बिल्डरों को मिली छापेमारी की गुप्त सूचना, सबने अपने अपने तरीक़े से ठिकाने लगाए काले धन के काले कागजात।

वापी। आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि उन्हे पता है बिल्डर करोड़ों कि जमीन खरीदकर केवल चंद लाख का रजिस्ट्रेशन करते है और बाकी कि रकम का लेन-देन नगद में कर लिया जाता है, उन्हे यह भी पता है कि बिल्डर इमारत में बनी फ्लेट और दुकान कि बिक्री में काले-धन कि लेन-देन करता है। लेकिन सबूत ना होने के कारण वह कुछ नहीं कर सकते। अगर कोई उन्हे बैठे बिठाए उनके वातानुकूलित कार्यालय में ठोस सबूत लाकर देगा तो वह अवश्य कार्यवाही करने के लिए गांधीनगर में बैठे अपने डीजी साहब से मामले में जांच करने और छापेमारी करने कि इजाज़त मंगेगे और डीजी साहब से आदेश मिलने के बाद ही कार्यवाही या छापेमारी करेंगे। अब इसका तो यही मतलब निकलता है कि वापी में बैठे आयकर अधिकारी केवल दर्शक बने रहना चाहते है? यदि उन्हे सभी सबूत, बिना कुछ किए उनके वानुकूलित कार्यालय में मिले तो ठीक है अन्यथा जैसे चल रहा है वैसे ही चलता रहेगा। खेर अब सवाल यह उठता है कि वलसाड, वापी, दमण और दादरा नगर हवेली के बिल्डरों द्वारा कि जा रही काले-धन कि लेन-देन पर अंकुश कैसे लगेगा?

सबकुछ डीजी साहब के हाथ में है तो फ़िर वापी में आयकर विभाग के दर्जनों अधिकारी क्या केवल स्वांग के लिए है?

वलसाड, वापी, दमण और दादरा नगर हवेली में दर्जनों ऐसे बिल्डर है जिनकी टैक्स चोरी के चर्चे कई बार बाजार गर्म कर चुके है और सेकड़ों ऐसे निर्माणाधीन प्रोजेक्ट है जिनमे अभी भी काले-धन कि लेन-देन जारी बताई जाती है। क्रांति भास्कर द्वारा भी कई बार बिल्डरों कि टैक्स चोरी और काले-धन कि लेन-देन पर प्रमुखता से खबरें प्रकाशित कि गई अपने पिछले अंक में भी क्रांति भास्कर ने अपनी खोजी पत्रकारिता के तहत वलसाड, वापी, दमण और दादरा नगर हवेली के कई बिल्डरों के प्रोजेक्टों में करोड़ों कि टैक्स चोरी का खुलासा किया था। लेकिन टैक्स चोरी पकड़ने वाले आयकर अधिकारियों का कहना है उनके पास कोई सबूत नहीं है। अब यह कितने कमाल कि बात है कि जिन टैक्स चोर बिल्डरों कि जानकारी वापी कि आम जनता को है उन टैक्स चोर बिल्डरों कि जानकारी आयकर विभाग के बड़े बड़े अधिकारियों को नहीं! कही ऐसा तो नहीं कि आयकर विभाग के अधिकारियों और बिल्डरों के बीच पहले से कोई साठ-गांठ है? अब यह सवाल क्यो तो आप को बता दे कि बीते दिनों वापी के एक बड़े बिल्डर को यह सूचना मिली थी कि आयकर विभाग कभी भी उक्त बिल्डर के यहां छापे-मारी कर सकती है।

