पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सहित गबन के तीनों आरोपियों को भेजा जेल, फरार चौथे आरोपी की तलाश जारी

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जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ईश्वरसिंह बालावत व दो अन्य को करीब पंद्रह साल पुराने गबन के मामले में  भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने जेल भेज दिया है। मामले में फरार चौथे आरोपी की तलाश जारी है।
एसीबी के पुलिस अधीक्षक अजयपाल लांबा ने बताया कि जेएनवीयू छात्रसंघ के वर्ष 2002-03 कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय युवा महोत्सव आयोजित किया गया था। उसमें 11 लाख चार हजार 260 रुपए का गबन किया गया था। इस प्रकरण में जेएनवीयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ईश्वरसिंह बालावत, जय भवानी फूलमाला वाला विजयसिंह, होटलकर्मी गोविंदसिंह व मित्र मेघसिंह आरोपी थे। पत्रावली के सुप्रीम कोर्ट से लौटने पर एसीबी की विशेष विंग के उपाधीक्षक जगदीशप्रसाद सोनी ने गुरुवार शाम को बाड़मेर जिले में मोकलसर निवासी जेएनवीयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ईश्वरसिंह बालावत पुत्र जब्बर सिंह, सिरोही में कालन्द्री थानान्तर्गत चाडूआल गांव निवासी गोविंदसिंह पुत्र नरपतसिंह और मोहनपुरा पुलिया के नीचे निवासी विजयसिंह पुत्र भवानीसिंह को गिरफ्तार किया। इन सभी आरोपियों को शुक्रवार को भ्रष्टाचार मामलात संबंधी अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें जेल भेजने के आदेश हुए। उन्होंने बताया कि मामले में मिठाई बनाने वाले मेघसिंह की तलाश की जा रही है। आरोपियों में शामिल विजय सिंह रातानाडा स्थित होटल में कर्मचारी था, जबकि विजय सिंह मोहनपुरा पुल के नीचे फूलमालाएं बेचता है।
11 लाख का किया था गबन
ईश्वरसिंह वर्ष 2002-03 में जेएनवीयू छात्रसंघ का अध्यक्ष था। उस दौरान अंतरराष्ट्रीय युवा महोत्सव आयोजित करवाया गया था। इसके लिए 15.9 लाख रुपए स्वीकृत थे, जबकि इसमें से आरोपियों ने 11 लाख 4 हजार 260 रुपए का गबन किया था। इस संबंध में वर्ष 2010 में एसीबी में एफआईआर दर्ज की गई थी। विवि के चार व्याख्याताओं पर भी गबन के आरोप लगे थे लेकिन हाईकोर्ट में अपील करने पर चारों व्याख्याताओं को दोष मुक्त कर दिया गया था। एसीबी ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी। एसीबी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय युवा महोत्सव के लिए 15.9 लाख रुपए का बजट स्वीकृत था। ईश्वरसिंह ने मिठाई, फूल मालाएं, शामियाने, होटल में ठहरने और अन्य मदों के खर्चों के फर्जी व कूटरचित बिल बनाकर विवि में पेश किए थे। इस पर 11,04,260 लाख रुपए का अधिक भुगतान उठाया था।