दमन-दीव प्रशासन की ओफिसियल वेबसाइट पर कई जानकारियाँ किसी अजूबे के बरा-बर!

दमन-दीव प्रशासन की ओफिसियल वेबसाइट पर कई जानकारियाँ किसी अजूबे के बरा-बर! | Kranti Bhaskar
daman administration website

संध प्रदेश दमन की ओफिसियल वेबसाइट www.daman.nic.in पर जो जानकारियाँ जनता को मिल रही है वह किसी अजूबे से कम नहीं लगती, इसे अजूबा इस लिए कहा जा रहा है क्यों की इस वेबसाइट पर ऐसे ऐसे अधिकारियों के नाम है जो या तो सालो पहले सेवानिवृत ( रिटायर ) हो चुके है या जिनका सालो पहले तबादला हो चुका है, कुछ एक अधिकारी तो ऐसे है जो निलंबित हो चुके है लेकिन इस वेबसाइट पर उन्हे आज भी दमन-दीव प्रशासन का अधिकारी बताया जाता है।

इसी मामले प्रशासन से सुधार की उम्मीद से क्रांति भास्कर ने दिनांक 27-03-2017 को उक्त वेबसाइट के संबंध में तथा उक्त वेबसाइट पर जनता को दी जा रही तथा मिल रही गलत जानकारी के संबंध में एक ख़बर प्रकाशित की थी, लेकिन लगता है की चाटू-पत्रकारिता की आदि हो चुकी प्रशासन ने अब तक क्रांति भास्कर द्वारा प्रकाशित की गई उक्त सच्ची और तीखी खबर ख़बर पर अपनी नज़र तक नहीं डाली, अन्यथा नियम और कानून के तहत अब तक उन अधिकारियों को प्रशासक प्रफुल पटेल द्वारा दंडित अवश्य किया जाता जिनकी वजह से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर इस तरह के सवाल खड़े हो रहे है।

वैसे बड़ी हेरानी की बात है की एक तरफ दमन-दीव प्रशासक प्रफुल पटेल दमन तथा दीव में तकनीकीकरण, आधुनिकीकरण और डिजिटलाइजेशन की बात करते है और दूसरी तरफ दमन-दीव की ओफिसियल वेबसाइट को समय पर उपडेट तक नहीं कर करवा सकते, वैसे इस मामले में गलती प्रशासक प्रफुल पटेल की नहीं उन अधिकारियों की है जो प्रशासक प्रफुल पटेल के सामने विकास और ईमानदारी की बड़ी बड़ी बात करते है और प्रशासक की पीठ पीछे नोटो के बंडल ऐठने में मशरुफ़ रहते है! समय रहते प्रशासक प्रफुल पटेल इस मामले में क्या संज्ञान लेते है और क्या संज्ञान लेते है यह तो समय ही बताएगा।

दमन-दीव प्रशासन से रिटायर हो चुके अधिकारियों के नाम, अभी भी विभागो के लोक सूचना अधिकारी के तौर पर अंकित।  Click This Link 

सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध कराने में दमन-दीव व दानह के कई विभाग समय समय पर विफल दिखाई दिए, कई मामलों में उक्त विभागो एवं विभागीय अधिकारियों पर यह आरोप भी लगे की पूर्व में हुई गड़बड़ियों और घोटालो की जांच से बचने के लिए वह आम जनता को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध नहीं करवाते।

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फिलवक्त क्रांति भास्कर के सामने एक चौकाने वाला मामला आया है जिसे देखकर कही ना कही प्रशासन की पोल खुलती नजर आ रही है। मामला है सूचना के अधिकार के तहत आवेदन का एवं दमन-दीव प्रशासन द्वारा जारी लिस्ट में लोक सूचना अधिकारी के नाम एवं पदनाम का।

दमन-दीव की ओफिसियल वेबसाइट पर यह जानकारी दी गई है की सूचना के अधिकार के तहत किस विभाग से सूचना प्राप्त करने हेतु किस अधिकारी एवं लोक सूचना अधिकारी को आवेदन करना है। लेकिन दमन-दीव प्रशासन की ओफिसियल वेबसाइट पर दी गई जानकारी या तो गलत कही जाएगी या फिर जनता को गुमराह करने वाली। क्यो की उक्त लिस्ट में जिन विभागो के साथ, जिन अधिकारियों के नाम और पदनाम लिखे है उनका तो सालो पहले दमन-दीव प्रशासन से नाता टूट चुका है, एवं वह अपनी सेवा देकर चले गए।

  • दमन की ओफिसियल वेबसाइट के अनुसार अभी भी यह अधिकारी दमन-दीव प्रशासनिक विभागो में नियुक्त है।
  1. Shri V.H.Jethwa.Executive Engineer P.W.D. Div.I, Daman Secretary (PWD)
  2. Shri Kamal Datta, DCF O/o D.C.F., Daman Conservator of Forests
  3. Shri I.S.Talekar, EE O/o Executive Engineer, Dn. III, Daman Secretary (PWD)
  4. Shri Kamal Datta, Principal Scientific Officer Dept. of Science & Tech., Daman Secretary(Education)
  5. Dr. D. Tripathi, Principal Govt. College, Daman Secretary (Education)
  6. Shri R.N. Singh Superintending Engineer O/o the Supdt. Engineer, PWD, Daman Secretary (PWD)
  7. Shri Nand Lal Singh Dy.Collector Collectorate, Daman Collector
  8. Shri V.H.Jethwa, I/c Associate Town Planner,Daman Town and Country Planning Department, Daman Special Secretary (Urban Development)
  9. Shri V, Keshawan, Principal I.T.I., Daman Secretary (Education)
  10. Shri Ajay Kumar, P.I.O, O/o Z.A.O., Daman Secretary(Agri.)
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यदि दमन-दीव प्रशासन की ओफिसियल वेबसाइट का यह आलम है तो दमन-दीव प्रशासन के इन विभागो का क्या हाल होगा यह एक विचारणीय विषय है। साथ ही साथ यह सोचने की भी आवश्यकता है कि यदि सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करने हेतु जो जानकारी प्रशासन की वेबसाइट पर दी गई गई जब वही सही नहीं है तो इस प्रशासन में सूचना के अधिकार के तहत बने नियमों का कितना पालन होता होगा! प्रशासन में बैठे वरीय अधिकारी भले ही इसे एक मामूली गलती समझे लेकिन ऐसी ना जाने कितनी गलतियों के पुतले पहले से प्रशासन की फाइलों में दबे है जिन पर ना कोई कार्यवाही देखने को मिली, ना ही सुधार, जनता शिकायत करती रही और प्रशासन उन शिकायतों को जमा करती रही।

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संध प्रदेश दमन-दीव प्रशासन द्वारा अब तक सरकारी वेबसाइटो पर कितना पैसा पानी की तरह बहाया गया, यह जानकारी तो प्रशासन के पास होगी ही, लेकिन अब, जब इस मामले के सामने आने के बाद यह साफ पता चलता है की यहा उचे मकान और फीके पकवान वाला आलम रहा है। लेकिन अब प्रशासक प्रफुल पटेल इस मामले में कोई कार्यवाही करते है या नहीं तथा जनता को गुमराह करने के लिए संबन्धित अधिकारियों को निलंबित करते है या नहीं, यह तो वक्त बताएगा और शायद इस मामले में प्रशासक का निर्णय यह भी स्पष्ट कर दे की आने वाले समय में इस प्रकार की अनियमीताओं का दौर जारी रहेगा या हर मामूली गलती के लिए अधिकारियों को नियमानुसार दंडित किया जाएगा! शेष फिर।