नवरात्रा के दौरान मेहरानगढ़ में इस बार श्रद्धालुओं को साथ लाना होगा परिचय पत्र

जोधपुर। मेहरानगढ़ दुर्ग में इस बार नवरात्रा के दौरान चामुंडा मां के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं को फोटो आईडी साथ में लाना जरूरी होगा। श्रद्वालुओं को फोटो परिचय पत्र देखने के बाद ही अंदर प्रवेश दिया जाएगा। प्रशासन के निर्देशानुसार मंदिर के द्वार प्रात: सात बजे खोले जाएंगे और शाम पांच बजे तक मेहरानगढ़ में प्रवेश कर सकेंगे। उसके बाद प्रवेश निषेध व वर्जित रहेगा।

मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के निदेशक करणीसिंह जसोल ने बताया कि चामुंडा मां के मंदिर में आसोजी नवरात्रि का प्रारम्भ कुंभ स्थापना के साथ 29 सितम्बर से होगा। प्रशासन के निर्देशानुसार दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को असुविधा से बचने के लिए अपने साथ फोटोयुक्त आईडी लाना आवश्यक होगा। इस दौरान शराब साथ लाना या पीकर आना व डीजे साउंड सिस्टम के साथ दर्शनार्थियों का प्रवेश निषेध रहेगा। इसके साथ आगजनी इत्यादि दुर्घटना से बचने के लिए गैस संचालित वाहनों का प्रवेश भी निषेध रहेगा। उन्होंने बताया कि सतवर्ती पाठ का संकल्प और स्थापना का मुहूत्र्त दोपहर 12.05 से 12.20 के बीच का है। जोधपुर राजपरिवार की इष्ट देवी मां चामुंडा की पूजा अर्चना करने के लिए पूर्व नरेश गजसिंह व हेमलता राज्ये उपस्थित रहेंगे। घनश्याम त्रिवेदी ब्रह्म मुहूत्र्त में मां चामुण्डा, मां कालका, मां सरस्वती एवं बेच्छराज की मूर्तियों को पवित्र जल से स्नान करवाएंगे और लाल रंग की कोर तुर्रियां लगी पोशाक धारण करवाएंगे। प्रात: काल मंदिर के शिखर मुख्य ध्वजा और चारों दिशाओं में छोटी-छोटी ध्वजाएं चढ़ाई जाएगी। श्री चामुण्डा मंदिर के पास ‘उपासनालय’ कक्ष में नौ वेदपाठी ब्राह्मण स्थापना से अष्टमी तक दुर्गापाठ का वाचन करेंगे। छह अक्टूबर को अष्टमी की रात हवन प्रारंभ किया जाएगा जिसकी पूर्णाहुति महानवमी सात अक्टूबर को प्रात: 11.15 से 11.45 के बीच में गजसिंह एवं हेमलता राज्ये द्वारा की जाएगी। महानवमी को दोपहर 12.05 से 12.20 से थापनाजी के उत्थापना का मुहूत्र्त एवं 11.45 से 12.05 के बीच गजसिंह की तिलक आरती होगी।

यह रहेगी किले में व्यवस्था

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रशासन के सुझावानुसार सभी व्यवस्थाओं को अन्तिम रूप दिया गया है। जयपोल के बाहर से ही एक पंक्ति में लाइनों की व्यवस्था की गई है जो मंदिर तक रहेगी तथा डीएफएमडी गेट से ही जयपोल व फतेहपोल से दर्शनार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। पट्टे पर महिलाओं, बच्चों एवं वृद्धजनों, दिव्यांगों के लिये आने-जाने की व्यवस्था की गई है। वे वहीं से जाएंगे और वहीं से आएंगे। इसी प्रकार पुरूषों एवं युवाओं के लिए सलीम कोट से होते हुए बसन्त सागर से आने-जाने की व्यवस्था की गई है। इन सभी स्थानों पर बेरिकेड्स लगाने का कार्य सम्पन्न हो चुका है। प्रसाद चढ़ाने के लिए बसन्त सागर पर महामृत्युंजय मूर्ति वाले मार्ग पर पुरूषों के लिए एवं प_े पर महिलाओं के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। जहां पर अतिरिक्त ब्राह्मणों की व्यवस्था प्रसाद चढ़ाने हेतु की गई है जिससे मंदिर परिसर में भक्तगण केवल मां के दर्शन कर पुन: लौट सकेंगे। नारियल बड़ा करने के लिये महिलाओं के लिए पट्टे पर ही व्यवस्था की गई है और पुरूषों के लिए बसन्त सागर के पास व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर में परिक्रमा वर्जित रहेगी। साथ ही पॉलिथीन में प्रसाद का उपयोग वर्जित रखा गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीसी टीवी कैमरों की व्यवस्था की गई है।

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