Income tex Office Vapi
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सूचना के बाद आनन-फ़ानन में बिल्डर ने रातो-रात अपने कार्यालय का हुलिया बदल डाला, काले-धन कि लेन-देन और टैक्स चोरी से संबन्धित सभी दस्तावेज़ अपने मुख्य कार्यालय से कही और किसी अन्य स्थान पर सिफ्ट कर दिए। उसके बाद भी टैक्स चोर बिल्डर का भय कम नहीं हुआ, आयकर विभाग कि छापे-मारी कि सूचना ने बिल्डर को इतना भयभीत कर दिया कि बिल्डर ने अपने कर्मचारियों के मोबाइल फोरमेट करवा दिए, ताकि यदि आयकर विभाग छापेमारी करें तो कर्मचारियों के मोबाइल द्वारा आयकर विभाग को टैक्स चोरी का कोई सुराख ना मिली, मोबाइल फोरमेट के बाद बिल्डर ने अपने कई कर्मचारियों को नए मोबाइल खरीद कर दिए, जिससे कि उनके मोबाइल में बिल्डर कि कोई ऐसी जानकारी ना रहे जो छापेमारी के दौरान बिल्डर को बड़ा टैक्स चोर साबित कर दे। इतना ही नहीं कर्मचारियों को छापे-मारी के दौरान आयकर विभाग द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया। हालांकि इसके अलावे भी बिल्डर के कार्यालय में ऐसी कई चौकाने वाली गतिविधियां हुई जो सिर्फ टैक्स चोरी या आयकर कि रेड के चलने हुई हो यह संभव नहीं, अवश्य टैक्स चोरी के अलावे कई और राज़ भी कैद है बिल्डर के कार्यालयों में और क्रांति भास्कर कि खोजी टिम उस राज़ का पर्दाफास भी कर के रहेगी! वैसे इतना सब होने के बाद जब बिल्डर पूरी तरह बे-फिक्र होकर आयकर विभाग कि रेड का इंतजार करने लगा, तो हद ही हो गई, बिल्डर कि सारी मेहनत और प्रशिक्षण पर पानी फिर गया। बिल्डर आयकर विभाग कि छापेमारी कि प्रतीक्षा करता रह गया और आयकर विभाग कि टिम रेड के लिए आई ही नहीं।

टैक्स चोर बिल्डरों के ग्रीन सिग्नल के बाद होगी रेड?

अब जरा सोचिए कि इतना सब कुछ बिल्डर ने किसी ऐसी सूचना के आधार पर तो नहीं किया होगा जिसकी सूचना का कोई ओचित्य ही ना हो? हो ना हो आयकर विभाग में उक्त बिल्डर का एक खबरी अवश्य रहा होगा जिसने बिल्डर को रेड के लिए तैयार रहने कि जानकारी दी! अब अगर जानकारी दी और रेड नहीं हुई तो इसका एक कारण यह हो सकता है कि जानकारी देने वाले को यह पता ही ना हो कि रेड किसके यहां होने वाली है या किसके रेड कि तैयारी हो रही है? हो सकता है जानकारी देने वाले को सिर्फ इतना पता हो कि कही ना कही रेड होने वाली है और रेड कि तैयारी चल रही है? हो सकता है कही ना कही रेड होने वाली है इस सूचना को बिल्डर ने यह समझ लिया हो कि रेड उसके यहां होगी? और यह भी हो सकता है कि जानकारी देने वाले ने बिल्डर को बिलकुल सही जानकारी दी और जानकारी पाकर टैक्स चोरी के सभी दस्तावेज़ ठिकाने लगाने के बाद बिल्डर ने आयकर अधिकारियों के साथ साठ-गाठ या सेटिंग कर ली और करोड़ों कि टैक्स चोरी में आयकर विभाग के अधिकारियों को भी रिश्वत देकर अपने पक्ष में कर लिया? जिसके चलते रेड हुई ही नहीं? सवाल कई है और बड़ा सवाल यह नहीं है कि इस सब के बाद भी उक्त बिल्डर के यहां रेड क्यो नहीं हुई? रेड तो जब होनी है तब होगी।

जनता से काला धन वसूलना बिल्डर के लिए बाए हाथ का खेल, टैक्स चोरी पकड़ने वाले अधिकारियों काला-धन वसूलना बिल्डर के लिए नामुमकिन!वित्त मंत्री श्री निर्मला सीतारमण को चाहिए कि देश के बड़े बड़े आयकर अधिकारियों पर अपनी पेनी नजरे रखे और समय रहते आयकर अधिकारियों तथा आयकर अधिकारियों के सगे-संबंधी कि संपत्ति कि जांच शुरू करें, जिससे देश को चुना लगाने वालो पर नियमानुसार कार्यवाही कि जा सके।

