पड़ताल: ट्रेन से आए तो पांच घंटे स्टेशन के बाहर बैठे, दो हजार रुपये देकर घर पहुंच पाए

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दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बुधवार को चार ट्रेन विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में वहां फंसे लोगों को लेकर दिल्ली पहुंची। दिल्ली में सार्वजनिक वाहन बंद होने से यहां पहुंचे लोगों को अपने घर जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोग तीन से पांच घंटे स्टेशन पर बैठकर अपनों का इंतजार करते रहे। करीब चार हजार लोग इन ट्रेनों में आए थे जो दिल्ली-एनसीआर के रहने वाले थे। नोएडा, गुरुग्राम व एनसीआर के अन्य जगहों पर जाने वाले लोगों ने किसी तरह कैब की व्यवस्था की तो उन्हें दोगुने से तीन गुने दाम चुकाने पड़े।

पैदल चलना पड़ा : अजमेरी गेट की तरफ से लोगों को सामान लेकर पैदल ही देशबंधु गुप्ता रोड तक जाना पड़ा। लोगों के वाहन रेलवे स्टेशन तक जाने की अनुमति नहीं थी। पुलिस ने स्टेशन के प्रवेश गेट से आठ सौ मीटर पहले ही बैरिकेडिंग की हुई थी। कुछ लोग नौकरी और घूमने जाने आदि कारणों से विभिन्न राज्यों में फंसे हुए थे।

प्रशासन को व्यवस्था करनी चाहिए : विशेष ट्रेन से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचे कई लोगों ने कहा कि कहा कि प्रशासन ने पहले ही लोगों से कहां जाएंगे, कितने लोग हैं जैसी तमाम जानकारी फॉर्म में भरवा ली थी। ऐसे में प्रशासन को लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था भी करनी चाहिए थी, जिससे वाहनों की कमी के कारण लोगों को इतनी परेशानी न हो।

घंटों धूप में इंतजार

विभिन्न जगहों से दिल्ली पहुंचे लोग स्टेशन से बाहर निकले तो कुछ लोगों के परिजन वहां पहले से उनका इंतजार कर रहे थे। वहीं, कई को अभी भी उनके आने का इंतजार था। सबसे अधिक परेशानी उन्हें हुई जिन्हें यह पता नहीं था कि दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन बंद हैं। रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर लोगों ने अपने परिचितों को लेने आने के लिए फोन किया फिर घंटों स्टेशन परिसर व उसके आसपास धूप में इंतजार करना पड़ा।

हर दिन माह बराबर बीता: 
सरिता विहार के रहने वाले नरेश ने कहा कि मैं एक निजी कंपनी में काम करता हूं। कंपनी के काम से ही प्रयागराज गया था। वहां रहने की व्यवस्था तो कंपनी ने कर दी थी लेकिन परिजनों से दूर एक-एक दिन महीनों जैसा लगा। सार्वजनिक परिवहन न होने से परिजन निजी कार में लेने आ रहे हैं।

शादी में गया था फंस गया:
आदर्श नगर के मिराज ने कहा कि मैं ट्रेन से गाजीपुर, यूपी से लौटा हूं। वहां एक शादी समारोह में शाामिल होने गया था। लॉकडाउन में वहीं फंस गया। परिवार के सदस्य आदर्श नगर में रहते हैं। परिजन लेने आ रहे हैं। प्रशासन को परिवहन की व्यवस्था करनी चाहिए थी।