चुनाव आए तो हिटलरशाही याद आई, क्या चुनाव के बाद हफ़्ता वसूली जारी रहेगी?

Ketan Patel Daman
Ketan Patel Daman

दमण-दीव लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी केतन पटेल को नामांकन जमा करने के बाद हिटलरशाही याद आई। जब भी दमण-दीव में चुनाव का समय आता है दमण-दीव के नेताओं को हिटलरशाही याद आती है, भ्रष्टाचार याद आता है, बेरोज़गारी याद आती है, जनता की समस्याएँ याद आती है और जनता याद आती है। लेकिन चुनाव के बाद की बात कुछ और है। चुनाव के बाद नेताओं को ना हिटलरशाही दिखाई देती है ना जनता की समस्याएँ दिखाई देती है, ना जनता दिखाई देती है। अगर कुछ दिखाई देता है तो वह गुलाबी-गुलाबी नोट जिसका जीता जागता सबूत है नेताओं के आलीशान बंगले और आलीशान गड़िया! क्रांति भास्कर इससे पहले भी कई बार यह सवाल कर चुकी है की अपने आप को समाज सेवा में व्यस्थ बताने वाले नेताओं के पास इतनी संपत्ति कहा से आई? वैसे इस वक्त जिस तरह केतन पटेल हिटलरशाही परबात कर रहे है ठीक इसी तर्ज पर 2014 लोकसभा चुनाव में भी केतन पटेल ने इसी तरह अफ़सरशाही और हिटलरशाही पर जमकर प्रशासन को कोसा था, चुनाव हारने के बाद क्या हुआ? जनता ने देखा।

खेर अब लोकसभा 2019 की बात करते है। केतन पटेल ने दमण-दीव लोकसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया और नामांकन दाखिल करने के बाद जनता की समस्याओं का समाधान करने के कई वादे भीकिए। लेकिन जनता से वादे करने वाले केतन पटेल, चुनाव के बाद जनता का फोन उठाए इस बात की गारंटी मिलनी तो मुश्किल है! वैसे केतन पटेल के पिता डाहया पटेल ने भी बातों बातों में इसी मामले में केतन पटेल की पोल खोल कर रख दी। केतन पटेल के बारे में जनता से बात करते हुए डाहया पटेल ने कहा कि आप सभी लोग मुझ पर विश्वास रखकर केतन पटेल को वोट दें। अब डाहया पटेल की इस बात को जनता क्या समझे? डाहया पटेल ने कहा की आपके जो भी काम है, उसे पूरा करने का, मैं पूरा विश्वास दिलाता हूं और अगर केतन पटेल फोन नहीं उठाए और काम नहीं करे तो उसकी जवाबदारी मेरी है। अब डाहया पटेल द्वारा कही इस बात का जनता क्या मतलब निकाले? डाहया पटेल की इस बात ने यह तो स्पष्ट कर दिया की केतन पटेल जिस दमण-दीव की जनता से हाथ जोड़कर वोट मांगने निकले है उनका फोन तक नहीं उठाते, अन्यथा डाहया पटेल ऐसे खुले तौर पर केतन पटेल के फोन नहीं उठाने और जनता का काम नहीं करने के बारे में बात करते हुए जनता को यह नहीं कहते की जनता उन पर भरोसा करें।

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वैसे अब डाहया पटेल की इस बात के बाद जनता यह भी सोच रही है कि, चुनाव के समय डोर-टू-डोर प्रचार करने वाले केतन पटेल ने चुनाव के बाद अपना डोर बंद कर दिया और जनता का फोन नहीं उठाया तो डाहया पटेल कही यह कहना शुरू ना कर दे, की क्या करू वो मेरी सुनता नहीं है? यदि ऐसा हुआ तो जनता का क्या होगा? जनता की समस्याओं का क्या होगा? यह सवाल जनता को परेशान कर रहा है।

केतन पटेल ने कहा की दमण-दीव में जो भी विकास कार्य हुए है वह कांग्रेस पार्टी द्वारा और कांग्रेस के कार्यकाल में पूर्व सांसद डाह्याभाई पटेल के समय में हुआ है। केतन पटेल ने कहा कि आप सभी के आशीर्वाद से जीत कर मैं आऊंगा तो इसी तरह काम करुंगा। अब किस तरह काम करेंगे? यह भी जनता विस्तार में जानना चाहती है! लेकिन केतन पटेल ने विस्तार में कुछ नहीं बताया। ना दमण की डीआईए पर हुकूमत के बारे में, ना दाबेल में हफ़्ता-खोरी के बारे में और ना ही जिग्नेश उर्फ जिगगु के हफ़्ते के बारे में, दमण में इन सभी मामलो पर चर्चा उस दौर से होती रही है, जब डहया पटेल कांग्रेस से सांसद थे,केतन पटेल पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज़ भी हुए, लेकिन केतन पटेल ने उम मामलो पर भी चुप्पी साधे रखी। वैसे क्रांति भास्कर को, केतन पटेल पर पूर्व में दर्ज हुए कुछ-एक मामलो की जानकारी तथा मामलो के विषय में प्रशासक को लिखे पत्र मिले है।

