कोन कहता है CBI बिकती नहीं है!

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संध प्रदेश दमन-दीव व दादरा नगर हवेली के अधिकारियों द्वारा किए गए घोटालों की फाइलों को देखलों पता चल जाएगा की CBI कितने में बिकती है और कैसे बिकती, हा यह और बात है की CBI के बिकवाली के सबूत की जांच कोन करेगा, और उसकी ईमानदारी कोन तय करेगा की जांच में कोई बेमानी ना हो, लेकिन अगर कोई ईमानदार अधिकारी मामलों की जांच करे तो अवश्य यह पता चलेगा की काली कमाई के काले बादशाहों ने उस जांच एजेंसी को गुड और चासनी चाटने की आदत लगा दी जिसे अब तक ईमानदार छवि वाली जांच एजेंसी कहां जाता है।
दमन दीव व दानह के कई ऐसे विभाग है जिनमे भ्रष्टाचार और CBI दोनों के तार जुड़े मिले, लेकिन CBI पर उंगली उठाने से पहले कोई भी 100 बार सोचता है क्यों की अगर उंगली उठाने वाला भी तो ईमानदार होना चाहिए, ऐसा नहीं है की इस से पहले सीबीआई पर उँगलियाँ नहीं उठी, उठी है लेकिन इस बार मामला भ्रष्टाचार का है और भ्राष्टाचारियों को संरक्षण देने का है।
बताया जाता है की दमन-दीव व दानह में वहीं अधिकारी बड़े बड़े भ्रष्टाचार कर सकता है जो विकास आयुक्त का खास और CBI को संभाल सकता हो, अब इस मामले में संभाल सकने का मतलब तो आप समझ ही गए होंगे।
दोनों संध प्रदेशों में हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायते सुनने व जांच करने के लिए दोनों संध प्रदेशों की अपनी विजिलिन्स विभाग है और दानह में सीबीआई का एक कार्यालय भी है लेकिन उस कार्यालय के नाम पर और कार्यालय के अधिकारियों को कोन कोन से भ्रष्ट अधिकारी संभाल रहे है और सीबीआई किन किन भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रही है यह तो सीबीआई भी अच्छी तरह जानती होगी और दोनों संध प्रदेशों के प्रशासक भी, लेकिन इस से बड़े ताज्जुब की बात है की इस मामले की जानकारी गृह मंत्रालय को भी लिखित रूप में सेकड़ों बार दी गई जिनको गृह मंत्रालय ने कचरे के डब्बे में डाल दिया होगा वरना उसका असर कुछ तो देखने को मिलता।
दमन दीव व दानह के बार ऐसे कितने भ्रष्टाचारी अधिकारी है जो CBI को संभालते है और कितने CBI अधिकारी ऐसे है जो भ्रष्ट अधिकरियों को संरक्षण देते है इसका जवाब सीबीआई को देने चाहिए।
शेष फिर: CBI से जुड़ी खबरों के साथ कुछ नए खुलासों के साथ।

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