माफियागिरी के अच्छे दिन और पत्रकारों को धम्की….

माफियागिरी के अच्छे दिन और पत्रकारों को धम्की.... | Kranti Bhaskar
Sukha patel Daman News

क्रांति भास्कर ने जब से अपने पिछले अंकों में सुरेश पटेल उर्फ सूखा पटेल तथा उनके चेले-चमचो कि टपोरिगिरी, को लेकर ख़बर प्रकाशित है तब से क्रांति भास्कर के सूत्र एवं शुभेच्छक क्रांति भास्कर तथा क्रांति भास्कर के पत्रकारों को सूखा पटेल तथा सूखा पटेल के चेले-चमचो से सचेत और चौकन्ना रहने कि सलाह दे रहे है, और क्रांति भास्कर को मिल रही यह सलाह, यह बताने के लिए काफी है कि जिन उधमियों को क्रांति भास्कर बे-नकाब कर रही है या आगे करने वाली है उन उधमियों का स्तर और कार्यशेली क्या है? वैसे क्रांति भास्कर ने अपने पिछले अंक में भी यह साफ कर दिया था कि ख़बर तथा ख़बर कि जानकारी देने वाले ने भी, ख़बर प्रकाशित करने से पहले ही यह बता दिया है कि ख़बर प्रकाशित करने के बाद तथा इन उधमियों को बे-नकाब करने बाद अंजाम भयानक हो सकता है, परंतु क्रांति भास्कर ने यह स्पस्ट कर दिया था कि वह पत्रकारिता में अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध है तथा जनता, समाज व प्रशासन के सामने हकीकत और सत्यता को सामने लाने के लिए वह किसी अंजाम कि परवाह किए बिना बे-हिचक जनहित में निडरता से अपने ख़बरे जनता और सरकार तक पहुंचाएगी!

ज्ञात हो कि जब जब क्रांति भास्कर ने “भ्रष्टाचार मुक्त भारत” के तहत, संध प्रदेश दमन-दीव में भ्रष्टाचार, अनियमितता, दादागिरी, भाईगीरी, और माफियागिरी को लेकर ख़बरे प्रकाशित कि तथा उन उधमियों, भ्रष्टाचारियों और माफियाओं को बे-नकाब करने कि कोशिश कि, तब तब क्रांति भास्कर और उसकी टिम को किसी ना किसी रूप में धमकाने, डराने तथा श्डियंत्र एवं शाजिश के तहत भारी नुकसान पहोंचाने के प्रयास होते रहे है जिनकी जानकारी समय समय पर क्रांति भास्कर द्वारा भारतीय प्रेस परिषद को दी गई।

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लेकिन इस बार मामला कुछ और है भाईगीरी और माफियागिरी के अंदाज में इस बार क्रांति भास्कर के पत्रकारों को यह धम्की मिली है कि सुरेश पटेल उर्फ सूखा पटेल कि शरण में चले जाए, एवं आगे से सुरेश पटेल एवं सूखा पटेल के विरोध में किसी खबर को प्रकाशित ना करने कि शपथ ले, तो शायद सूखा पटेल उन्हे बख्स देंगे अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे। क्रांति भास्कर के पत्रकार को मिली यह धम्की यह बताने के लिए काफी है कि सूखा पटेल दमन में किस प्रकार कि माफियागिरी चला रहा है तथा किस प्रकार कि मागीयागिरी, और टपोरिगिरी को संरक्षण दे रहे है। सूखा पटेल शायद यह भूल गए कि पत्रकारिता उनकी बापोती नहीं है जिसे वह जब चाहे तथा जैसे चाहे तरोड-मरोड़ देंगे, और पत्रकारिता में बाधक बन खड़े हो जाएंगे। पत्रकारिता पर यह दबाव और पत्रकारो को मिली धम्की जहां एक और सूखा पटेल के वास्तविक रूप को सामने ला रही है वहीं दूसरी और प्रशासन कि कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रही है कि क्या दमन में माफियागिरी करने वालों को प्रशासन एवं नियम कानून से जरा भी भय नहीं रहा कि वह अब अपनी माफियागिरी और टपोरिगिरी का इस्त्माल पत्रकारिता पर अंकुश लगाने के लिए कर रहे है?

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क्रांति भास्कर यह भली भाँति जानती है कि प्रशासन, सरकार, तथा भारतीय प्रेस परिषद केवल क्रांति भास्कर तथा क्रांति भास्कर के पत्रकार के कहने पर यकीन नहीं करेगी, इस लिए क्रांति भास्कर ने इस धम्की को रिकार्ड किया है तथा भारतीय प्रेस परिषद को क्रांति भास्कर इस पूरी घटना कि जानकारी रिकॉर्डिंग तथा अन्य संबन्धित सबूतों के साथ पेश कर न्याय एवं संरक्षण कि मांग करेगी। लेकिन जब तक इस मामले में भारतीय प्रेस परिषद आगे आकार अपनी कार्यवाही करें, तब तक दमन-दीव प्रशासक श्री प्रफुल पटेल को चाहिए कि इस मामले में स्वयम जांच कर दोषियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करें तथा कार्यवाही एवं मामले के फैसले तक क्रांति भास्कर कि पत्रकारिता एवं पत्रकारों के संरक्षण कि व्यवस्था करें।