२१०९ आदिवासी कलाकारों ने एक साथ बनाई वारली पेन्टिंग

वलसाड। लक्ष्य चेरीटेबल ट्रस्ट द्वारा वारली कला के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से रविवार को वलसाड में सौराष्ट्र कडवा पाटीदार सेवा समाज हॉल में वारली कला महोत्सव का आयोजन किया गया था। इसमें 2109 आदिवासी विद्यार्थियों ने एक साथ एक ही स्थान पर वारली पेन्टिंग बनाकर इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में स्थान हासिल कर वलसाड जिले का नाम वैश्विक फलक पर प्रस्थापित किया है। महोत्सव में वलसाड और तापी जिले की 13 सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया था। जिन्होंने दिए गए मटेरियल पर अपनी वारली कला प्रदर्शित की। पेन्टिंग के लिए की चेन, टी कोस्टर, पेन स्टेन्ड, मोबाइल स्टेन्ड, टेबल क्लॉक, वॉल क्लॉक, एमडीएफ ट्रे, थ्री पीस फ्रेम, डाइनिंग टेबल मैट, न्यूज पेपर स्टेन्ड, वुडन स्पून, फोटो फ्रेम, वॉल माउन्ट फ्रेम, गिफ्ट कार्ड वगैरेह समेत छह हजार से ज्यादा वस्तुओं का उपयोग किया गया था। महोत्सव में भाग लेने वाले छात्रों की स्कूल के प्रतिनिधियों को मंत्री रमण लाल पाटकर समेत अन्य गणमान्यों द्वारा सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर रमण पाटकर ने वारली कला महोत्सव में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामना देते हुए लक्ष्य चेरीटेबल ट्रस्ट द्वारा वारली कला को प्रोत्साहन देने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि वारली एक आदिवासी जाति है, जो मुख्यत: गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर निवास करती है। उनकी जीवन शैली सादी, सरल और कला संगीत से भरपूर है। वारली चित्रकला आदिजाति समाज की विशिष्ट कला है। वारली कला द्वारा आदिवासी प्रजा अपनी जीवन शैली, संस्कृति, धर्म, त्योहार, प्राकृतिक दृश्य और भौगोलिक विविधता दर्शाते हैं। आदिवासी वर्षों से पेन्टिंग, बांस की वस्तुओं की बनावट, भरतकाम, मिट्टी की बनावट जैसी विविध कला से जुड़े हैं। इस अवसर पर वलसाड और धरमपुर के विधायकों ने भी आदिवासी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। पारडी विधायक कनु देसाई ने वारली प्रजा को कला और शांतप्रिय बताते हुए कहा कि वारली कला पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। लक्ष्य चेरीटेबल ट्रस्ट के प्रमुख भरत सिंह चुडासमा द्वारा ट्रस्ट की ओर से आदिवासी विकास की प्रवृत्तियों की जानकारी दी गई।

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