वृद्धा आश्रम में बढ़ती बुजुर्गों की संख्या बेहद दुखद

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श्रद्धा आश्रम में बढ़ती बुजुर्गों की संख्या  बेहद दुखद विषय है अब से कुछ साल पहले जहां वृद्ध आश्रम में यह संख्या बहुत कम थी वही आज यह संख्या बढ़कर दुगनी चौगुनी हो गई है इसका सबसे बड़ा कारण है बच्चों का माता-पिता पर बिल्कुल  ध्यान सेवा इत्यादि ना करना कुछ माता-पिता के बच्चे इतने खराब होते हैं कि अपने बूढ़े माता-पिताको  बिल्कुल उनके हाल पर अकेला छोड़ देते हैं जिस समय उनकी सेवा करने का टाइम आता है वह यह सोच लेते हैं कि अपने वृद्ध माता पिता की सेवा क्यों करें और यह सोच लेते हैं कि इस घर से निकल जाएं और फिर  सारी जमीन जाय जात और पैसा  हमारा हो जाएगा कुछ लोग तो इतना गिर जाते हैं कि अपने बीमारी से ग्रसित बूढ़े माता-पिता को इसलिए वृद्ध आश्रम छोड़ आते हैं कि दवाई गोली में पैसा खर्च होगा कुछ महिलाएं भी इस विषय में पीछे नहीं है जब सास ससुर का सेवा करने का समय आया तो अपने इस कर्तव्य से पीछे हट जाति हैं कुछ बुजुर्गों के बच्चे तो अपने माता पिता को वृद्धाश्रम में छोड़कर विदेश तक भाग जाते हैं धिक्कार है ऐसी संतान पर जो अपने बुजुर्ग माता पिता की सेवा नहीं कर सकते गरीब ही नहीं अमीर बूढ़े बुजुर्ग भी आपको वृद्ध आश्रम में मिल जाएंगे जिन पर पैसों की बिल्कुल कमी नहीं जिन्हें कमी है तो बस प्रेम  अकेलापन दूर करने वाले व्यक्तियों की जो उन्हें वृद्ध आश्रम में मिल जाता है जहां बूढ़े बुजुर्ग एक दूसरे से बातचीत सुख दुख की बात  कर अपना समय काट रहे हैं यह एक गंभीर और मानवता को शर्मसार करता विषय है हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने माता पिता की सेवा करेंगे और कभी भी उन्हें वृद्धाश्रम में जाने नहीं देंगे