अनुशासन बिना परवरिश अधूरी: बागवान

जोधपुर। ब्लूमिंग बड्स स्कूल में अभिभावकों के लिए पेरेंटिंग सेमिनार आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड होल्डर एवं पेरेंटिंग एक्सपर्ट शेखर बागवान ने बताया कि अनुशासन के बिना परवरिश अधूरी होती है लेकिन बच्चों को अनुशासित करना का मतलब बच्चों को डराना नहीं है। आपको अनुशासन और डर में अंतर पता होना चाहिए। ग्रेट पेरेंटिंग से आप और आपके बच्चे के बीच बहुत अच्छे संबंध विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि बच्चों को अच्छे संस्कार या उनसे किसी भी तरह की उम्मीद करने से पहले अपनी बुरी आदतों को बदलें, आप बच्चों से चाहते हैं, पहले उसे स्वयं करके दिखाये। क्योंकि बच्चा वही करता है जो अपने आसपास देखता है। इसके लिए किताबों के साथ कुछ समय गुजारना, देर रात तक टीवी न देखना, चीजों को सही जगह पर रखना, बच्चों के समाने कभी भी झगड़ा न करना आदि जैसे कुछ अच्छी आदतों को खुद में विकसित करनी होगी। बच्चो के नखरे दिखाने या किसी चीज के लिए जिद करने पर आमतौर पर आप उन्हें डांटते-फटकारने लगते है लेकिन इसका असर बच्चों पर उल्टा पड़ता है। एेसे में आपके जोर से चिल्लाने से बच्चा भी तेज आवाज में रोने व चिखने लगता है। इसलिए इस स्थिति में अपने बच्चों को शांत तरीके से समझाये कि वह जो कर रहा है वो गलत हो। अक्सर पेरेंट्स एक गलती करते है वो किसी बच्चे की किसी खास तरह की गतिविधि से खुश हो जाते है जैसे कि अगर किसी बच्चे के स्कूल में रिकॉर्ड अच्छा है और दूसरे का बुरा है तो आप उन्हें होशियार और कम होशियार के नाम से लेबल लगा देते है। यकीन मानिये यह एक बच्चे में जहां मनोबल बता है तो वहीं दूसरे में हीन भावना भी पैदा कर देता है और साथ ही हो सकता है हीन भावना वाले बच्चे में अपने होशियार कहे जाने वाले के प्रति द्वेष पैदा हो जाए। इसलिए चाहे कुछ भी हो बच्चो को बताएं कि जरुरी नहीं की हर कोई हर काम में परफेक्ट हो और बच्चो की रूचि के बारे में जाने और उसके अनुसार उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने में मदद करे।

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