गुजरात के पूर्व IAS अफसर पर ईडी का छापा, 36 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां जब्त

नई दिल्ली।  सरकार भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारियों पर एक के बाद एक मामले में कार्यवाही करती दिखी लेकिन इसके बाद भी भ्रष्टाचार कम होता नहीं दिखाई दे रहा है सरकारी अधिकारियों बढ़ती संपत्ति और भ्रष्टाचार कि वजह से अब तक कई सरकारों कि किरकिरी होती रही है। अभी पता चला है कि प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने मनी लांड्रिंग मामले में गुजरात कैडर के पूर्व आइएएस अधिकारी संजय गुप्ता व उनके परिवार की 36 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां जब्त की हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1985 बैच के अधिकारी रहे गुप्ता ने वर्ष 2002 में नौकरी छोड़कर आतिथ्य सेवा (हॉस्पिटैलिटी) का कारोबार शुरू किया था, जिसका नाम नीशा ग्रुप ऑफ कंपनीज बताया जाता है।

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ईडी ने उनके खिलाफ मेट्रो लिंक एक्सप्रेस फॉर गांधीनगर एंड अहमदाबाद कंपनी लिमिटेड (एमईजीए) से संबंधित गबन तथा आपराधिक कदाचार के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। गुप्ता अप्रैल 2011 से अगस्त 2013 के बीच एमईजीए के चेयरमैन थे। ईडी के अनुसार, ‘जांच में पाया गया कि गुप्ता ने एमईजीए के चेयरमैन रहते हुए विभिन्न पदों पर अपने करीबियों की नियुक्ति की। गुप्ता ने वर्ष 2012-13 में कई मुखौटा कंपनियां बनाईं और इन कर्मचारियों को उनका निदेशक बना दिया।’

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जांच एजेंसी के अनुसार, ‘गुप्ता ने एमईजीए के ठेकों के लिए किसी नियम का अनुपालन नहीं किया। सामग्री और सेवा की आपूर्ति के लिए मुखौटा कंपनियों को ठेके दिए गए और फर्जी बिल बनाए गए।’ इस मामले में राज्य पुलिस की तरफ से मुकदमा दर्ज होने और गुप्ता व अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद ईडी ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है।

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इस मामले को देखकर लगता है कि अभी भी देश में भ्रष्टाचार अपने फन फैलाए बैठा है और अधिकारी अभी भी रिश्वतख़ोरी कर जनता और सरकार को चुना लगाकर अपनी ऐशगाह आबाद कर रहे है। इस एक मामले के सामने आने के बाद ई-डी को चाहिए कि वह इस मामले को आधार बनाकर अपनी जांच का दायरा बढ़ाए और ऐसे अन्य अधिकारियों कि तलाश करें जिनहोने रिश्वतख़ोरी के दम पर करोड़ों कि अवैध संपत्ति जमा कर रखी है।