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Ketan Patel FIR

Ketan Patel FIR

P.C.R No. 141/95
U/s. 143, 147, 149, 447, 323, 504 (2)

P.C.R No. 158/95
U/s. 323, 504, 506, 34

P.C.R No. 172/95
U/s. 506

P.C.R No. 87/96
U/s. 143, 147, 149, 341, 427, 506

P.C.R No. 50/98
U/s. 143, 147, 148, 149, 332, 353, 186, 323, 504

P.C.R No. 179/98
U/s. 143, 147, 148, 149, 452, 504, 506 & 4 & 24 Arms Act.

P.C.R No. 23/2000
U/s. 452, 323, 384, 504, 34

P.C.R No. 3/2001
U/s. 447, 323, 504, 34, 506

यह वो मामले है जो 2019 लोकसभा के एफेडेविट में नहीं। इन मामलो का 2019 लोकसभा के एफेडेविट में नहीं होने का एक ही मतलब निकलता है और वह यह की इन सभी मामलो का निपटारा हो चुका है। फिर भी जनता को यह जानने का हक है कि उनसे जो वोट मांग रहा रहा है उस पर कैसे कैसे आरोप लगते रहे है और कैसे कैसे मामले दर्ज़ हो चुके है। वैसे इन मामलो के विषय में अधिक जानकारी लेने के लिए क्रांति भास्कर द्वारा केतन पटेल से फोन पर कई बार संपर्क किया गया, लेकिन केतन पटेल अपनी आदत से मजबूर है उन्हे जनहित में क्रांति भास्कर द्वारा पूछे गए तीखे सवाल नहीं, बल्कि पीली पत्रकारिता करने वाले चापलूस पत्रकार पसंद है।

खेर अब उम मामलो की बात करते है जिनकी जानकारी 2019 लोकसभा के एफेडेविट में केतन पटेल के द्वारा दी गई। 2019 लोकसभा के एफेडेविट में केतन पटेल ने निचे दिए गए इन मामलो की जानकारी दी है.

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Fir No-106/2018
U/s 468 & 471 of The IPC

FIR No-104/2018
U/s 386 r/w 34 of The IPC

FIR No-72/2018
U/s 387, 452, 506, 120B r/w 34 Of The IPC

FIR No- RCBA1/2017/A0024
U/s  13(2) r/w 13(1) e Of The PC Act & U/s 109 of The IPC

FIR No-20/2014
U/s  353, 186, r/w 34 of The IPC

नामांकन के बाद केतन पटेल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दमण-दीव के लोगों की मुख्य समस्या है पानी की, बिजली की और रोजगार, केतन पटेल ने कहा कांग्रेस पार्टी ने चुनावी मुद्दे में इसे प्रमुख एजेंडा बनाया है। दमण-दीव के किसानों के लिए मुफ्त बिजली एवं निवासीय विस्तारों के लोगों के लिए 300 यूनिट मासिक बिजली मुफ्त दी जायेगी। वहीं 8000 लीटर पानी प्रतिमाह मुफ्त दिया जायेगा।

केतन पटेल द्वारा किए गए चुनावी वादों पर दमण-दीव की जनता सोच रही है कि क्या दमण-दीव की इकाइयो से पानी के नाम पर, लाखों रुपया प्रतिमाह लेने के बाद भी पानी सप्लाई नहीं करने के मामले में,न्यायालय के चक्कर काटने वाला केतन क्या जनता को प्रतिमाह 8000 लीटर पानी मुफ्त देगा? वही दमण-दीव के किसानो को मुफ्त बिज़ली देने तथा घरेलू 300 यूनिट बिज़ली मुफ्त देने के वादे पर भी जनता उस दिन को याद कर रही है जब केतन पटेल की माता, चंचल पटेल पर करोड़ो रुपये बिज़ली बिल नहीं भरने का मामला दर्ज हुआ था। वैसे क्रांति भास्कर को जानकारी मिली है मोटी दमण किले में स्थित केतन पटेल के कार्यालय का भी लाखों रुपये का बिजली बिल लम्बे समय से बकाया है और उक्त कार्यालय के मूल मालिक बिज़ली बिल के भुगतान हेतु केतन पटेल के यहा चक्कर लगा रहे है। अब ऐसे में जनता केतन पटेल से क्या उम्मीद करें? शेष फिर।