दमण PWD में घोटालों का दौर जारी, जनता के टैक्स का पैसा अधिकारियों की तिजोरी में, ना जांच एजेंसियों का भय ना प्रफुल पटेल का!

Daman Secretariat Daman PWD Scam News

दमण। संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली एवं दमण-दीव भाजपा अध्यक्ष (तथा पूर्व के जाने माने आरटीआई कार्यकर्ता तथा भ्रष्टाचार के कई मामलों के शिकायतकर्ता) दीपेश टंडेल फिलवक्त राजनीतिक कार्यक्रमों तथा पार्टी के विस्तार में व्यस्त है, कांग्रेस और विरोध पक्ष मानों कोरंटाइन में चले गए, उधोगपति, व्यापारी, जनता कोरोना और कोरोना की वजह से बाजार में छाई मंदी से परेशान है और कुर्सी के गणेश बने हुए विभागीय अधिकारी भ्रष्टाचार और घोटालों में व्यस्त है!

संघ प्रदेश दमण (PWD) लोकनिर्माण विभाग द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से ऐसा लगता है अधिकारियों को ना जांच एजेंसियों का भय है ना ही प्रशासक प्रफुल पटेल का। मिली जानकारी को देखकर लगता है ( Daman ) दमण में घोटाले और गड़बड़ियों का दौर अब भी जारी है तथा भ्रष्टाचार करने वाले जांच और प्रशासक के कोप से बचने का मंत्र लेकर ही कुर्सी पर बैठे है।

लोक निर्माण विभाग ( Public Works Department ) से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी काफी चौकाने वाली है। विभाग द्वारा बनाए गए वर्क एस्टिमेट की रकम तथा काम के लिए जारी वर्क आर्डर की रकम में ना हजम होने वाली असमानता दिखाई देती है। कई ठेके विभाग द्वारा बनाए गए वर्क एस्टिमेट यानि अनुमानित रकम से काफी अधिक रकम में दिए गए तो कई ठेके वर्क एस्टिमेट यानि अनुमानित रकम से काफी कम रकम में दिए गए।

विभाग द्वारा बनाए गए वर्क एस्टिमेट और ठेका देने की रकम में ना हज़म होने वला अंतर देखकर लगता है की वर्क एस्टिमेट बनाने में भी घोटाले हुए और ठेके जारी करने में भी! लगता है मानों जैसे विभाग एवं विभागीय अधिकारियों ने एजेंसियों तथा ठेकेदारों से मिलीभगत कर उन्हे फाइदा पहुंचाने के हिसाब से वर्क एस्टिमेट बनाए हो! इतना ही नहीं कई विकास कार्य ऐसे है जिनके कार्य की समायावधि समाप्त हो चुकी है लेकिन उनका भुगतान अभी भी बकाया बताया जाता है। अब इसका क्या मतलब निकाला जाए? काम हुआ भी है या नहीं? इसकी जांच कोन करेगा?

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Executive Engineer, PWD Daman

एक विकास कार्य की अनुमानित लागत 64662853/- कार्य विक्रम इन्फ्रा कंपनी को 73712438/- में दिया गया, कार्य की समायावधि 30-01-2019 से 30-12-2019 ( 6 माह ) अब तक भुगतान किया गया 14304352/- अब यह कोनसा हिसाब है और कोनसा नियम? यह तो लोक निर्माण विभाग के अभियंता ही समझा सकते है। वैसे इस प्रकार के कई ठेके है जिनका भुगतान नहीं हुआ, कारण क्या है यह तो विभागीय अधिकारी ही जाने। क्या भी भी बिल पास करने के नाम पर कमिसनखोरी जारी है? क्या कमिसन के लिए ठेकेदारों और एजेंसियों के बिलो का भुगतान रोका जा रहा है?

