रक्तदाताओं व भामाशाहों का किया बहुमान

जोधपुर। शहर में रक्तदान करने वाले और उसमें तन मन धन से सहयोग समर्पित करने वाले विशिष्ट महानुभावों का पारस ब्लड बैंक जोधपुर द्वारा गांधी मैदान में अभिनंदन किया गया। संत ललित प्रभ महाराज, संत चंद्रप्रभ महाराज और मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज के सानिध्य में आयोजित इस अभिनंदन कार्यक्रम में मानवाधिकार आयोग राजस्थान के अध्यक्ष प्रकाश कुमार टाटिया, न्यायाधीश प्रवीण जैन, पारस ब्लड बैंक के डायरेक्टर सुखराज नीलम मेहता, हांगकांग के निखिल मेहता, सुरेश गांधी द्वारा रक्तदाता अशोक लोहिया, रामपाल भवाद, वीरेंद्र देवड़ा, पोकर राम दहिया, करण सिंह राठौड़, फतेह चंद जैन, दिनेश सिंह कच्छवाहा, महेंद्र सिंह कच्छवाहा, रमेश छाजेड़, चेतन राजपुरोहित, गौरीशंकर बोराणा, अशोक भाटी, ओम प्रकाश सीरवी, उमेश सिंह साथिन, मिथिलेश जैन, भूपेंद्र जैन, मान सिंह पंवार, सुमेर सिंह सजाड़ा, दिनेश जांगू, बाबूलाल शाह, दिलीप माथुर, जितेंद्र बोथरा, मोतीलाल मालू, अजय पाल सिंह, समुद्र सिंह, संतोष कडेल, दयाल सिंह सोलंकी, अनिल सिंह बडग़ूर्जर, दौलतराम शाक्य को सम्मान स्वरूप जोधपुरी साफा, माला और प्रशस्ति पत्र समर्पित किया गया।

इस अवसर पर आओ, 1 घंटे में सीखें जीने की कला विषय पर शहरवासियों को संबोधित करते हुए संत ललितप्रभ ने कहा कि हम जीवन एेसा जियें कि हमें मरने के बाद नहीं वरन जीते जी स्वर्ग जैसा सुख और सुकून का एहसास हो। केवल फोटो के नीचे स्वर्गीय लिखने से किसी को स्वर्ग का सुख नसीब नहीं होता। अगर स्वर्गीय लिखने से सारे लोग स्वर्ग में चले जाते तो नर्क तो खाली ही मिलता। अगर हम प्रेम से जीते हैं, एक दूसरे के सुख दुख में काम आते हैं, मिलजुल कर काम करते हैं, बड़ों को सम्मान व छोटों को प्रेम देते हैं और घर के बड़े बुजुर्गों की मर्यादा और सेवा का ख्याल रखते हैं तो हमें इसी धरती पर स्वर्ग का सुख प्राप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि देवरानी जेठानी एक थाली में खाना खाए, सास बहू मिल कर के काम करें, घर के बच्चे बड़ों को प्रणाम करे और बड़े छोटों को गले लगाए, रात को सोने से पहले बुजुर्ग दादा दादी की सेवा करे तो उस घर में साक्षात स्वर्ग के दर्शन हो जाते हैं। अगर हम घर के माहौल को सुधारते हैं, जीवनशैली को ठीक रखते हैं, अपनी सोच और भावनाओं को निर्मल बना देते हैं तो हमें कभी भी नरक की आग में झुलसना नहीं पड़ेगा, हमारे आसपास ही स्वर्ग साकार होता नजर आएगा। सोच को बड़ा बनाने की प्रेरणा देते हुए संतप्रवर ने कहा कि पांव में पड़ी मोच और छोटी सोच इंसान को आगे बढऩे से रोकती है। जैसे 6 फुट का आदमी अपनी लंबाई को 9 फुट नहीं कर सकता, पर वह अपनी सोच को ऊंचा उठा ले तो वह हिमालय से भी ज्यादा ऊंचा उठ सकता है। संतप्रवर ने कहा कि तकरार, दूरियां, झगड़े, खींचतान, कोर्ट केस, तलाक, तनाव और दरार सब छोटी सोच के परिणाम हैं। हम नेगेटिव सोच को हटाए और पॉजिटिव सोच को लाएं। जिंदगी के हर मोड़ पर सोचें कि मान लो तो हार है ठान लो तो जीत है। जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देते हुए संतप्रवर ने कहा कि अपनी जिंदगी के मोबाइल में खुशी को सेव करें, गम को डिलीट करें, रिश्तों को रिचार्ज करें, झूठ को ऑफ करें, प्रेम को इनकमिंग और नफरत को आउटगोइंग करें, गुस्से को होल्ड और मुस्कान को सेंड करें तो जिंदगी की रिंगटोन शानदार बन जाएगी।

चातुर्मास समिति के भैरूलाल बोथरा ने बताया कि गांधी मैदान में सोमवार से पर्युषण महापर्व की सामूहिक आराधना का आयोजन होगा जिसमें कल्पसूत्र और अंतकृत दशांग आगम का सामूहिक वाचन होगा। इस आयोजन में सकल जैन समाज के साथ सर्व समाज के लोग भाग लेंगे। इसके अंतर्गत कल संत ललित प्रभ पर्युषण पर्व का अंतर रहस्य विषय पर विशेष संबोधन देंगे साथ ही जलजोग चौराहा स्थित मंगलायतन भवन में जैन मंदिर में प्रात: 7 बजे सामूहिक भक्तामर पाठ, दोपहर 12 बजे सामूहिक एकासन व्रत और रात्रि 7.30 बजे प्रतिक्रमण का आयोजन होगा।

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