ज्ञानसुंदर सूरी की पुण्यतिथि पर किया गुणगान

जोधपुर। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागछ संघ के तत्वावधान में इतिहास प्रेमी मरूधर केसरी उपकेश जैनाचार्य ज्ञानसुंदरसूरी महाराज की पुण्यतिथि पर श्रद्धा पुष्प अर्पित करते उनके गुणों का गुणानुवाद किया गया।

संघ प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया कि बरखेड़ा तीर्थोद्वारिका साध्वी प्रफुल्लप्रभा वैराग्यपूणा आदि के सान्निध्य में साहित्य सेवा में विश्व पर महान उपकार करने वाले जैनाचार्य ज्ञानसुंदरसूरी महाराज की आज पुण्यतिथि पर उनके तस्वीर पर माल्यार्पण धूप दीपक पूजा अर्चना करते हुए गुणों का स्मरण से भाव भरी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

धर्म सभा को संबोधित करती हुई साध्वी प्रफुल्लप्रभा ने कहा कि हमें उपकारीयो का उपकार कभी भी नहीं भूलना चाहिए उपकारों की कड़ी में ऐसे ही हमारे एक परम उपकारी घेवर मुनि के नाम से विख्यात श्री ज्ञानसुंदरसूरी महाराज थे। जैनाचार्य बनने पर देवगुप्तसूरी नाम से जिन शासन का नाम गौरवान्वित किया। साध्वी ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन समाज एवं साहित्य सेवा में अर्पण कर छोटे बड़े 256 ग्रंथ लिखकर 53500 पुस्तके प्रकाशित करवा कर विश्व पर महान उपकार किया।

ज्ञान सुंदर सूरी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते  वैराग्य पूर्णा ने कहा कि उनका जन्म विक्रम संवत 1937 विजयदशमी को तथा स्थानकवासी दीक्षा विक्रम संवत 1963 चैत्रवद 3 को व सवेगी दीक्षा विक्रम संवत 1972 को मूर्तिपूजक सूरी पद विक्रम संवत 2000 वैशाख सुदी पंचमी को जैनों की सबसे बड़ी पदवी सूरीपद से सुशोभित किए गए थे एेसे महान उपकारी गुणकारी का जितना गुणगान करें उतना कम है।

इस अवसर पर श्राविका रतन बैन वैदमेहता चंदू मोहनोत चंदू भाई सुरेश भाई पगारिया लाभचंद पोरवाल भरत भाई विजयराज मेहता चेतन भाई बागरेचा वल्लभ महिला मंडल सहित कई श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे। विनायकिया ने बताया कि आराधना आयोजन की कड़ी में 11 अगस्त को खीर एेकासना तप पार्श्वनाथ  वामामाता का थाल का एक अनूठा अनोखा भव्य आयोजन किया जाएगा व बकरीद निमित्ते बारस तेरस चौदस तीन दिवसीय आयम्बिल तप आराधना साधना सहित कई कार्यक्रम होंगे।

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