकर सवाल यह उठता है की क्या पीसीसी के सदस्य सचिव ओ-वी-आर रेड्डी भी उसी मार्ग पर चल रहेंगे जिस मार्ग पर तत्कालीन सदस्य सचिव दलाई चल रहे थे? या कोई और कारण है जिसके चलते दोनों संध प्रदेशों में भारी प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा? इस पूरे मामले को देखकर लगता है की अब इन इकाइयों के प्रदूषण पर भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति को आगे आकार कार्यवाही करनी होगी, ठीक उसी तर्ज पर जिस तर्ज पर पूर्व में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति ने रॉयल डिस्टलरी एवं खेमानी डिस्टलरी पर कार्यवाही की थी।