राजस्थान के 90 निकायों में मतदान सम्पन्न, नतीजे 31 को, कांग्रेस-भाजपा ने शुरू की बाड़ेबंदी

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डोटासरा सहित 7 मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर

जयपुर। राजस्थान के 20 जिलों 90 के नगर निकायों में सदस्य पदों के लिए 28 जनवरी को मतदान हुआ। इसमें 76.52 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान पूरा होने के साथ ही उम्मीदवारों की बाड़ाबंदी भी शुरू हो गई है। 31 जनवरी को परिणाम आने तक उम्मीदवारों को होटल-रिसोर्ट आदि स्थानों पर रखा जाएगा। चूंकि मतगणना और निकाय प्रमुख के चुनाव में सात दिन का अंतर है, इसलिए बाड़ाबंदी पर जोर दिया जा रहा है। भाजपा जहां अपने पुराने रिकॉर्ड को बनाए रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस के नेताओं पर सत्तारुढ़ होने का दबाव है। आमतौर पर यह माना जाता है कि राज्य में जिस पार्टी की सरकार है उसी पार्टी का कब्जा निकायों पर होता है। 90 निकायों में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ सात मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। ये सातों मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र में आने वाले नगर पालिकाओं के चुनाव में हर स्थिति में कांग्रेस का बोर्ड बनवाना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार इस बार निकाय चुनावों में निर्दलीय पार्षदों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसलिए दोनों ही दलों के नेताओं की नजर निर्दलीय पार्षदों पर भी लगी हुई है।

ये भी पढ़ें-  कोरोना काल में, गोदी मीडिया जनता को गुमराह तो नहीं कर रही है?

 शिक्षा मंत्री डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र की लक्ष्मणगढ़ नगर पालिका, चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के विधानसभा क्षेत्र केकड़ी और सरवाड़ नगर पालिका के चुनाव हुए। उच्च शिक्षा मंत्री देवी सिंह भाटी के विधानसभा क्षेत्र की देशनोक, शाले मोहम्मद की पोखरण, अशोक चांदना की नैनवा, सुखराम विश्नोई की सांचोर तथा मंत्री महेन्द्र चौधरी के विधानसभा क्षेत्र में आने वाली कुचामन और नावां नगर पालिका के चुनाव सम्पन्न हुए। इन मंत्रियों ने अपनी पूरी ताकत लगा रखी थी। यदि मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों में आने वाली नगर पालिकाओं में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिलता है तो इन मंत्रियों की प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।