आम्रपाली के बाद यह बड़ा बिल्डर भी होगा दिवालिया!

आम्रपाली के बाद यह बड़ा बिल्डर भी होगा दिवालिया!
आम्रपाली के बाद अजनारा बिल्डर के दिवालिया घोषित होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 18 महीने तक चली सुनवाई के बाद दिवाला समाधान पेशेवर न‍ियुक्‍त कर द‍िया है। इसके बाद बिल्डर कोई भी काम बिना आईआरपी से इजाजत ल‍िए नहीं कर सकेगा। इस पर अजनारा ग्रुप के प्रमोटर प्रमोद गुप्ता अजनारा ने कहा क‍ि वह एनसीएएलटी (NCALT) में अपील करेंगे।
एनसीएलटी (NCLT ) का क्या मतलब होता है
“एनसीएलटी की शुरुआत मुख्य रूप से कोर्ट द्वारा कंपनियों के संबंध में कानूनों के अंतर्गत संभालने के लिए की गई है। एनसीएलटी एक अर्ध-न्यायिक प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है, जिसका काम  संरचनाओं, कानूनों को संभालना और कॉर्पोरेट मामलों से संबंधित विवादों का निपटारा करना होता है । भारत के संविधान में अनुच्छेद 245 के तहत, NCLT का गठन हुआ है।”

अजनारा एम्बोसिया प्रोजेक्ट का मामला
मनीष कुमार गुप्ता समेत 113 खरीदारों ने अजनारा ब‍िल्‍डर के ख‍िलाफ एनसीएलटी में मुकदमा दायर किया था। इन लोगों ने सेक्टर-118 स्‍थ‍ित अजनारा एम्बोसिया प्रोजेक्ट में बुकिंग कराई थी। इस पर चली सुनवाई के बाद एनसीएलटी की तरफ से यह फैसला सुनाया गया। वाद दायर करने वाले सभी खरीदारों ने साल 2012 से लेकर 2019 तक अजनारा इंडिया लिमिटेड को 50 करोड़ 47 लाख 48 हजार रुपये का भुगतान क‍िया था।

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एनसीएलटी ने बिल्डर पर बड़ी कार्रवाई की
शुरुआत में उनसे तीन साल में फ्लैट का पजेशन म‍िलने की बात कही गई थी लेक‍िन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद खरीदार एनसीएलटी चले गए। पीड़ितों की तरफ से बताया गया क‍ि एनसीएलटी ने बिल्डर पर बड़ी कार्रवाई की है। उन्‍होंने यह भी बताया क‍ि अजनारा ब‍िल्‍डर को दिवालिया घोषित करने का प्रोसेस शुरू हो चुका है। साथ ही आईआरपी अमरपाल को अपाइंट कर द‍िया गया है। इसके बाद खरीदारों को अपना आश‍िययाना म‍िलने की उम्मीद जगी है।

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जानकारी के मुताबिक, बिल्डर्स के पास नोएडा के सेक्टर 118 में प्लाट नं GH01 पर 1,42,967 स्क्वायर मीटर की जमीन थी और उसने यहां एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने के लिए कंपनियों और व्यक्तियों के साथ करार किया था। बिल्डर बायर एग्रीमेंट के तहत, बिल्डर को करार साइन होने के 3 साल के अंदर करीब 1,600 यूनिट्स बनाकर उनकी चाबी खरीदारों को सौंपनी थी। आदेश में केस को लेकर जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक बिल्डर ने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए खरीदारों से एडवांस पेमेंट लिया और कुल 50,47,48,426 रुपये का फाइनेंशियल डेट जुटाया, लेकिन वह फिर भी समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाया और खरीदारों को चाबी सौंपने में असमर्थ रहा।