453 पेज के फैसले के एक-एक बिंदू को पढऩे के बाद लगाई जाएगी हाईकोर्ट में याचिका आसाराम से पहले शिल्पी को बाहर निकालने की कवायद, सलमान के वकील से मिले शिल्पी के पिता

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जोधपुर। यौन उत्पीडऩ के आरोप में दोषी पाए गए आसाराम की सजा के खिलाफ शुक्रवार को भी राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका नहीं लगाई गई। बताया गया है कि आसाराम के वकील किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते है। वे ट्रायल कोर्ट के 453 पेज के फैसले के एक-एक बिंदू को पढऩे के बाद हाईकोर्ट में अपील करेंगे। इसके लिए आसाराम के वकीलों को अभी एक-दो दिन का और समय लग सकता है। वहीं उससे पहले इस मामले की सहआरोपी शिल्पी उर्फ संचिता को बाहर निकालने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है।
आसाराम के अधिवक्ताआें का कहना है कि हाईकोर्ट में अपील करने में अभी दो-तीन दिन लगेंगे। ट्रायल कोर्ट के 453 पेज के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। उसके एक-एक बिंदू को पढऩे के बाद हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर की जाएगी। बता दे कि आसाराम को जेल से बाहर निकालने के लिए अब उसके समर्थकों ने नया प्लान बनाया है। सीनियर वकीलों के साथ मिलकर आसाराम के समर्थक अब कानूनी दांवपेच लगाते हुए आसाराम को बाहर निकालने में जुट गए है। आसाराम के करीबी रहे एक समर्थक ने बताया कि उन्होंने बापू की जमानत का प्लान बना लिया है। इसके तहत सबसे पहले वे हाईकोर्ट में संचिता उर्फ शिल्पी की याचिका लगाएंगे। इस याचिका को लेकर शिल्पी के पिता महेंद्र कुमार जोधपुर पहुंच चुके है और उन्होंने सीनियर वकील महेश बोड़ा से मुलाकात भी कर ली है। रायपुर छत्तीसगढ़ के रहने वाले महेंद्र और सीनियर वकील बोड़ा के बीच हुई इस मुलाकात में शिल्पी की सजा स्थगन को लेकर बात हुई है। यानि सलमान खान का केस लडऩे वाले महेश बोड़ा अब सोमवार को शिल्पी की याचिका हाईकोर्ट में दायर कर सकते है।
काम नहीं आए प्रशंसा पत्र
उम्रकैद की सजा पाने वाले स्वयंभू बाबा आसाराम ने सजा कम कराने के लिए अपने दान के कार्यों का हवाला दिया था। यही नहीं उसने इसके समर्थन में पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन, डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत, कांग्रेस नेताओं दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और कपिल सिब्बल के प्रशंसा पत्रों का हवाला दिया था। हालांकि अदालत ने इन सभी प्रशंसा पत्रों को खारिज कर दिया और कहा कि आसाराम ने देश के लोगों के अंदर संतों का नाम खराब किया है। कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि इस तरह के प्रशंसा पत्र यह दर्शाते है कि आरोपी प्रभावशाली और अत्यंत शक्तिशाली व्यक्ति है। आसाराम ने इस पत्रों का हवाला देकर कहा था कि आदिवासी इलाकों में गरीबों के लिए काम करने और जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए उसकी प्रशंसा की गई थी।
अब तक सवा 7 करोड़ रुपए खर्च
आसाराम पर पिछले करीब साढ़े चार साल में राज्य सरकार अब तक करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है। यह खर्च उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर हुआ है। एक अनुमान के अनुसार पिछले 52 महीनों में सरकार के सवा सात करोड़ खर्च हो चुके है। अधीनस्थ न्यायालय में सुनवाई के दौरान आसाराम को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान पुलिस के आला अधिकारी से लेकर सिपाही तक करीब 50 लोगों का लाव लश्कर आसाराम के इर्द-गिर्द होता है। आसाराम को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान कितने रुपए सरकार के खर्च हो जाते है इस बात की पड़ताल में यह अनुमानित खर्च का आंकड़ा सामने आया है।
दरअसल, आसाराम को जब कोर्ट लाया जाता है तो आसाराम से पहले करीब 20 सिपाही कोर्ट परिसर में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करते है। वहीं जब आसाराम जेल से बाहर निकलता है तो आसाराम की गाड़ी में करीब 20 सुरक्षाकर्मी उसके साथ होते है। आसाराम की गाड़ी के आगे एक चेतक चलती है, जिसमें करीब पांच कर्मचारी होते है। वहीं आसाराम की गाड़ी के पीछे भी चलती है उसमें भी करीब पुलिस के पांच जवान होते है। कुल मिलाकर आसाराम को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान आला अधिकारी से लेकर सिपाही तक करीब 50 लोग पेशी पर लग जाते है।
अब यदि कोई व्यक्ति पुलिस से सुरक्षा लेने के लिए एक सिपाही को हायर करता है तो उसे 1 दिन के 3000 देने पड़ते है वहीं थाना अधिकारी स्तर के कर्मचारी को लेने के लिए दिन के साढ़े हजार रुपए देने पड़ते है। आसाराम को एक साल में करीब सौ दिन पेश किया गया। इस हिसाब से आसाराम की 1 साल की पेशी के दौरान सरकार के करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए। आसाराम को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान पिछले साढ़े चार सालों में लगभग सवा सात करोड़ रुपए आसाराम की सुरक्षा में खर्च हो गए। सबसे बड़ी बात यह है कि पेशी के दौरान जलने वाले डीजल और पेट्रोल का खर्चा इसमें नहीं जोड़ा गया है।