अत्याचार के विरोधी थे भगवान श्रीकृष्ण: संत चंद्रप्रभ

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जोधपुर। गांधी मैदान में जन्माष्टमी पर्व पर अद्भुत और अनूठे कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें 36 कौम के हजारों श्रद्धालुओ ने भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हुए झूला झुलाया और पूरे देश के लिए सर्व धर्म सद्भाव की मिसाल पेश की। इस दौरान एक घंटे में समझें संपूर्ण गीता का सार विषय पर सभा को संबोधित करते हुए संत चंद्रप्रभ महाराज ने कहा कि भारत विश्व की वह सर्वश्रेष्ठ पुण्य भूमि है जिसमें अनेक महापुरुषों ने जन्म लेकर इसे सभ्य और संस्कृत बनाया। जहां राम ने मर्यादा की, महावीर ने अहिंसा व करुणा की, बुद्ध ने मध्यम मार्ग की ज्योत जलाई वहीं श्री कृष्ण ने ज्ञान योग व कर्म योग का अवदान देखकर भारतीय संस्कृति को पल्लवित किया। उन्होंने कहा कि परिवार में रहने की कला राम से सीखें, जीवन जीने की कला बुद्ध से सीखें, मुक्ति पाने की कला महावीर से सीखें और संघर्ष करते हुए सफलता पाने की कला कृष्ण से सीखें। उन्होंने कहा कि यादव कुल में दो महापुरुषों ने जन्म लिया जिसमें भगवान नेमिनाथ ने जिनशासन पर राज किया वहीं भगवान श्री कृष्ण ने सनातन धर्म पर राज किया।

श्रीकृष्ण के जीवन पर प्रकाश डालते हुए संतप्रवर ने कहा कि वे अत्याचार के विरोधी थे। उन्होंने धर्म की स्थापना करने के लिए अत्याचारियों का नाश किया। एेसे ही हमें भी अत्याचार को सहन करने की बजाय उसका विरोध करने के लिए खड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण ज्ञान और प्रेम के अद्भुत संगम थे, वे अनासक्त कर्म योगी थे। उन्होंने गीता का ज्ञान देकर मानव जाति पर परम उपकार किया। श्री कृष्ण मुस्कान से सदा भरे रहते थे। अगर हर इंसान श्री कृष्ण की तरह जीवन के हर मोड़ पर मुस्कुराना सीख ले तो वह भी सबका मनमोहन बन जाएगा। गीता का विवेचन करते हुए संतप्रवर ने कहा कि दुनिया का एक ही शास्त्र है गीता जिसका निर्माण युद्ध के मैदान में हुआ। भारतीय संस्कृति का सार ग्रंथ है गीता। भारत के हर व्यक्ति को गीता अवश्य पढऩी चाहिए। संत प्रवर ने कहा कि गीता और आगम में ज्यादा फर्क नहीं है। गीता हमें अरिहंत बनना सिखाती है। अगर गीता को अंतर्मन के साथ जोड़ लिया जाए तो वह महावीर का आगम बन जाएगी और आत्म विजय दिलाने का आधार बन जाएगी। हम धर्म रूपी युधिष्ठिर, भक्ति रूपी भीम, आत्मविश्वास रूपी अर्जुन, नीति नियम रूपी नकुल और सेवा रूपी सहदेव को जीवन से जोडक़र दुर्बुद्धि के दुर्योधन, दुशील के दुशासन, स्वार्थ के शकुनि और मोह मूर्छा के धृतराष्ट्र को जीवन से दूर करें।

इससे पूर्व संत ललित प्रभ चंद्रप्रभ और शांतिप्रिय सागर के सानिध्य में धूमधाम से जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन हुआ जिसमें बालवाड़ी विद्यालय की छात्राओ द्वारा सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी गयी, शिवि दफ्तरी जयपुर ने भी भक्ति नृत्य पेश कर सबका मन मोह लिया। समारोह में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सिरोही विधायक संयम लोढ़ा, अशोक देरासरिया बेंगलुरु, रमेश गुप्ता, महेश सारडा, लाभार्थी सुखराज नीलम मेहता ने भगवान का झूला झूलाते हुए गुरुजनों से आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम में मंच संचालन अशोक पारख ने किया।