वन विभाग बना आर्थिक एवं नैतिक भ्रष्टाचार का अड्डा?

Vallabh Bhavan

वन विभाग छिन्दवाड़ा में मात्र आर्थिक भ्रष्टाचार ही नहीं किया जाता बल्कि, नैतिक भ्रष्टाचार करने में भी अधिकारियों को कोई गुरेज नहीं होता है। जबकि कार्य आयोजना अधिकारी तो और भी एक कदम आगे है। वे तो शासकीय कार्यालय को अपनी व्यक्तिगत बपौती ही समझते है और वरिष्ठो से प्राप्त नर्देशो की खुलेआम धज्जिया उडाते है? उनका तो कहना ही यही है?जब तक ऊपर वाले बिकते रहेंगे? हम अपनी मर्जी करते रहेंगे?पिछले लेख में आप पाठको को बताया गया था की किस तरह निर्देशो की अव्हेलना कर कु. प्रतीभा ठाकुर को भुगतान किया गया था परन्तु कुछ पाठको द्वारा पूछा गया है कि, जो लेख लिखा गया है उससे यह प्रतीत नहीं होता की भ्रष्टाचार कैसे हुआ है? हम उन सभी पाठको से माफी चाहते है क्योकि किसी कारणवश पूर्व में लिखा गया लेख अधूरा ही प्रकाशित हो सका था।यह हम आपको जानकारी देना चाहते है कि, तात्कालीन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के आदेश क्रमांक/44 दिनांक 15.06.2004 द्वारा कार्य आयोजना के पुनरीक्षण के दौरान किये जाने वाले कार्यो जैसे मजदूरी एवं अन्य व्यय के नाम्र्स कक्ष को आधार मानकर निर्धारित करने हेतु समिति गठित की गई थी। जिसकी अध्यक्षता तात्कालीन मुख्य वन संरक्षक, कार्य आयोजना श्री कृष्ण औतार द्वारा की गई थी वही तत्कालीन वन संरक्षक श्रीमति हेमवती वर्मन, श्री आर.बी. सिन्हा एवं श्री आलोक कुमार सदस्य नियुक्त हुए थे। समिति की बैठक दिनांक 07.07.2004 एवं 18.08.2004 को मुख्य वन संरक्षक, कार्य आयोजना भोपाल के कार्यालय में आयोजित की गई। जिसमें क्षेत्रीय कार्य वन संसाधन सर्वेक्षण, पायलट सर्वे एवं संनिधि मानचित्रण, वृक्षारोपण सर्वेक्षण, स्टेम एवं स्टम्प का विशलेषण कार्य एवं मानचित्र तैयार करने एवं टापिंग कार्य हेतु नाम्र्स का निर्धारण किया गया था।कम्प्यूटर कार्य हेतु प्रस्तावित नाम्र्स (1) सिंगल स्पेश अग्रेजी टापिंग ए4 पेज हेतु – 0.10 मा.दि. प्रति पेज (2) सिंगल स्पेस हिन्दी टापिंग ए4 पेज हेतु – 0.15 मा.दि. प्रति पेज (3) स्टेटमेंट टाईपिंग (डाटा टेबुलेश्न इत्यादि) हिन्दी/अग्रेजी ए4 पेज हेतु – 0.20 मा.दि. प्रति पेज (4) स्टेटमेंट टाईपिंग (डाटा टेबुलेश्न इत्यादि) हिन्दी/अग्रेजी ए3 पेज हेतु – 0.3 मा.दि. प्रति पेज एवं (5) पूर्व में टाईप किये गये पेज को पुनः सेट करना, एडिटिंग करना एवं प्रिंट निकालना – 0.05 मा.दि. प्रति पेज निर्धारित किया गया था। जबकि प्रमाणक में दिये गये विवरण अनुसार कु. प्रतिभा ठाकुर को पश्चिम वनमण्डल के पुनरीक्षण कार्य में द्वितीय प्रारंभिक प्रतिवेदन के आलेख भाग-1 एवं 2 लेखन (टापिंग) कार्य हेतु रूपये 90.46/- की दर से भुगतान किया गया है।

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जबकि भुगतान मा.दि. प्रति पेज की दर से किया जाना चाहिए था।जबकि निर्देशानुसार कम्प्यूटर कार्य के भुगतान पर नियंत्रण हेतु पृथक से कोई पंजी भी संधारित नहीं की गई थी। जबकि स्पष्ट निर्देशित है कि, “कम्प्यूटराज्ड कार्य के भुगतान पर नियंत्रण हेतु पृथक से पंजी संधारित की जावेगी जिसमें विभिन्न चरणो के कार्यो एवं भुगतान का विवरण की प्रविष्टि की जावेगी, ताकि एक ही कार्य का पुनः भुगतान न हो सके। पंजी में प्रमाणक क्रमांक आदि अन्य आवश्यक बाते अनिवार्य रूप से अंकित की जावे।

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”वहीं प्रमाणक में एक वन रक्षक के हस्ताक्षर करते हुए प्रमाणित किया गया है कि, उक्त कार्य मेरे द्वारा कराया गया है। जबकि यह कार्य आयोजना अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जाना चाहिए था क्योकि नियमानुसार क्षेत्रीय अमला कैसे कार्य आयोजना के किताबो का लेखन कर टंकण करा सकता है जबकि कार्य आयोजना संहिता अनुसार आलेखो के टंकण का कार्य केवल कार्य आयोजना अधिकारी के कर्तव्य में आता है।इस तरह तात्कालीन कार्य आयोजना अधिकारी ने उपरोक्त किये गये भुगतान को अपने हस्ताक्षर से मंजूर भी किया है यहां केवल आर्थिक भ्रष्टाचार ही नहीं किया गया, बल्कि वरिष्ठो के आदेशो की भी पूर्णतः अव्हेलना करते हुए नैतिक भ्रष्टाचार भी किया गया है।इसलिए यहां हमारी मांग है कि, तत्तकालीन कार्य आयोजना अधिकारी के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाये।  https://pressmediaindia.blogspot.com/2020/07/working-plan-chhindwara-no1.html