फिल्म एडिटर सुधीर आचारी सात दिन के रिमांड पर, पत्नी ने लगाया था दहेज प्रताडऩा का आरोप

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जोधपुर। महानगर मजिस्ट्रेट संख्या-3 मदन चौधरी ने दहेज की मांग को लेकर पत्नी को प्रताडि़त करने के आरोपी पति की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उसे सात दिन तक पुलिस रिमांड पर रखने के आदेश दिए है।
परिवादी निधि ने फिल्मी दुनिया में एडिटर का काम करने वाले मुंबई निवासी अपने पति सुधीर आचारी के विरूद्ध एक रिपोर्ट पुलिस थाना महिला पूर्व जोधपुर में इस आशय की दर्ज करवाई थी कि सुधीर उसे अपने प्रेमजाल में फंसाकर मुम्बई लेकर गया। वहां छह फरवरी 2008 को आर्य समाज में उससे विवाह किया। इसके बाद उसके दो पुत्रियां हुई जो वर्तमान मे ग्यारह व सात वर्ष की है। रिपोर्ट मे आरोप लगाया गया कि विवाह के बाद से ही उसके पति ने उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। इस मामले में आरोपी स्वयं अदालत में सरेंडर हुआ था। उसके बाद उसे एक दिन के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा गया था। तत्पश्चात पुलिस ने उसे पुन: न्यायालय में पेश कर स्त्रीधन की बरामदगी के लिए पुलिस रिमांड मांगा। आरोपी के अधिवक्ता ने जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर तर्क दिया कि पक्षकारन का विवाह हुए 14 वर्ष हो चुके है। परिवादी स्वयं अपने जेवरात बेचकर जोधपुर आ गई।
परिवादी ने जिस सुनार को जेवरात बेचे उसके बयान भी पुलिस द्वारा लिए गए है। परिवादी अपने पति के साथ रहना ही नहीं चाहती है। इस कारण से उसने झूठा मुकदमा दर्ज करवाया है। इसलिए आरोपी की जमानत स्वीकार की जाए। उक्त तथ्यों का विरोध करते हुए परिवादी के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत एवं जितेन्द्र प्रसाद विश्नोई ने तर्क दिया कि आरोपी पति की मांग पर परिवादी ने कई बार अपने पिता से रुपए मंगवाकर उसे दिए लेकिन उसकी मांग बढ़ती ही गई। परिवादी के पिता का एक फ्लेट मुम्बई में है जिसे अपने नाम करवाने के लिए आरोपी ने परिवादी पर दबाव डालना शुरू कर दिया। यह भी तर्क  दिया कि परिवादी का समस्त स्त्रीधन आरोपी के कब्जे में है जिसकी बरामदगी की जानी है, इसलिए आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर पुलिस रिमांड दिया जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद महानगर मजिस्ट्रेट ने आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए उसे सात दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया।