राष्ट्रपति के पास पहुंचा दानह, दमण-दीव विलय बिल

दानह। दादरा नगर हवेली, दमण-दीव एकीकरण का बिल राज्यसभा में पास होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेज दिया गया है। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद बिल को संवैधानिक मंजूरी मिल जाएगी। जानकारी के अनुसार करीब 58 वर्ष पहले दोनों केन्द्र शासित प्रदेश अलग अलग संघ प्रदेश के तौर पर 1961 में भारतीय गणराज्य में सम्मिलित हुए थे। संयुक्त नई यूटी का नाम दादरा नगर हवेली, दमण-दीव होगा। यह मुंबई हाइकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में ही रहेगा। जानकारी के अनुसार संयुक्त यूटी में दादरा नगर हवेली, दमण व दीव के कलेक्टर मुख्यालय अपनी जगह पहले की तरह बने रहेंगे। राज्यों की तरह कलक्टर की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी।

नये संघ प्रदेश की राजधानी दमण में होगी, जिससे दमणवासियों को विलय के बाद कोई परेशानी नहीं होगी। दादरा नगर हवेली 491, दमण, दीव 110 वर्ग किमी में बसा हुआ है। दादरा नगर हवेली में अनुसूचित जनजाति 43 प्रतिशत हैं जबकि दमण दीव में 9 प्रतिशत हैं। दोनों प्रदेश एक होने से सरकारी योजना व सेवा में आरक्षण का अधिकाधिक फायदा दमण को ही मिलेगा। प्रशासनिक कार्यो के लिए दादरा नगर हवेली की जनता को दमण जाना पड़ेगा। खास बात यह है कि विधेयक का दादरा नगर हवेली के किसी राजनैतिक दल, जनप्रतिनिधि व समाजसेवी संस्था ने विरोध तक नहीं किया। संसद में दादरा नगर हवेली व दमण-दीव के सांसदों ने संघ प्रदेशों के विलयकरण पर खुशी जताई है, तथा निकट भविष्य में मिनी असेम्बली के लिए योग्य कदम बताया है।

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