दानह मामलतदार कार्यालय का कमाल 10 हजार से अधिक जनता के कार्यों के आवेदन हैं पेडिंग

Silvassa
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लालफीता शाही की शिकार दानह की जनता को नहीं मिल रहा है जाति और आवक प्रमाणपत्र – आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभू टोकिया ने कहा: आदिवासियों के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ सडक पर उतरेंगे आदिवासी – अब कहां गई प्रशासन की पारर्दिशता और विभागों के सोश्यिल ऑडिट करवाने की घोषणा – समय सुधीनी सेवा एवं ऑनलाइन सुविधाएं भी मामलतदार कार्यालय से हुई गायब जबाबदार कौन? – दादरा नगर हवेली में बेहाल आम आदमी की कौन सुनेगा अब यह बन गया है बडा सवाल

सिलवासा 8 नवंबर अक्सर आप ने देखा होगा कि लोग सत्ता के नशे में मदहोश हो जाते है तो उन्हें आम आदमी का दर्द संगीत एक मनोरंजन सा लगने लगता है और ऊपर से जब आप के दिमाग में ऐसा हो कि सजना भये कोतवाल तो अब डर काहे का तो फिर तो बात ही मत पूछिये ऐसे में आप के सामने आने वाला हर आदमी बेवकूफ और निरर्थक लगने लगता है। यह सब मंै इसलिए कह रहा हूँ कि क्योंकि दादरा नगर हवेली के मामलतदार कार्यालय का नजारा इन दिनों कुछ ऐसा ही लग रहा है। जहां पर प्रतिदिन आने वाली हजारों की संख्या में आम आदमी की भीड के साथ वहां बैठे लोग इसी तरह से पेश आ रहे है। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले कई महीने से मामलतदार कार्यालय में किसी भी ऐसे व्यक्ति का कोई भी काम नहीं हुआ है जिसकी कोई पहुँच नहीं हो अब आप समझ सकते हो कि बिना पहुँच वाले लोगों की ही संख्या सबसे अधिक होती है। जिसके कारण पिछले कुछ महीने से आम आदमी के जाति प्रमाणपत्र, रेसीडेंसियल प्रमाणपत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाणपत्र जैसे जुडे बुनियादी काम भी नहीं हो रहे है। यही कारण है कि मामलतदार कार्यालय में इन दिनों ऐसे आवेदनों की संख्या बढकर 10 हजार के पार चली गई है और आवेदकों की कोई सुनने वाला ही नहीं है।
संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली में प्रशासन के उच्चाधिकारी वैसे प्रशासन की पारर्दिशता के बडे-बडे दावे करते है लेकिन उनके दावे की हवा मामलतदार कार्यालय में ही आकर निकल जाती है। करोडों रुपये खर्च करके समय सुधीनी सेवा तथा ऑनलाइन सुविधाएं देने का दावा करने वाले दादरा नगर हवेली के प्रशासनिक उच्चाधिकारी अपने मामलतदार कार्यालय में यह जाकर नहीं देख सकते है कि उनकी ऑनलाइन सेवाएं कितनी कारगार है और किसी को इन सेवाओ का लाभ मिल रहा है या नहीं। उच्चाधिकारियों की इसी मेहरबानियों का फायदा शायद मामलतदार कार्यालय में बैठे लोग बखूबी उठा रहे है और पिछले कई महीने से लोगों को न तो जाति प्रमाणपत्र मिल रहा है और न ही भूमि से जुडे मामलों का निपटारा किया जा रहा है। मामलतदार कार्यालय के आधिकारिक रिकार्ड की माने तो डोमिसाइल प्रमाण पत्र, निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, आवक प्रमाणपत्र जैसे कार्यों के अलावा भूमि से जुडे मामले जैसे वारसाई, एनए और अन्य काम लगभग 10 हजार से अधिक आवेदन पेडिंग है और लोग जब भी अपने काम को लेकर मामलतदार कार्यालय में जाते है तो वहां काम करने वालों का एक ही जबाब होता है आप का काम हुआ नहीं तो सर्टीफिकेट कहां से दू। लोग दूर दूर से रोज आकर मामलतदार कार्यालय के चक्कर काट कर थकहार कर चले जा रहे है। इसके बाद भी मामलदार कार्यालय में बैठे लोगों का दिल नहीं पसीज रहा है क्योंकि उन्हें यह