सोनिया गांधी की मोदी सरकार को नसीहत- गरीबों को हर महीने 7,500 रुपये दिए जाए।

6

नई दिल्ली: कोरोना संकट के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एकबार फिर मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून 2005 (MNREGA) को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को नसीहत दी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि मोदी सरकार मनरेगा के महत्व को समझे, इसे राजनीतिक मुद्दा न बनाए और इसके जरिए जरूरतमंदों की मदद करे।

सोनिया गांधी की मोदी सरकार को नसीहत- गरीबों को हर महीने 7,500 रुपये दिए जाए। - राष्ट्रीय

सोनिया गांधी ने कहा है कि मनरेगा एक क्रांतिकारी और तार्किक बदलाव का उदाहरण है। इस कानून ने गरीब से गरीब शख्स को हाथों का काम और आर्थिक ताकत देकर भूख और गरीबी को मिटाने का काम किया है। सोनिया ने कहा कि यह तार्किक इसलिए है कि यह पैसा सीधा उन लोगों के हाथ में जाता है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

एक अग्रेजी अंग्रेजी अखबार में छपे में सोनिया ने कहा कि ‘यह बीजेपी बनाम कांग्रेस का मुद्दा है ही नहीं। भारत के जनता की मदद करने के लिए मनरेगा का इस्तेमाल करिए।’

सोनिया गांधी की मोदी सरकार को नसीहत- गरीबों को हर महीने 7,500 रुपये दिए जाए। - राष्ट्रीय

अपने लेख में उन्होंने आगे लिखा है कि ”यह क्रांतिकारी है क्योंकि इसने गरीब से गरीब व्यक्ति को सत्ता हस्तांतरित की और उन्हें भूख और अभाव से बचने में सक्षम बनाया। यह तर्कसंगत है क्योंकि यह उन लोगों के हाथों में सीधे पैसा डालता है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।’

मनरेगा की आवश्यकता को बताते हुये सोनिया गांधी ने लिखा कि मौजूदा वक्त में जब देश कोरोना वायरस से जूझ रहा है, ऐसे में इस संकट की घड़ी में भुखमरी और बर्बादी को रोकने के लिये ये योजना बेहद अहम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मनरेगा को कांग्रेस के विफलता का स्मारक कहे जाने पर सोनिया ने लिखा- बीते सालों में मोदी सरकार ने मनरेगा को खत्म करने, इसे कमजोर बनाने की पूरी कोशिश की लेकिन मनरेगा के प्रहरियों और विपक्ष के दबाव ने इसे जिन्दा रखा। पद संभालने के बाद पीएम मोदी को भी ऐसा महसूस हुआ कि मनरेगा बंद किया जाना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए उन्होंने इस योजना को कांग्रेस पार्टी की विफलता का जीवित उदाहरण तक कह दिया।

आपको बता दें कि से कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण पैदा हुए हालात के बीच  कांग्रेस केंद्र सरकार से मजदूरों-गरीबों को सीधे पैसा देकर मदद पहुंचाने की लगातार मांग कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत पूरी पार्टी एकमत होकर सरकार से ये मांग रही है कि जो जरूरतमंद हैं उन्हें संकट की इस घड़ी में सीधे हाथ में पैसा दें। इसी कड़ी में अब सोनिया गांधी ने यूपीए सरकार के दौरान शुरू की गई मनरेगा योजना का इस्तेमाल कर गरीब-मजदूर की मदद करने की मांग की है।

इससे पहले मोदी सरकार से विपक्ष यह मांग कर चुका है कि गरीबों को हर महीने 7,500 रुपये दिए जाए।

राहुल गांधी ने कहा कि लॉकडाउन से करोड़ों लोगों को ज़बरदस्त नुक़सान हुआ है. अगर आज उनकी मदद नहीं की, उनके खातों में 7,500 रुपये नहीं डाला, अगर राशन का इंतज़ाम नहीं किया, अगर प्रवासी मज़दूरों, किसानों और छोटे उद्योगों की मदद नहीं की तो आर्थिक तबाही हो जाएगी.

बैठक खत्म होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने ब्रीफिंग की जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार से 11 मांगें रखी. गरीबों के बैंक खाते में 10 महीने तक 7,500 रुपये जमा किए जाएं. इसमें भी 10 हजार रुपये फौरन जमा किया जाए जबकि बाकी की राशि किस्तों में भेजा जाए. छह महीने के लिए जरूरतमंदों का 10 किलो खाद्यान्न और मनरेगा के तहत 200 दिन का काम सुनिश्चित किया जाए.