भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट में IFS डेबेन्द्र दलाई का नाम सबसे ऊपर!

भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट में IFS डेबेन्द्र दलाई का नाम सबसे ऊपर! | Kranti Bhaskar
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संध प्रदेश दमन-दीव व दानह में समय समय पर कई वन संरक्षक आए और अपनी अपनी सेवा देकर लौट गए, लेकिन शायद ही इस से पहले यहां की जनता को आई-एफ-एस अधिकारी डेबेन्द्र दलाई जितना भ्रष्ट एवं कामचोर वन संरक्षक देखने को मिला होगा! वन संरक्षक डेबेन्द्र दलाई के पास दमन-दीव व दानह के दर्जनों विभागों का प्रभार रहा है और बताया जाता है की उन विभागों में डेबेन्द्र दलाई ने अपने आई-एफ-एस अधिकारी होने का भरपूर लाभ उठाया, और जी भर के भ्रष्टाचार करते रहे।

कई मामलों में डेबेन्द्र दलाई द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की पोल भी खुली, जिनकी जांच अभी जारी बताई जाती है, लेकिन ऐसे मामले भी कम नहीं जिनकी जांच से अब तक डेबेन्द्र दलाई बचे हुए है। वैसे तो दमन-दीव व दानह में ऐसे कई मामले रहे है जिनमे आई-एफ-एस अधिकारी डेबेन्द्र दलाई द्वारा भारी अनियमत्ता बरती गई एवं भारी भ्रष्टाचार देखने को मिला, लेकिन इसके बाद भी वरीय अधिकारियों के सहयोग एवं संरक्षण के चलते कई मामलों में आई-एफ-एस अधिकारी डेबेन्द्र दलाई की जांच तक शुरू होती नहीं दिखाई दी। फिलवक्त आई-एफ-एस अधिकारी डेबेन्द्र दलाई के पास दानह जिला पंचायत के सी-ई-ओ का प्रभार बताया जाता है।

कई वर्षों से नहीं हुआ तबादला, क्या इनका जुगाड़ वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में भी है?

संध प्रदेश दानह के इस वन संरक्षक डेबेन्द्र दलाई की फाइल वन एवं पर्यावरण विभाग कही रख कर भूल गई है या उक्त अधिकारी ने वहाँ भी अपनी पकड़ और भ्रष्टाचार का जुगाड़ बैठाकर अपना तबादला रुकवाकर रखा है? यह सवाल इस लिए है क्यो की पिछले कई वर्षों से दमन-दीव व दानह में नियुक्त उक्त वन संरक्षक का ना ही अब तक तबादला हुआ है और ना ही कोई जांच। दानह के इस वन संरक्षक की खराब कार्यप्रणाली, भ्रष्टाचार एवं नियमों की अनदेखी के मामलों में दर्जनों शिकायते वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय एवं प्रधान मंत्री कार्यालय की जा चुकी है, लेकिन उन शिकायतों को पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सवय जांच करने के बजाय दमन-दीव व दानह प्रशासक को जांच के लिए अग्रेषित करता रहा, लेकिन इस जुगाडु अधिकारी के आगे किसी की चलती नहीं दिखी।

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समय रहते वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के संबन्धित अधिकारियों को उक्त अधिकारी की आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच करवानी चाहिए ऐसी जनता की मांग है, लेकिन अब उक्त अधिकारी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सामने कितना बोना साबित होता है यह तो आने वक्त ही बताएगा।