खेर सूचना के अधिकार के तहत मिला पुलिंदा काफी बड़ा है और जिसकी बारीकी से जांच करनी होगी, क्रांति भास्कर की टिम ने कुछ एक मामलों की जांच की तो पता चला विभागीय अधिकारी इनोवा कार को आइसर बताकर उसके मेंटेनेस और मरमत के नाम पर लाखों रुपये चुना लगा चुके है। वास्तव में हकीकत क्या है ओर अब तक दमण लोक निर्माण विभाग में कितने घोटाले हुए तथा कितने घोटाले करने की योजना पर अधिकारी काम कर रहे है यह पता लगाना तो प्रशासन और जांच एजेंसियों का काम है। खेर जांच होगी तब होगी, लेकिन अब यह कोन बताएगा की इनोवा कार आइसर टेम्पो कैसे बन गई?

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वर्क आर्डर संख्या PWD/19/86 के अनुसार वाहन संख्या : DD03F0160 आईसर टेम्पो, DD03B0102 टाटा वाटर टेंकर, DD03A0114 टाटा टेम्पो की रिपेयरिंग के लिए  M/s. Dayanand Automobiles को 267502/- में दिया गया। https://vahan.nic.in/ पर ढूँढने से पता चला की विभाग ने जिस वाहन संख्या DD03F0160 को आईसर बताया है उसकी कई वर्षों पहले 01-02-2011 को दमण से गुजरात के लिए एनओसी निकल चुकी है और तो और विभाग जिसे आईसर टेम्पो बता कर 2019 में रिपेयरिंग करवा रही है वह तो https://vahan.nic.in/ के अनुसार इनोवा कार है। मतलब कही ऐसा तो नहीं की विभाग ने रिपेयरिंग के लिए आईसर टेम्पो भेजा और रिपेयरिंग के बाद आईसर टेम्पो इनोवा हो गई? लेकिन उसके लिए भी आइसर टेम्पो रिपेयरिंग के भेजना तो पड़ेगा, मगर जिस वाहन का मालिक 2011 में बदल गया और 2011 में दमण से गुजरात के लिए जिस वाहन की एनओसी निकल गई उस वाहन को 2019 में दमण के विभाग ने कैसे रिपेयर करवाया? वैसे इसके अलावे भी कई वाहन ऐसे है जिनकी रिपेयरिंग के नाम पर लाखों रुपये के बिल बने लेकिन उनका मालिक ना लोक निर्माण विभाग है ना ही दमण प्रशासन का कोई ओर विभाग। कुल मिलकर यह कह सकते है दमण लोक निर्माण विभाग के अधिकारी अभी भी घोटाले करने से बाज नहीं आए है और उन्हे किसी का भय नहीं है।

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दमण में वाहन की मरम्मत और रखरखाव का काम लोक निर्माण विभाग के मेकेनिकल इंजीनियर के जिम्मे आता है लेकिन विडम्बना है की मेकिनिकल इंजीनियर को आरटीओ का प्रभार दिया हुआ है, क्या इस घोटाले में लोक निर्माण विभाग के मेकेनिकल इंजीनियर का भी हाथ है? या फिर यह घोटाला भी ऊपर से मिले किसी अधिकारी के आदेश पर हुआ है? सच जो भी हो जनता के सामने आना चाहिए। क्यों की यह पैसा जनता का है। विभागीय अधिकारी जितना अधिक घोटाला करेंगे जनता पर टैक्स का बोझ उतना अधिक बढ़ेगा।

इस लिए प्रशासन के वरीय अधिकारियों को चाहिए की ईमानदारी दिखाए, देश आर्थिक मंदी का सामना कर रहा है, ऐसे में जनता के टैक्स के एक एक रुपये का उपयोग जनहित में हो और किसी प्रकार का घोटाला ना हो इस लिए उक्त मामले के साथ साथ लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी सभी ठेकों की जांच एजेंसी से जांच करवाए और जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वाले तथा घोटाले करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाए।

वैसे प्रशासन के वरीय अधिकारियों को यह भी ध्यान देनी की जरूरत है की पूर्व में विक्रम इन्फ्रा तथा श्रेयेश शर्मा जैसे किन किन एजेंसियों तथा ठेकदारों के खिलाफ शिकायते मिली तथा जांच की मांग की गई, जिन एजेंसियों तथा ठेकदारों के खिलाफ प्रशासन को शिकायते मिली उन एजेंसियों तथा ठेकदारों द्वारा किए गए कार्यों पर प्रशासन के वरीय अधिकारियों को पैनी नजरें रखने की जरूरत है।