प्रशासक और विकास आयुक्त की नजर में क्या यह एक ही काबिल अधिकारी है?

भ्रष्टाचार, भाईगीरी, हफ्ता-वसूली और माफियागिरी पर अंकुश लगाने में प्रशासक प्रफुल पटेल भी फैल! | Kranti Bhaskar image 1
VK-DAS-Hindi-news-in-silvassa

संध प्रदेश दादरा नगर हवेली और यहां की प्रशासन की कार्यप्रणाली की वास्तविकता की जानकारी शायद गृह मंत्रालय को नहीं, वरना इस प्रशासन के कई अधिकारियों पर मेहरबानी दिखाने के मामले में दानह के बड़े बड़े आई-ए-एस पर कार्यवाई जरूर होती! संध प्रदेश दादरा नगर हवेली में अगर विभागों के बटवारे और बंदरबांट की बाते करे तो एक अधिकारी का नाम सबसे आगे बताया जाता है वह नाम है डाक्टर वीके दास का, बताया जाता है की सरकार चाहे यू-पी-ए की रही हो या एन-डी-ए की, दानह में सांसद चाहे कांग्रेस के मोहन डेलकर रहे हो या भाजपा के नट्टू पटेल, डाक्टर दास के विभागों में कभी नहीं आई। आखिर डाक्टर दास को प्रशासन द्वारा दिए गए विभाग और विभागों के अतिरिक्त प्रभार का असली माजरा क्या है और इस मामले में कैसी-कैसी चर्चाएँ जनता में चल रही है यह छापना मुनासिब नहीं, लेकिन अगर हकीकत का जायझा प्रशासक ने लिया तो शायद वह भी शर्मशार हो जाए।

चाहे सरकार यू-पी-ए की हो या एन-डी-ए की इनके प्रभारों में कोई फर्क नहीं आया!

 

ऐसा नहीं है की दानह में डाक्टर दास की कार्यप्रणाली पर पहली बार सवाल खड़े हुए हो, श्री विनोभाभावे अस्पताल तथा अन्य विभागों के प्रभार संभाल रहे इस अधिकारी के चर्चे पहले भी सुर्खियों में रहे है, वैसे यह और बात है की अब उक्त अधिकारी के अधिकारित्व तथा अतिरिक्त प्रभारों में हो रहा इजाफा आम जनता को हजम नहीं हो रहा।

ये भी पढ़ें-  हर्षोल्लास के साथ मनाया गया दमण दीव का 59 वां मुक्ति दिवस

फिलवक्त उक्त अधिकारी के पास, श्री विनोबाभावे सिविल अस्पताल, दानह फूड (खाद्य) विभाग, दानह ड्रग कंट्रोलर, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा निदेशक, एड्स कंट्रोल प्रोग्राम जैसे कई विभागों के अतिरिक्त प्रभार है। बताया जाता है की इनमे से कुछ विभाग ऐसे है जिनका एक ही अधिकारी के पास होना उचित नहीं तथा एक ही अधिकारी के पास इन सभी विभागों के प्रभार होने से पारदर्शिता में रुकावट आ सकती है, लेकिन इस बात पर प्रशासक कितना गौर फरमाते है यह तो विकास आयुक्त पर निर्भर करता है क्यों की बताया जाता है की अगर दानह में डाक्टर दास के लिए पहले विकास आयुक्त है तो बादमे प्रशासक, भले-ही नियमों के अनुसार प्रशासक मुख्या क्यों न हो, लेकिन नजदीकी के हिसाब से विकास आयुक्त ही बताए जाते है।

पूर्व में क्रांति भास्कर ने दानह फूड विभाग से मिली जानकारी तथा डाक्टर दास द्वारा फूड विभाग एवं विभागीय अधिकारी को लेकर की गई टिप्पणी के बारे में एक खबर प्रमुखता से छापी, जिसमे बताया गया की फूड विभाग के जिम्मेवार अधिकारी डाक्टर दास ही अपने विभाग एवं विभागीय अधिकारी को नग्न कर उस पर भ्रष्टाचार व वसूली का आरोप लगाते देखे गए, लेकिन वह खबर अभी भी प्रशासन के कार्यालय में धूल खा रही है क्यों की संज्ञान लेने वाले विकास आयुक्त तो इनके खास बताए जाते है और प्रशासक बिना विकास आयुक्त से पूछे डाक्टर दास पर संज्ञान ले ले यह मुमकिन होता दिखाई नहीं देता।

हालांकि क्रांति भास्कर ने अपनी उस खबर में यह भी बताया था की डाक्टर दास अपने ही फूड विभाग के अधिकारी के आलावे और किस किस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार करने तथा भ्रष्टाचार के मामले में संलिप्प्त होने पर टिप्पणी की है उसका खुलासा भी जल्द होगा। तो आज आपको बता दे की डाक्टर दास ने दानह प्रशासन के उस अधिकारी को भी नहीं बखसा जिसके कारण उनकी कुर्सी टिकी है, डाक्टर दास ने दानह प्रशासन के कई वरीय अधिकारी पर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए, जिनमे विकास आयुक्त भी शामिल है, लेकिन उस मामले की रिकॉर्डिंग जल्द क्रांति भास्कर अपनी वेबसाइट पर लॉन्च कर प्रशासन और प्रशासक की नींद खोलेगी। शेष फिर।