पुलिस की कार्यशैली पर हाईकोर्ट हैरान, सीबीआई जांच की जताई मंशा, आरटीआई एक्टिविस्ट गोवर्धन सिंह पर पुलिस अत्याचार का मामला

31
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बीकानेर के चर्चित आरटीआई एक्टिविस्ट गोवर्धन सिंह के खिलाफ  पुलिस अत्याचार के मामले में सीबीआई से जांच कराने की मंशा जताई है।
जस्टिस निर्मलजीत कौर ने शुक्रवार को गोवर्धन सिंह की ओर से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ  दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस का इस तरह का कृत्य देश के नागरिकों की स्वतंत्रता और गरिमामय जीवन जीने के अधिकार को खतरे में डालने वाला है। याचिकाकर्ता गोवर्धन सिंह ने स्वयं पैरवी करते हुए हाईकोर्ट को सिलसिलेवार पुलिस के अत्याचार के तथ्य बताते हुए कहा कि पुलिस ने उनको झूठे मामलों में फंसाने के लिए अन्याय की सारी हदें पार कर दी थी। उनके खिलाफ  चोरी, लूट, पाकिस्तानी एजेंट होने, नकली नोट छापने, ब्लैकमेलिंग करने सहित कई झूठे आरोपों में अलग-अलग पुलिस थानों में अनेक आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए। इतना ही नहीं उनकी हिस्ट्रीशीट तक खोल दी गई थी। उन पर दो हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया। राज्य के प्रत्येक पुलिस थाने में फोटो चस्पां कर दी। राजस्थान विधानसभा में भी प्रकरण उठा। राजस्थान हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ  दर्ज प्रकरण में कार्रवाई पर रोक लगाई तो पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश को फाडक़र फेंक दिया। आदेश की डाक लेने से इनकार कर दिया और आदेश की प्रतिलिपि देने गए याचिकाकर्ता के भाई के खिलाफ  भी चोरी का आपराधिक मुकदमा दर्ज कर दिया।
सुनवाई के बाद जस्टिस निर्मलजीत कौर ने कहा कि एेसे पुलिस अफसरों के खिलाफ  आपराधिक प्रकरण दर्ज करते हुए उसकी सीबीआई जांच अथवा न्यायिक जांच के अलावा अन्य विकल्पों पर विचार करना अन्याय होगा। याचिकाकर्ता को सुरक्षा उपलब्ध कराने का कहते हुए कोर्ट ने तीन जुलाई को मामले की अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता को अपने खिलाफ दर्ज सभी प्रकरणों की तथ्यात्मक रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के आदेश दिए।