यदि ऐसा हुआ तो, दानह कांग्रेस को लोक सभा चुनाव में….

Mohan Delkar Silvassa
Mohan Delkar Silvassa

लोक सभा चुनाव में अब कुछ ही समय रह गया है जैसे जैसे चुनाव नज़दिक आ रहा है वैसे वैसे चुनावी मेंढक में सामने आने लगे है। दमण-दीव व दादरा नगर हवेली इन दोनों प्रदेशों में इस वक्त भाजपा के सांसद है। दमण-दीव में लालुभाई पटेल और दादरा नगर हवेली में नट्टूभाई पटेल। दोनों प्रदेशों में राजनीतिक पार्टियों पर बात करें तो भाजपा के बाद प्रदेश में दूसरे नम्बर की पार्टी के तौर पर जनता कांग्रेस को देख रही है। दमण-दीव में कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल है और कांग्रेस भी सक्रिय ही देखी गई, लेकिन दादरा नगर हवेली में कांग्रेस की स्थिति दमण-दीव से बिलकुल उलट देखी गई। दादरा नगर हवेली कांग्रेस अध्यक्ष मोहन डेलकर ना जाने एक लम्बे समय से कोनसी खिचड़ी पका रहे है जिसमे कही पर भी कांग्रेस दिखाई नहीं देती। ना ही आम जन सभाओ में ना ही प्रेस विज्ञप्तियों में। वैसे पिछले लम्बे समय में कई बार ऐसी खबरे भी सामने आती रही की मोहन डेलकर ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया जितनी बार ऐसी खबरें आई, अफवाह साबित हुई। जितनी बार अफवाओं का बाजार गर्म हुआ उतनी बार मोहन डेलकर की और से यह साफ किया गया की वही दादरा नगर हवेली कांग्रेस के अध्यक्ष है।

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कई बार आई इस्तीफे की ख़बरें लेकिन सभी अफवाएँ साबित हुई।

इन सभी चर्चाओ और अफवाहों के बाद भी दादरा नगर हवेली में कांग्रेस सक्रिय नहीं दिखाई दी। एक लम्बे समय से मोहन डेलकर को कांग्रेस की किसी जन सभा में नहीं देखा गया, दादरा नगर हवेली में होने वाली अधिकतर जन सभाए कभी आदिवासी विकास संगठन के नाम पर तो कभी पूर्व सांसद के नाम पर ही होती रही, मोहन डेलकर कार्यालय से जारी होने वाली प्रेस विज्ञातिया भी पूर्व सांसद के नाम से जारी होती रही। इसका कारण क्या है जनता आज तक नहीं समझ पाई। मोहन डेलकर कांग्रेस के अध्यक्ष है इससे वह सवय इन्कार नहीं करते, लेकिन जब जनता के बीच जाकर जनता से बात करने की बारी आती है तो वह कांग्रेस के धव्ज तले नहीं बल्कि पूर्व सांसद या किसी अन्य संगठन के ध्वज तले जाते है अब ऐसा क्यो है यह जनता जानना चाहती है। कही ऐसा तो नहीं की मोहन डेलकर के अहम ने उन्हे यह विश्वास दिला दिया की दादरा नगर हवेली में यदि वह कांग्रेस के साथ है तो ही कांग्रेस है और यदि वह कांग्रेस के धव्ज तले जन सभा तथा प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं करते तो कांग्रेस के पास दादरा नगर हवेली में कोई अन्य विलक्प नहीं? इस सवाल पर दादरा नगर हवेली कांग्रेस और कांग्रेस की आला कमान को सोचना चाहिए।

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यदि ऐसा कुछ हुआ तो…

दानह के कुछ एक राजनीतिक प्रबुध, मोहन डेलकर की इस राजनीति को मजबूरी का नाम भी दे रहे है और कुछ एक इसे कुत्सित राजनीति भी कह रहे है। दादरा नगर हवेली के राजनीतिक प्रबुध उस दौर की बात कर रहे है जब अटल जी की सरकार गिरी थी और मोहन ने कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा से चुनाव लड़ा था, राजनीतिक जनकरो का कहना है की उस वक्त के लोक सभा चुनाव में दादरा नगर हवेली से कांग्रेस को लोक सभा उम्मीदवार भी नहीं मिला था और कांग्रेस को दाहनु से उम्मीदवार लाना पड़ा, कांग्रेस की करारी हार हुई और मोहन डेलकर चुनाव जीत गए। यदि इस वक्त मोहन डेलकर कांग्रेस से इस्तीफ़ा देते है तो कांग्रेस को उम्मीदवार तैयार करने के लिए समय मिल जाएगा, लेकिन चुनाव के अंतिम घड़ी में मोहन डेलकर ने किसी अन्य पार्टी या निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बनाया तो पुनः कांग्रेस को दाहनु की और देखना पड़ सकता है। हालांकि यह सभी संभावनाएं है और राजनीति में ऐसी संभावनाओ से इन्कार नहीं किया जा सकता है आगे क्या होगा वह तो वक्त बताएगा, लेकिन बीते वक्त से कुछ सीखने को मिले तो उसे अस्वीकार करना मूर्खता होगी।