वापी में आंगड़िया कंपनियों द्वारा करोड़ों इधर से उधर, आयकर अधिकारी निंद्रा में।

VAPI: वापी, दमण और दादरा नगर हवेली में उधोगों की भरमार है। यदि उक्त तीनों क्षेत्रों के उधोगों की गणना की जाए तो आंकड़ा हजारों में होगा। हजारों उधोग होने के कारण यहाँ ऐसे कई कारोबार और व्यवसाय है जिनमे बड़े पैमाने पर नगद लेन-देन किया जाता है। वापी, दमण और दादरा नगर हवेली के उधोगों से निकालने वाले स्क्रेप की खरीद-बिक्री भी एक ऐसा कारोबार है जिसमे अधिकतर इकाइयां और स्क्रेप ट्रेडर नगद में लेन-देंन करते है। वैसे वापी दमण और सिलवासा तथा आप पास के क्षेत्रों में स्थित इकाइयों से प्रतिमाह निकालने वाले स्क्रेप कि रकम का अंदाजा लगाया जाए तो आंकड़ा अरबों में होगा। इसके अलावे दमण और दादरा नगर हवेली से गुजरात में शराब तस्करी के मामलों से भी सभी वाकिफ़ है और जाहीर सी बात है कि शराब कि तस्करी भी नगद रकम में ही कि जाती होगी। स्क्रेप और शराब तस्करी के अलावे भी ऐसे कई कारोबार है जिनमे बड़े पैमाने पर नगद लेन-देन होता है। अब सवाल यह उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर प्रतिदिन नगद रकम बिना बेंकिंग सेवा के एक स्थान अथवा एक शहर से दूसरे शहर तक कैसे पहुँचती है?

तो आपको बता दे कि  नगद में लेन-देन करने और एक जगह से तथा एक शहर से दूसरे शहर में, नगद पहुंचाने एवं प्राप्त करने के लिए वापी में कई अंगड़ियाँ कंपनिया है। वैसे यदि आपको आंगड़िया कंपनियाँ क्या है इस बात कि जानकारी नहीं, तो आपको बता दे कि आंगड़िया कंपनियाँ एक जगह से दूसरी जगह बिना बेंकिंग सेवा के नगदी पहुंचाने का काम करती है और इस काम के लिए वह रकम और जगह के हिसाब से चार्ज ( अपना हिस्सा ) वसूलती है। इस तरह नगद में कि गई लेन-देन के कारोबार को हवाले का कारोबार भी कह सकते है।

वापी में एसी कई आंगड़िया कंपनियाँ है जो शहर के बीचों-बीच दिन दहाड़े, सबके सामने दुकान खोलकर आंगड़िया कंपनी चला रही है, हवाला कारोबार कर रही है, करोड़ों की नगदी इधर से उधर कर रही है और आयकर विभाग के अधिकारी सबकुछ जानते बुझते दर्शक बने तमाशा देख रहे है। वापी में आंगड़िया कंपनियों का हवाला कारोबार देखकर लगता है कि आयकर विभाग के अधिकारियों को आगंडिया कंपनियों पर कार्यवाही करने के लिए, वातानुकूलित कार्यालय में बैठे बिठाए सूचना चाहिए या फिर अधिकारी किसी ऐसे मुखबिर का इंतजार कर रहे है जो उन्हे उनके वातानुकूलित कार्यालय में आकर इस काले-कारोबार कि सारी जानकारी चाँदी कि थाली में परोसे और हवा हो जाए और आयकर विभाग के अधिकारी उस जानकारी के जरिये अपने अपने हिस्से की चाँदी कांटे।

  • आंगड़िया के जरिए पैसे भेजने वाला कोन है, वह पैसा कहा से लाया है,  जिसे वह पैसा भेज रहा है वह कोन है, उस पैसे का वह क्या दुरुपयोग करेगा, पैसे भेजने वाला और पैसे पाने वाला कोई अपराधी तो नहीं? ऐसे कई अहम सवाल है जिसकी जानकारी आंगड़िया कंपनियों को नहीं होती। 

अब ऐसा इस लिए कहा जा रहा है क्यो कि अभी कुछ महीने पहले ही, वापी क्षेत्र के कुछ एक आंगड़िया कंपनियों पर आयकर विभाग द्वारा छापेमारी कर लाखों रुपए जब्त करने का एक मामला प्रकाश में आया था। आयकर विभाग द्वारा की गई यह छापेमारी भी अवश्य ही किसी गुप्त सूचना के आधार पर की गई होगी, अन्यथा बाकी के आंगड़िया कंपनियों पर भी छापेमारी होती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। खेर छापेमारी में आयकर विभाग ने जिस नगदी को जब्त किया था वह नगदी किसकी थी, इन पैसों का असली मालिक कोन था, क्या आयकर विभाग के अधिकारी अब तक इसका पता लगा पाए है? या फिर कुछ एक अंगड़िया कंपनियों के पैसे जब्त कर बाकी बचे अंगड़ियाँ कंपनियों के साथ सेटिंग कर ली गई है? अब यह सवाल इस लिए किया जा रहा है क्यो कि आयकर विभाग की छापेमारी के बाद भी वापी में दर्जनों कि संख्या में खुलेआम अंगड़िया कंपनियाँ चल रही है, खुलेआम प्रतिदिन करोड़ों के हवाले का कारोबार हो रहा है और आयकर विभाग के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे है।