बताने में मजा आ रहा है कि वे अफसर है और उनकी ऑफिस में आने वाले लोग उनके गुलाम। लेकिन मामलतदार कार्यालय में बैठे लोग शायद यह भूल रहे है कि जिस दिन जनता के सब्र का बांध टूटेगा उस दिन उन्हें कोई भी कोतवाल नहीं बचा पायेगा। पिछले कई महीनों से लोगों के साथ एवं भोलीभाली आदिवासी जनता के साथ हो रहे इस अत्याचार को आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभु टोकिया ने एक गंभीर मामला करार देते हुए कहते है कि क्या दादरा नगर हवेली प्रशासन खासकर मामलतदार कार्यालय में बैठे लोग सिर्फ कुछ गिने चुने लोगों के लिए ही बैठे है या फिर वे प्रदेश की जनता के लिए बैठे है और जिस अधिकारी तथा विकास आयुक्त एवं प्रशासक की कुछ जवाबदेही जनता के प्रति है की नहीं अगर इन अधिकारियों को यह नहीं पता कि मामलतदार कार्यालय में 10 हजार मामले पेडिंग है तो उन्हंे अपने पदों पर काम करने का हक नहीं है, उन्हें स्थानांतरण कराकर खुद चले जाना चाहिए अथवा मामलतदार कार्यालय में बैठे लापरवाह अधिकारियों को दंडित करते हुए उन्हें उनके पदों से हटाकर बर्खास्त कर देना चाहिए। प्रभू टोकिया ने बताया कि पिछले कई महीनों से उनके पास मामलतदार कार्यालय से जुडे मामलों की शिकायत लेकर लोग आ रहे है कि उनका सर्टीफिकेट नहीं बन रहा है लेकिन जब उन्होंने पता किया तो उन्हें पता चला कि मामलतदार कार्यालय में बैठे लोग पूरे दिन सो बाजी में लगे रहते है और जनता के कामों का निपटारा नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण अब तक 10 हजार से अधिक आवेदन मामलतदार कार्यालय में पेंडिंग है और लोग अपने काम को कराने के लिए इधर से उधर भाग रहे है तथा अपने काम होने की जानकारी लेने आने वालों का मजाक उडाया जा रहा है। प्रभू टोकिया ने प्रशासन को चेताया है कि अगर प्रशासन मामलतदार कार्यालय में जनता के जानबूझ कर रोके गये कामों को समय रहते नहीं करता है तो प्रदेश के आदिवासी इसके लिए सडकों पर भी प्रशासन के खिलाफ उतर सकते है। उल्लेखनीय है कि संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली में आने वाले उच्चाधिकारी प्रदेश को अपनी मनमर्जी से चलाना चाहते है और उन्हें जनता से जुडे कामों को करने में कोई दिलचस्पी भी नहीं दिखाई देती है। यही कारण है कि पिछले कई प्रशासकों द्वारा प्रशासनिक पार्दिशता के लिए सरकारी कार्यालयों के सोश्यिल ऑडिट कराने की बात कही गई थी। जिसमें मामलतदार कार्यालय को सबसे पहले शामिल किया गया था लेकिन अधिकारियों के बदलने के साथ-साथ काम करने के तरीके भी बदल जाते है जिसके कारण आज तक मामलतदार कार्यालय का सोशियल ऑडिट नहीं कराया गया और इस कांसेप्ट को डब्बे के कचरे में डालकर प्रशासन समय सुधीनी सेवा और ऑनलाइन जैसी सेवाओं को लेकर आया लेकिन आज तक इन दोनों सेवाओं को जनता तक पहुंचाने में प्रशासन पूरी तरह से विफल रहा है। ऑनलाइन भूमि दस्तावेज करने के लिए बडे-बडे प्रचार किये गये और फीता काटे गये। लेकिन आज तक कोई भी सर्वे नंबर ऑनलाइन नहीं हो सका और किसी को भी ऑनलाइन जमीन दस्तावेज नहीं मिल पा रहे है। क्या प्रशासन के अधिकारियों की यह जवाबदेही नहीं बनती कि वे इन सेवाओं की समीक्षा करें और अगर इन सेवाओं को देने में संबंधित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी विफल हो रहे है तो उनके ऊपर कार्यवाही की जाएं और उन्हें वहां से हटाया जाये। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है क्योंकि मामलतदार में बैठे लोगों को लग रहा है कि सजना होए कोतवाल तो अब डर काहे का।