सर्वपितृ अमावस्या के साथ श्राद्ध पक्ष संपन्न, तर्पण करके पितरों को दी जलांजलि

जोधपुर। भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू हुए श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिवस शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के रूप में मनाया गया। इसी के साथ शनिवार को श्राद्ध पक्ष भी संपन्न हो गया। सर्वपितृ श्राद्ध पर शनिवार को भूतेश्वर महादेव मंदिर के सरोवर सहित अन्य जल सरोवरों में हजारों लोगों ने तर्पण कर पितृऋण मुक्ति की कामना की। लोगों ने अपने पूर्वजों का विधि-विधान से पूजन किया और पिंड दान, हवन, तर्पण किए। पंडितों के अनुसार जो जातक अपने कुल के ज्ञात-अज्ञात, भूले चूके पितरों का श्राद्ध नहीं कर पाया वह सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनको जलांजलि देकर श्राद्ध करता है। इस दिन शहर के कई जल सरोवरों पर विशेष व्यवस्था की गई।

भारतीय तिथि गणना के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू हुआ पितरोत्सव आश्विन कृष्णा अमावस्या को समाप्त हो गया। पंडितों का कहना है कि हमारे पूर्वजों की सद्गति के लिए वर्ष में एक दिन आता है जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहते है। जिनके दिवंगत होने की तिथि याद न हो उनके श्राद्ध के लिए अमावस्या की तिथि उपयुक्त मानी गई है। भारतीय सनातन संस्कृति में दिवंगत पूर्वजों की आत्मिक शांति तथा उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से जुड़ा पर्व कनागत (श्राद्ध पक्ष) आश्विन अमावस्या शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के रूप में मनाया गया। शनिवार को जातकों ने शहर के प्रमुख जलाशयों पर सामूहिक रूप से तर्पण कर दिवंगत पूर्वजों को जलांजलि दी।

भूतेश्वर महादेव मंदिर में तर्पण कार्यक्रम संयोजक गोपीकिशन बोहरा ने बताया कि यहां श्राद्ध पक्ष में आचार्य अजय हर्ष के सान्निध्य में रोजाना तीन पारियों में नि:शुल्क तर्पण कराया गया। इस मौके पर शनिवार को पण्डित अजय हर्ष का पूजन कर सम्मानित किया गया। उन्हे वस्त्र, श्रीफल, धार्मिक पुस्तकें व स्मृति चिंह देकर सम्मानित किया। तर्पण कार्य में सहयोग के लिए लालचंद, अनिल बोहरा, कनजी, ढबसा, आनंद पुरोहित आदि का भी सम्मान किया गया। प्रारंभ में गोविंदकिशन बोहरा ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन आनंद जोशी ने किया।

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