आसाराम से मुलाकात के लिए दायर याचिका खारिज

जोधपुर। अपने ही आश्रम की नाबालिग शिष्या से यौन उत्पीडऩ के मामले में जोधपुर केन्द्रीय करागृह में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम उर्फ आसुमल से जेल में मुलाकात करने को लेकर दायर जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि उनकी इस सजा के खिलाफ अपील भी खारिज हो चुकी है और जमानत के आवेदन कई बार नामंजूर हो चुके है।

जोधपुर जेल में बंद आसाराम के दिल्ली निवासी एक अनुयायी जोगेंद्र तुल्ली ने राजस्थान हाईकोर्ट में आसाराम से समय पर अनुयायियों को नहीं मिलने देने के बारे में जनहित याचिका दायर की गई थी। उस मामले में याचिकाकर्ता जोगिंद्र तुल्ली ने स्वयं अधिवक्ता के तौर पर कोर्ट में उपस्थित होकर उक्त मामले में स्वयं पक्ष रखा था। कोर्ट को बताया था कि जेल सुप्रिडेंट द्वारा आसाराम के समस्त अनुयायियों को समय पर मिलने नहीं दिया जाता। इसके साथ ही कोर्ट के समक्ष यह भी तर्क रखे कि आसाराम एक वयोवृद्ध बंदी है। जिसे पूर्ण पोस्टिक आहार भी समय पर नहीं दिया जाता। इसके अलावा तुल्ली के तर्क थे कि आसाराम को आयुर्वेदिक चिकित्सा की आवश्यकता समय-समय पर रहती है,जो भी जेल प्रशासन द्वारा समय पर नहीं करवाई जाती।

उक्त मामले में राज्य सरकार की ओर से एएजी करणसिंह राजपुरोहित ने पक्ष रखते हुए बताया कि यह याचिका जनहित की श्रेणी में कतई नहीं आती। साथ ही राजपुरोहित रात तक यह भी था कि उक्त मामले में जनहित याचिका के नाम से आसाराम अनुयाई फायदा लेना चाहते हैं और याचिका में लगाई गई सभी आरोप झूठे है। आसाराम के अनुयायियों द्वारा मिलने के प्रार्थना पत्रों का अवलोकन करते हुए अति आवश्यक व्यक्तियों को मिलने की अनुमति समय समय पर दी जाती है। साथ ही पूरे देश में आसाराम के हजारों अनुयाई हैं और सबको अनुमति दिया जाना मुमकिन नहीं। इसके अलावा उन्होंने कोर्ट को बताया कि आसाराम के स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर आयुर्वेदिक व एलोपैथी के तौर पर करवाई जाती है तथा आसाराम को खाने में खाद्य सामग्री बतौर आवश्यकता के दिया जाता है। इस पर राजस्थान हाईकोर्ट के नवनियुक्त सीजे इंद्रजीत मोहंती व संगीतराज लोढ़ा की खंडपीठ ने उक्त याचिका को जनहित से जुड़ा ना मानते हुए दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करने के आदेश प्रदान किए।

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