पांचवे दिन शिवकथा के दौरान आचार्य शशिकांत वशिष्ठ ने कहा कि सत्संग सुनने घर में आती है सुखसृमद्वि

बदायूं। बदायूं क्लब में चल रही श्रीशिवपुराण कथा के पांचवे दिन शिव
पार्वती का उत्सव मनाया गया। शिवकथा वाचक शशिकांत वशिष्ठ ने कहा कि मानव
जीवन में सत्संग ही आन्न्ाद की जड़ है। जिसके द्वारा विवेक होने पर
गृहस्थाश्रम सुख,शान्ति,समृद्विमय और भाक्तियुक्त होता है। जीवन ईश्वर
कृपा पात्र बनकर अपने परममूल लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। परन्तु बिना
सत्संग के यह मानव जीवन कष्ट दुख और अशांतिमय बन जाता है।
शिव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव के साथ राजा दसपुत्री सति
का विवाह होने पर अंत में दुखमय जीवन को भोगकर सति को अपने शरीर का त्याग
करना पड़ा। क्योकि सत्संग में जाकर भी सती ने सत्संग श्रवण नही किया।
जिसके फलस्वरूप् श्री रामजी के दर्शन होने पर उनकी परीक्षा लेने हेतु सति
ने सीता का रूप धारण किया और शिव द्वारा सति का त्याग हुआ।आचार्य ने अपनी
ज्ञान रहस्य व मधुरवाणी से इस प्रकार प्रस्तुत किया।कि पूरा खचाखच भक्तो
से भरा विशालभव्य पंडाल पूर्ण भक्ति रस में डूब गया।शिवविवाह उत्सव पर
भक्तों ने नृत्य कर वातावरण को शिवमय बना दिया। कथा के मुख्य यजमान
अरविन्द कुमार दीक्षित,और उनकी पत्नी रही। प्रसाद की व्यवस्था श्रीकृष्ण
सेवा समिति और श्री जेपी शर्मा के द्वारा व्यवस्था रही।
इस अवसर पर नरेश चंद्र शंखधार, महीपाल सिंह,राजीव पाठक,अशोक गोस्वामी,
मुकेश रस्तोगी, सुरेन्द्र प्रकाश दीक्षित, संत कुमार गुप्ता, अरूप
गुप्ता, सुमित, सरेन्द्र दीक्षित आदि लोग मौजूद रहे।
संवाददाता अमन सक्सेना

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