भारत के साथ आये ये दुनिया के ये बड़े देश, चीन ने खुद ही लिखी है अपनी बर्बादी की कहानी, देखें रिपोर्ट

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भारत के साथ आये ये दुनिया के ये बड़े देश, चीन ने खुद ही लिखी है अपनी बर्बादी की कहानी, देखें रिपोर्ट - राष्ट्रीय समाचार

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार चीन की एक साथ कई मोर्चों पर घेराबंदी शुरू कर दी है। लद्दाख सीमा पर सेनाओं को युद्ध मोड में लाने के साथ ही ऐसा चक्रव्यूह रचा गया है जिसको तोड़ निकालपाना चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तो क्या उनके पूर्वजों के वश की भी बात नहीं है। भारत सरकार ने वाणिज्य मंत्रालय से चीन से आयात किये जाने वाली वस्तुओं की सूची, स्तर, मूल्य और उनके विकल्प की सूची मांगी है। इससे साफ जाहिर है कि भारत सरकार चीन से व्यापार को बंद कर झटका देना चाहता है। लेकिन अकेले भारत के ऐसा करने से चीन पर कोई खास फरक नहीं पड़ता क्योंकि चीन अपने कुल व्यापार का तीन फीसदी ही भारत के साथ व्यापार करता है।

इन हालातों में भारत चीन से आयात बंद भी कर दे तो इससे चीन को कम भारत को नुकसान ज्यादा होगा। इसलिए भारत ने मित्र राष्ट्रों के साथ मिल कर चीन के कुल निर्यात के कम से कम 50 फीसदी व्यापार पर कुल्हाड़ी मारने वाल दांव चला है। भारत और मित्र राष्ट्र अमेरिका, ब्रिटेन फ्रांस, जर्मनी, मालदीव और श्रीलंका जैसे राष्ट्रों के साथ मिल कर प्लान बनाया है। इस प्लान के तहत पहले भारत, फिर अमेरिका और फिर ब्रिटेन इत्यादी देश चीन के साथ व्यापार को एक-एक बंद कर देंगे। इसबीच चीन के विकल्पों को खोजा जायेगा और जरूरी वस्तुएं मंगवाई जाऐंगी। चीन के निवेश को रोका जाएगा और पुराने समझौतों की पुनर्समीक्षा की जायेगी। इस कड़ी में भारत ने चीन से टायर आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। तथा चीनी निवेश रोक दिया है। इसी तरह ब्रिटेन ने चीन के साथ हुए व्यापार और निवेश समझौतों की समीक्षा किये जाने की बात कही है। अमेरिका ने चीनी समान पर टैरिफ बढा दिया है।

अमेरिका के साथ चीन व्यापार 17 फीसदी है। आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड, फ्रांस, जर्मनी और कुछ अन्य देशों को मिला कर 30 फीसदी व्यापार होता है। भारत को मिलाकर यह 50 फीसद हो जाता है। तय रणनीति के मुताबिक सभी राष्ट्र चीन से व्यापार खत्म कर लेते या कम कर देते हैं तो चीन के सामने मार्केट का अभाव पैदा हो जायेगा। निर्यात बंद होने से चीनके कारखाने बंद हो जायेंगे। लोग बेरोजगार भटकेंगे। कहने का अभिप्रायः यह कि चीन की आर्थिक रीढ़ टूट जायेगी। एक तरफ हांगकांग, ताईवान, जापान और साउथ चाईना सी में उलझी शी जिनपिंग सरकार लद्दाख सीमा पर शुरू हुए युद्ध को दो दिन तक नहीं झेल पाएगी। चीन के खिलाफ ये कार्रवाई शुरू भी हो चुकी है।

बहरहाल, भारत के कुल आयात में चीन की 14 फीसदी हिस्सेदारी है और सेल फोन, टेलीकॉम, पावर, प्लास्टिक के खिलौने और क्रिटिकल फार्मा इंग्रीडिएंट्स जैसे अहम सेक्टरों में चीन का दबदबा खत्म हो जाएगा और चीन घुटनों पर आजायेगा।

सरकार ने हाल में चीन से टायर के आयात पर पाबंदी लगा दी है। साथ ही पड़ोसी देशों से होने वाले विदेशी निवेश के लिए पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मकसद कोरोना काल में घरेलू कंपनियों को ‘अवसरवादी अधिग्रहण’ से बचाना है। इस कदम से खासकर चीन से आने वाले एफडीआई पर लगाम लगेगी।

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