सवाल तो यह है कि बिल्डर को सूचना किसने दी और किन दामों दी और क्या भविषय में भी बिल्डर को ऐसी ही सूचनाएँ मिलती रहेंगी? इस सवाल के बारे में देश के वित्त मंत्री को भी सोचना चाहिए और इस सवाल का जवाब जानना भारत सरकार के लिए भी आवश्यक है तथा आयकर विभाग के लिए भी साथ ही साथ अनेवेषण विभाग डी जी साहब के लिए भी यह जानना अतिआवश्यक है कि उनके विभाग में बिल्डर का खबरी कौन है? क्यो कि बड़ी पुरानी कहावत है घर का भेदी लंका ढ़ाए! अब आयकर विभाग में घर का भेदी कौन है यह तो स्वय आयकर विभाग के अधिकारियों को पता करना होगा।

यह जानकारी भी जनता के सामने आनी चाहिए।

  • आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग को अब-तक टैक्स चोरी मामले से संबन्धित, कुल कितनी शिकायते मिली?
  • आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग के अधिकारियों ने अब-तक स्वय कुल कितने मामलों में टैक्स चोरी कि जानकारी जमा कर भारत सरकार को दी?
  • आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग द्वारा अब-तक, वलसाड, वापी, दमण और दादरा नगर हवेली के कुल कितने बिल्डरों के यहां छापे मारी कि गई और कुल कितनी टैक्स चोरी पकड़ी गई?
  • आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग द्वारा, अब तक कुल कितने मामले में गांधीनगर में बैठे डीजी साहब से जांच कि या छापेमारी कि इजाज़त मांगी और डीजी साहब ने अब तक कुल कितने मामले में जांच और छापेमारी कि इजाज़त दी?

वैसे क्रांति भास्कर कि टिम ने अपनी खोजी पत्रकारिता द्वारा पता किया तो पता चला वापी आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग में कई बिल्डरों का आना जाना लगा रहता है और जिस बिल्डर को छापेमारी कि सूचना मिली वह भी बीते दिनों आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग में चक्कर लगा चुका है यदि आयकर अधिकारी चाहे तो अपने सीसी टीवी फुटेज देख ले, हो सकता है इसके आलवे उन्हे और भी कुछ सुराख मिल जाए। वैसे आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग के कार्यालय के दरवाजे सभी के लिए खुले है लेकिन उन सभी कि सूची में उन टैक्स चोर बिल्डरों को शामिल करना कहा तक सही है जो आयकर विभाग के अन्वेषन विभाग कि लिस्ट में थे, है या कभी रहे है? खेर इस पूरे मामले को देखते हुए लगता है कि वापी में स्थित आयकर विभाग का अन्वेषण कार्यालय और इस कार्यालय के अधिकारी कभी भी भविष्य में होने वाली छापे-मारी के बारे में पहले से सूचना का गुप्त प्रसारण टैक्स चोरो को कर सकते है इस लिए आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग के डी जी साहब को चाहिए कि वह इस मामले में कोई ऐसे कदम उठाए जिसके चलते आयकर विभाग का अन्वेषण विभाग छापे-मारी कि सूचना को गुप्त रख सके। शेष फिर।

फिलवक्त आयकर विभाग के अन्वेषण विभाग में कुल कितने अधिकारी और कर्मचारी है? उक्त सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम पर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कितनी संपत्ति है? क्या किसी ने ऊंचे बाजार भाव वाली जमीन कम कीमत में खरीदी है? यदि इन सवालों का जवाब मिल गया और इन सवालों के आधार पर आयकर विभाग के डी जी साहब ने जांच शुरू कि तो अवश्य यह भी पता चल जाएगा कि आयकर विभाग में टैक्स चोरो का खबरी कौन है।      

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