चार माह बाद नींद से जागे देव, जोधपुर शहर में रही शादियों की धूम, आज करीब 300 शादियां हुई।

Weddings celebrated in Jodhpur city

जोधपुर। चार महीने की योग निद्रा के बाद भगवान नारायण बुधवार को देव उठनी एकादशी पर कई शुभ योग में उठे। इस बार एकादशी पर सिद्धि, महालक्ष्मी और रवियोग बनेे। ऐसा संयोग लम्बे समय बाद बना है। देवउठनी एकादशी के साथ ही आज से मांगलिक कार्य भी आरंभ हो गए। पूरे जिले में आज करीब तीन सौ से अधिक शादियां हुई। ऐसे में पुलिस व प्रशासन के लिए यह शादियां कोरोना से बचने के लिए चुनौती बनी रही। अधिकारियों ने कई आयोजनों की चैकिंग की। इससे पहले आज भी शाम तक विवाह आयोजन के लिए कलेक्ट्रेट में आवेदकों की भीड़ लग रही।

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कार्तिक महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी को देवप्रबोधिनी एकादशी और देवउठनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। एकादशी तिथि आज सूर्योदय से शुरू हो गई जो कल सूर्योदय तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु सो जाते हैं। इसके बाद देव प्रबोधिनी यानी कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष एकादशी को क्षीरसागर में चार महीने की योग नद्रा के बाद भगवान विष्णु इस दिन उठते हैं। इसके साथ ही एकादशी से विवाह समेत सभी मंगल कार्यों की भी शुरुआत हो जाती है।

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आज मांगलिक कार्यों का पहला दिन था इसलिए आज सावे भी अधिक थे। बताया गया है कि आज शहर में करीब 300 शादियां हुई। इन्हें प्रशासन की ओर से अनुमति दी गई। पूरा प्रशासनिक अमला जहां इन शादी समारोहों पर नजर रखने में जुटा रहा, वहीं आयोजक और परिजन भी शादी में विशेष इंतजाम कर रहे थे। शाम के बाद सभी पुलिस थानों की टीमों ने मैरिज प्लेसेज या गार्डन का दौरा कर कोरोना प्रोटोकॉल की जांच की। नगर निगम, प्रशासन व पुलिस अफसरों की संयुक्त टीमों ने सभी आयोजन स्थलों का जायजा लिया। बता दे कि लॉकडाउन के चलते जो शादियां नहीं हो सकी वह अब होने जा रही है। इस बार 5 माह में केवल 5 मुहूर्त होने से देवउठनी ग्यारस के अबूझ मुहूर्त का लाभ लोग ले रहे हैं। ग्यारस के दिन से शादियों की शुरुआत होती है। इस दिन बिना मुहूर्त के शादी हो जाती है, ऐसे में इस बार की एकादशी पर विवाह आयोजन ज्यादा रहे।