अब यदि एक ओपन-हाउस हफ्ता-खोरों पर लगाम के लिए भी हो जाए, तो दमन हफ्ता-मुक्त प्रदेश बन जाए।

अब यदि एक ओपन-हाउस हफ्ता-खोरों पर लगाम के लिए भी हो जाए, तो दमन हफ्ता-मुक्त प्रदेश बन जाए। | Kranti Bhaskar
Daman Industries Extortion

संध प्रदेश दमन के उधोगपतियों को अब प्रशासन पर भरोसा कर उन्हे हफ्ता-खोरी की तमाम गाथा सुना देनी चाहिए और प्रशासन को बता देना चाहिए की किस तरह वर्षो से यहाँ के उधोगपतियों का शोषण होता रहा, कभी ठेकेदारी के नाम पर तो कभी भंगार के कारोबार के नाम पर, तो कभी किसी अन्य बहाने से जो खामीयाजा उधोग-जगत वर्षो से भुगतता आ रहा है, उस खामियाजे से अब प्रशासक प्रफुल पटेल ही निजात दिला सकते है।

कभी डीआईए अध्यक्ष पर भी हुआ था बड़ा हमला….

जहां तक हफ्ता-खोरी और भाईगीरी की बात है तो बड़े इत्तफाक की बात है की दमन उधोगिक संगठन के अध्यक्ष अभी पोलिकेब के वाइस प्रेसिडेंट आर-के कुंदानी है, और यह वही आर-के कुंदानी है जिन पर पूर्व में नानी दमन के पास हमला हुआ था, उधोगपति आर-के कुंदानी पर हुए उस हमले की पूरे उधोग-जगत ने निंदा की थी, लेकिन उस वक्त भी इस मामले का कोई निशचित निराकण नहीं निकला, शायद आर-के कुंदानी इस नाते भी दमन प्रशासन को यहां के हालत बेहतर समझा सके।

प्रशासक प्रफुल पटेल के नेतृत्व में अब तक कई बदलाव देखने को मिले, इस एक बदलाव की उम्मीद और…  

वैसे दमन के कई प्रबुद्धों का मानना है कि, दमन-दीव में जितना बदलाव प्रशासक प्रफुल पटेल के दौर में देखने को मिला है उतना आजादी से अब तक देखने को नहीं मिला! न्याय तथा प्रशासनिक व्यवस्था की जो गाड़ी पिछले कई वर्षो से हवा में उड़ रही थी उस गाड़ी को एक वर्ष से भी कम समय में जमीन दिखाने का काम प्रशासक प्रफुल पटेल बखूबी किया है! अब यदि इस पर भी उधोगजगत हाथ पर हाथ धरे बैठा रहे तो फिर अब तक जिस मामले को मजबूरी और लाचारी कहा जाता था आने वाले समय में कही इस चुप्पी को कायरता का नाम ना मिल जाए!

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क्रांति भास्कर जितनी उधोगों के साथ उतनी ही प्रशासन के साथ, क्रांति भास्कर इस मामले में अपनी मुहिम जारी रखेगी

इस मामले में किसी ना किसी को तो आगे आकार पहल करनी ही होगी फिर चाहे वह प्रशासन हो या उधोगपति, वैसे इस मामले की जानकारी मिलने के बाद इस मामले में क्रांति भास्कर की कलम ने अपनी मुहिम छेड़ दी है और दमन को हफ्ता-मुक्त प्रदेश बनाने के लिए वह जितनी उधोगों के साथ खड़ी है उतनी ही प्रशासन के साथ भी खड़ी है, और जब तक दमन एक हफ्ता-मुक्त प्रदेश नहीं हो जाता क्रांति भास्कर अपनी यह मुहिम जारी रखेगी।

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क्रांति भास्कर की कलम को रोकने के प्रयास…

दमन के उधोगों से एक-एक कर इस मामले में पूछताछ करें तो अवश्य उक्त उधोग इस मामले से पर्दा उठाएंगे और प्रशासन का साथ देंगे, ब-शर्ते उन उधोगपतियों को प्रशासन उनकी सुरक्षा का विश्वास दिला दे, क्यों की हफ्ता-खोरी और वसूली करने वालों में कुछ एक बाहुबली की छवी भी रखते है। इस मामले में जब क्रांति भास्कर ने पहली ख़बर प्रकाशित की तभी क्रांति भास्कर को इस मामले से दूरी बनाने की तथा इस मामले अपनी कलम को रोके रखने की हिदायते और धमकिए मिलनी शुरू हो गई, तो जाहीर सी बात है कि यदि जब एक पत्रकार को इस मामले में खुलासा करने और ख़बर लिखने से रोके जाने की नापाक कोशिस हो रही है तो उन उधोगपतियों का आलम क्या होगा जो सालो से यह सब झेल रहे है।

अब तो आधुनिकी करण का जमाना है उधोगपतियों को सीसीटीवी फुटेज दे देना चाहिए पुलिस प्रशासन को…

वैसे दमन पुलिस के पास इस मामले से जुड़ी कुछ-एक जानकारियाँ तो होगी, लेकिन शायद सबूत ना हो, सबूत बिना पुलिस प्रशासन कुछ कर नहीं सकती और उधोगजगत से अधिक सबूत पुलिस प्रशासन को कोई दे नहीं सकता, यदि उधोग-जगत पुलिस प्रशासन को अपने क्षेत्र में लगे केवल सीसी-टीवी फुटेज ही दे दे, उनके आधार पर ही पुलिस प्रशासन उन तमाम हफ्ता-खोरों के गिरेबान तक पहुच जाएगी जो उधोगपतियों से वसूली कर रहे है, इसमे एक बात और है और वह यह है कि, प्रशासक प्रफुल पटेल को भी इस मामले की तह-तक जाने के लिए पुलिस को स्वतंत्र जांच करने की छूट देनी होगी, फिर चाहे हफ्ता वसूली करने वाला किसी का भी आदमी क्यो ना हो, यदि ऐसा हुआ तो बहोता जल्द दमन हफ्ता-मुक्त प्रदेश बन जाएगा।  

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इस मामले में अभी और तह तक जाएगी क्रांति भास्कर, किसके हिस्से में कितना हफ़्ता होगा सबका भांडा-फोड़…

इस पूरे मामले में कितने करोड़ का हफ्ता किसके हिस्से में आता है इसका कोई सही आंकड़ा तो फिलवक्त क्रांति भास्कर के पास नहीं है लेकिन क्रांति भास्कर इस मामले में अभी भी अपनी ख़ोज-बीन जारी रखे हुए है क्रांति भास्कर प्रयास करेगी की इस मामले की तह-तक जाकर एकदम सटीक आंकड़े जनता तथा प्रशासन के सामने रखे। शेष फिर।  

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