आपसी समझाइश से हुआ कई प्रकरणों का निस्तारण

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट सहित राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतो में शनिवार को तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। इसमें आपसी समझाइश से कई प्रकरणों का निस्तारण किया गया।

राजस्थान हाईकोर्ट में लोक अदालत के लिए एक विशेष पीठ सहित छह पीठ गठित की गई। प्रथम पीठ में न्यायाधीश संदीप मेहता के साथ मनोनीत सदस्य अधिवक्ता चन्द्रशेखर कोटवानी, द्वितीय पीठ में न्यायाधीश विजय विश्नोई के साथ सदस्य अधिवक्ता रविन्द्रकुमार चारण, तृतीय पीठ में न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्रसिंह भाटी के साथ सदस्य अधिवक्ता अनिलकुमार सिंह, चतुर्थ पीठ में न्यायाधीश दिनेश मेहता के साथ सदस्य अधिवक्ता विवेक श्रीमाली और पंचम पीठ में न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर के साथ सदस्य अधिवक्ता सुनील मेहता ने राजीनामे योग्य मामलों पर सुनवाई की। लंबित प्रकरणों में पक्षकारान के मध्य समझाइश करवाकर विभिन्न प्रकृति के कुल 249 प्रकरणों का निस्तारित कर 4,30,04328 रुपए की राशि के अवार्ड पारित किए गए।

वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर महानगर के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश नरसिंह दास व्यास ने बताया कि  राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए पूरे न्यायालय परिसर में कुल 22 बैंचों की स्थापना की गई जिसमें पीठासीन न्यायिक अधिकारियों ने अध्यक्ष के रूप में कार्य किया तथा प्रत्येक बैंच के लिए एक अधिवक्ता सदस्य के रूप में उपस्थित था। इनमें मुकदमा पूर्व स्तर (प्री-लिटिगेशन) व स्थाई लोक अदालत के कुल 16 हजार 808 प्रकरण रखे गए। जोधपुर महानगर जिला न्यायक्षेत्र में स्थित सभी न्यायालयों व स्थाई लोक अदालत द्वारा कुल 1344 प्रकरणों का निस्तारण किया गया तथा 15,62,84,040 रुपए अवार्ड राशि भी पारित की गई। इसके अतिरिक्त मुकदमा पूर्व सुलह एवं समझौता (प्री-लिटिगेशन) स्तर के कुल 3123 प्रकरण निस्तारित किए गए। ये वे प्रकरण हैं जो न्यायालयों में संस्थित होने से पूर्व इस लोक अदालत में निस्तारित हो चुके है तथा इनमें कुल 23,70,098 रुपए का अवार्ड पारित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर महानगर के सचिव सिद्वेश्वर पुरी ने बताया कि लोक अदालत में दोनो पक्षों की आपसी सहमति व राजीनामे से सौहार्दपूर्ण वातावरण में पक्षकारान की रजामंदी से विवाद निपटाया गया। लोक अदालत के माध्यम से शीघ्र व सुलभ न्याय मिलता है तथा इसकी कोई अपील नहीं होती है। मामलों के निस्तारण पर कोर्ट फीस भी पक्षकारों को लौटाई गई। राष्ट्रीय लोक अदालत में दाण्डिक शमनीय अपराध, धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के मामले, बैंक रिकवरी मामले, पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण मामले, बिजली व पानी के मामले, मजदूरी, भत्ते और पेंशन भतों से संबंधित मामलों में तथा सभी प्रकार के प्री-लिटिगेशन के मामले जो अभी न्यायालय के समक्ष नहीं आए है इत्यादि को रखा गया एवं राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामा के आधार पर उनका निस्तारण किया गया।

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