सरिगांव और उमरगांव कि इकाइयों में श्रमिकों का शोषण।

वलसाड श्रम विभाग के अधिकारियों कि लापरवाही, कमाउनीति, कामचोरी और भ्रष्टनिती कि वजह से वलसाड, वापी, पारडी, उमरगांव और सरिगांव के श्रमिकों का इकाई संचालक और ठेकदार जमकर शोषण कर रहे है। श्रम अधिकारियों कि साठ-गांठ के चलते मजबूर श्रमिकों कि ना ठेकदार सुनता है ना इकाई संचालक, श्रम विभाग में शिकायत करने पर श्रमिकों को आंखे दिखाई जाती है। सरिगांव के श्रमिक कि शिकायत है कि इकाई संचालक और ठेकदार श्रम विभाग के अधिकारियों कि मदद से श्रमिकों का हक मार रहे है श्रमिकों का शोषण कर रहे है और शिकायत करने तथा न्याय मांगने पर श्रमिकों को इकाई से धक्के मार कर बाहर निकाल दिया जाता है और इसकी शिकायत श्रम विभाग के कार्यालय में करने के बाद भी श्रम विभाग के अधिकारी कोई ठोस कार्यवाही नहीं करते है।

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श्रमिक प्रवीण पटेल ने बताया कि वह पहले सरिगांव स्थित एशियन पेंट में काम करते थे, जब एशियन पेंट ने उन्हे बिना कारण काम से निकाल दिया तो उक्त श्रमिक ने वापी श्रम विभाग में शिकायत कि जो मामला अभी न्याय के लिए लंबित बताया जाता है। इसके बाद श्रमिक प्रवीण पटेल ने सरिगांव स्थित राष्ट्रीय मेटल इंडस्ट्रीज लिमिटेड में काम शुरू किया। प्रवीण पटेल कि शिकायत है कि राष्ट्रीय मेटल इंडस्ट्रीज लिमिटेड लगभग 1 वर्ष से उनका तथा अन्य श्रमिकों का शोषण कर रही है, श्रमिकों को उनका हक नहीं मिल रहा है, हक और न्याय मांगने पर कंपनी से निकाल दिया जाता है। श्रमिक का कहना है कि कंपनी में श्रमिकों को पूरा और नियमानुसार ओवरटाइम नहीं मिलता है ठेकेदार और इकाई संचालक पी-एफ में भी गड़बड़ी कर रहे है। कई श्रमिकों से 24 घंटे बंधुआ मजदूर कि तरह काम करवाया जाता है इतना ही नहीं श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए जाते और ना ही सेलेरी स्लिप दी जाती है।

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श्रमिक का कहना है कि 8 घंटे का 315 और 4 घंटे ओवरटाइम का 315 रुपया होता है लेकिन कंपनी 12 घंटे काम करने के बाद भी पूरा ओवरटाइम नहीं देती, श्रमिक का कहना है कि कंपनी कि एक सिफ्ट में लगभग 300 श्रमिक काम करते है और कंपनी 8 घंटे कि 3 सिफ्ट कि जगह 12 घंटे कि 2 सिफ्ट चलती है, कागजों पर रविवार का अवकाश दिखाती है लेकिन रविवार को भी इकाई में काम चालू रहता है।

वलसाड में बैठे श्रम विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि श्रमिकों का शोषण रोकने के लिए वह इकाई संचालक और ठेकदारों पर पैनी नज़रे रखे, समय समय पर इकाइयों का निरक्ष्ण करें और जिस किसी इकाई के संबंध में किसी श्रमिक कि शिकायत मिले उस इकाई तथा ठेकदार कि बारीकी से जांच करें, जिससे श्रमिकों के शोषण पर अंकुश लग सके।

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श्रमिक का यह भी आरोप है कि श्रम अधिकारी से शिकायत करने पर श्रम अधिकारी इकाई संचालक और ठेकदार से रिश्वत लेकर श्रमिक को मरने के लिए छोड़ देते है और श्रमिक कि आँखों के सामने रिश्वत लेने और देने का खेल चलता है। गुजरात के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को चाहिए कि वह श्रम विभाग के अधिकारियों पर पैनी नजरें रखे और अब तक श्रम अधिकारियों ने श्रमिकों का सौदा कर कितनी चांदी काटी, कितनी रिश्वत ली इसकी भी बारीकी से जांच करें। शेष फिर।