  • पटेल रमेशकुमार अंबालाल एण्ड कंपनी, गोविंदा कोम्प्लेक्ष, 0260 – 2420916 
  • पी मगनलाल एण्ड सन्स, वापी टाउन, 0260 – 2460878
  • पटेल विष्णुभाई कांतिलाल एण्ड कंपनी, एम जी रोड़ वापी, 02632 – 2465763
  • पटेल बाबूलाल कांतिलाल एण्ड कंपनी, एम जी रोड़ वापी, 0260 – 2465287 
  • आर कांतिलाल एण्ड कंपनी, वापी,
  • न्यू इंडिया आंगड़िया सर्विस, गोविंदा कोम्प्लेक्ष, 0260 – 3268771
  • एच रमेशचन्द्र कंपनी, गोविंदा कोम्प्लेक्ष, 0260 2427503
  • पटेल नटवारलाल चिनूभाई एण्ड कंपनी, एम जी रोड़, वापी 0260 – 2462857
  • विजयकुमार विक्रम भाई एण्ड कंपनी, गोविंदा कोम्प्लेक्ष, 0260 – 2426644
  • पटेल सोमभाई रामदास एण्ड कंपनी, गोविंदा कोम्प्लेक्ष, 0260 – 3262358     
  • कीर्तिकुमार अंबालाल एण्ड कंपनी, वापी टाउन, 0260 – 3262744

वैसे वापी में कुल कितनी आंगड़िया कंपनियाँ है, इसकी जानकारी जुटाने के लिए तो आयकर अधिकारियों को अपने वातानुकूलित कार्यालय से बाहर निकालना पड़ेगा। लेकिन कुछ एक आंगड़िया कंपनियों कि जानकारी आयकर विभाग के अधिकारी अपने वातानुकूलित कार्यालय में बैठे रहकर भी प्राप्त कर सकते है। बस उन्हे अपने कंप्यूटर में गूगल करना होगा, गूगल से उन्हे दर्जनों आंगड़िया कंपनियों कि सूची मिल जाएगी। अगर गूगल के बाद ओर आंगड़िया कंपनियों की जानकारी प्राप्त करनी हो तो आयकर अधिकारी जस्ट-डायल कि वेबसाइट पर विजिट कर के देख ले। आंगड़िया कंपनियों के नाम के साथ साथ आंगड़िया कंपनियों का पता ओर फोन नंबर भी मिल जाएंगे। इस पूरी जानकारी के लिए ना ही आयकर विभाग को किसी विभाग में आरटीआई करनी पड़ेगी ना कोई जांच, सब कुछ ऑनलाइन है। क्रांति भास्कर की टीम को कुछ एक अनाड़ियाँ कंपनियों के नाम और पते की जानकारी मिली है और वह आप इस खबर के साथ शामिल सूची में देख सकते है।

  • वापी की आंगड़िया कंपनिया, आयकर अधिकारियों की नाकामी का जीता जागता सबूत।
  • पढे लिखे आई-आर-एस अधिकारी आंगड़िया कंपनियों के हवाला कारोबार पर अंकुश लगाने में नाकाम।
  • इन आंगड़िया कंपनियों ने जीआईडीसी और वापी नगर पालिका से लिए गए शॉप एक्ट लाइसेन्स में क्या कारोबार बताया?

वैसे आंगड़िया कंपनियों कि ऑनलाइन जानकारी देखकर लगता है कि जनता को जानकारी देने में आंगड़िया कंपनियाँ आयकर अधिकारियों से अधिक ईमानदार है। क्यो कि कई मामलो में जनता को आयकर विभाग कि वेबसाइट पर भी पूरी जानकारी नहीं मिलती। आयकर विभाग से जनता को सूचना प्राप्त करनी हो तो आरटीआई का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन आंगड़िया कंपनियों ने तो खुलेआम अपनी कंपनियों के नाम, पते और मोबाइल नंबर के साथ सारी जानकारीयां ऑनलाइन उपलब्ध करा रखी है।

शायद आंगड़िया कंपनियाँ इस तरह खुलेआम ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध कराकर, जनता को आयकर अधिकारियों की नाकामी और कामचोरी के दर्शन करवा रही है! या फिर आंगड़िया कंपनियों को लगता है कि आयकर अधिकारी केवल गरीब पर नियमों कि छड़ी चला सकते है! कुछ ना कुछ तो है, कोई कारण तो है, जिसके चलते वापी में दिन दहाड़े करोड़ों का हवाला कारोबार खुलेआम चल रहा है। कोई अंगड़िया 1 लाख पर 300 रुपये का कमीशन वसूल रहा है तो कोई एक लाख पर 500 का कमीशन वसूल रहा है। इतना ही नहीं यदि किसी के ठिकाने पर उसकी बताई गई जगह पर, रकम पहुंचानी हो तो अंगड़िया कंपनियाँ उसके लिए भी तैयार रहती है। इसे कहते है दिन दहाड़े आयकर नियमों को धत्ता बताना। खेर अब इस पूरे मामले में आंगड़िया कंपनियों का सच सामने आने के बाद, वापी, दमन, सिलवासा और वलसाड में बैठे आयकर विभाग के अधिकारी सभी आंगड़िया कंपनियों पर छापे-मारी करते है या नहीं, यह तो आने वाले समय में पता चलेगा। लेकिन जनता एक सवाल अवश्य आयकर अधिकारियों से करना चाहेगी कि, क्या वह आंगड़िया कंपनियों कि आड़ में, हवाला कारोबार करने वालों से ज्यादा पढे लिखे है? और उनसे ज्यादा नियम जानते है? इस सवाल का जवाब आयकर अधिकारी जनता को कैसे देंगे यह तो नहीं पता, लेकिन यह सवाल आयकर अधिकारियों काबिलियत पर है। इस लिए आयकर अधिकारियों को इस सवाल को दरकिनार करने के बजाय, वापी में चल रहे सभी अंगड़िया कंपनियों के हवाला कारोबार को बंद करवा देना चाहिए, जिससे जनता पुनः यह सवाल ही ना करें। शेष फिर।