जब गुजरात में स्कूल फ़ीस 27000 से अधिक नहीं ले सकते तो फिर जोधपुर में क्यो लाखों की फ़ीस वसूल रहे है स्कूल प्रबंधन?

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जब गुजरात में स्कूल फ़ीस 27000 से अधिक नहीं ले सकते तो फिर जोधपुर में क्यो लाखों की फ़ीस वसूल रहे है स्कूल प्रबंधन? | Kranti Bhaskar image 1
Bodhi International School

आम तौर पर शिक्षा को सेवा ही कहां जाता है लेकिन अभिभावकों की बढ़ती परेशानी और शिक्षा के नाम पर मची-लूट को देखकर अब इस व्यवसाय को सेवा कहना शायद सेवा शब्द को शर्मिंदा करना होगा, ऐसा इस ली कहा जा रहा है क्यो कि सेवा के नाम पर इस प्रकार की वसूली कही और देखने को नहीं मिलती!

राजस्थान के जोधपुर शहर की कुछ स्कूलो का मुआइना करने एवं शिक्षा के नाम पर स्कूलो द्वारा वसूली जा रही मोटी सालाना फ़ीस की जानकारी लेने के लिए जब क्रांति भास्कर की टीम, बोधी-इंटरनेशल, लकी इंटरनेशन स्कूल पहुंची तो स्कूल फ़ीस को लेकर जो आंकड़े मिले वह काफी चोकाने वाले साबित हुए।

फ़ीस पूरी लेंगे, गारंटी कुछ नहीं देंगे!

जोधपुर शिकार-गढ़ क्षेत्र में स्थित बोधी-इंटरनेशल स्कूल में प्राइमेरी के-जी की सालाना फ़ीस 148000 रुपये बताई गई, इसके अलावे कुड़ी-भगतासनी हाउसिंग बोर्ड में स्थित लकी इंटरनेशन स्कूल में प्राइमेरी के-जी की सालाना फ़ीस 128500 रुपये बताई गई, अब लाखों की फ़ीस के बाद भी किसी प्रकार की गारंटी तो नहीं मिलती, यह और बात है की स्कूल को देखने के बाद कही से ऐसा नहीं लगता की यह स्कूल पांच सितारा होटल से कम है!

  • गुजरात में, स्कूल चाहे कितना भी शानदार या आलीशान क्यो ना हो सालाना फ़ीस 27000 से अधिक नहीं ली जा सकती।   
  • राजस्थान सरकार की नाकामी का ठीकरा, जोधपुर के अभिभावकों के सिर पर!

वैसे अभिभावकों के लिए स्कूलों की बढ़ती फीस और महंगी शिक्षा सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है, इसी समस्या का समाधान करने के लिए तथा अभिभावकों को राहत दिलाने के लिए गुजरात सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए विधानसभा में नया कानुन बनाया जिसके अनुसार सभी प्राइवेट स्कूलों के लिए फीस की सीमा तय की गई थी, स्कूल फ़ीस के संबंध में गुजरात सरकार द्वारा बनाए गए नए कानून के मुताबिक प्राइमरी स्कूल के लिए अधि‍कतम फीस 15,000 रुपये, सेकंडरी स्कूल के लिए 25,000 रुपये और हायर सेकंडरी स्कूल के लिए 27,000 रुपये से अधिक नहीं वसूली जा सकती।

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इसी कानुन के खिलाफ गुजरात के प्राइवेट स्कूलों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। यही नहीं, कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को ये भी आदेश दिया है कि जिन स्कूल ने 2017-18 के शिक्षा सत्र में ज्यादा फीस ली उनकेा अभि‍भावकों को फीस लौटानी होगी, जो स्कूल इस कानून का पालन नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।

अब गुजरात सरकार द्वारा लिए गए इस फेसले को देखने के बाद राजस्थान में भी इस फेसले का जनता बढ़-चढ़ कर स्वागत कर रही है और जारास्थान सरकार से यह उम्मीद कर रही है की वह भी स्कूलो की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए गुजरात के तर्ज पर राजस्थान में भी स्कूल फ़ीस की सीमा तय करने के जल्द कोई कड़े कदम उठाए, ताकि अभिभावकों राहत मिल सके।

वैसे अभी जोधपुर में स्थित और भी कई स्कुले है जिनकी फ़ीस की जानकारी हांसील करना शेष है फिलवक्त क्रांति भास्कर की पड़ताल जारी है जल्द आगे भी जल्द अन्य स्कूलो द्वारा शिक्षा के नाम पर चल रही लूट का खुलासा कर क्रांति भास्कर की टीम जल्द अन्य स्कूलो को बे-नकाब करेगी। शेष फिर।